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करियर अलर्ट: विदेश में एमबीबीएस करने से पहले जान लें ये नियम, एनएमसी के जवाब से बढ़ सकती है छात्रों की परेशानी
Sat, 31 Oct 2026 04:26 PM IST
शिवम तिवारी
नई दिल्ली, पीटीआई
नई दिल्ली, पीटीआई
Published by: शिवम तिवारी
Updated Sat, 31 Oct 2026 04:26 PM IST
सार
विदेश से एमबीबीएस करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के लिए जरूरी खबर है। जॉर्जिया से मेडिकल डिग्री लेने के बाद भारत में डॉक्टर बनने की पात्रता को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अलग-अलग जवाबों ने भ्रम बढ़ा दिया है। कानूनी विशेषज्ञों ने शिक्षा सलाहकारों पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। जानें FMGE परीक्षा और मेडिकल लाइसेंस से जुड़े जरूरी नियम।
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MBBS Abroad
- फोटो : AI Generated
विस्तार
विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अलग-अलग जवाबों ने जॉर्जिया से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के बीच भ्रम पैदा कर दिया है। मामला इस बात से जुड़ा है कि क्या जॉर्जिया से छह साल का एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के बाद भारतीय छात्र यहां डॉक्टर बनने के लिए विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (FMGE) दे सकते हैं? कानूनी जानकारों का कहना है कि आयोग के साफ जवाब नहीं देने का फायदा कुछ शिक्षा सलाहकार उठा रहे हैं।
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NMC के जवाबों में क्या अंतर है?
दो मेडिकल छात्रों ने प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल के माध्यम से आयोग से पूछा था कि क्या जॉर्जिया से छह साल का एमबीबीएस कोर्स करने के बाद वे भारत में FMGE परीक्षा देने के योग्य होंगे? इस पर NMC ने 24 सितंबर को जवाब दिया कि 2021 के नियमों के मुताबिक, मेडिकल डिग्री तभी मान्य होगी, जब जॉर्जिया में MBBS पूरा करने के बाद छात्र को स्वतंत्र रूप से चिकित्सा करने का लाइसेंस मिलता हो। इसके बाद 13 अक्टूबर को इसी सवाल पर दूसरे छात्र को दिए गए जवाब में आयोग ने कहा कि स्वतंत्र लाइसेंस से जुड़े नियमों की जांच सक्षम अधिकारी और विशेषज्ञ समिति कर रही है।
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सलाहकार छात्रों को कैसे गुमराह कर रहे हैं?
दिल्ली हाईकोर्ट में मेडिकल मामलों की पैरवी करने वाले वकील सचिन जैन ने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षा सलाहकार विदेशी विश्वविद्यालयों से मोटा कमीशन लेकर छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। वे NMC के दूसरे जवाब का हवाला देकर छात्रों को भरोसा दिला रहे हैं कि स्वतंत्र लाइसेंस की शर्त जल्द खत्म हो सकती है या इसके लिए कोई दूसरा रास्ता निकाला जा सकता है। जैन के मुताबिक, इस तरह के दावों पर भरोसा करके छात्र विदेश में दाखिला ले रहे हैं। अगर बाद में उनकी डिग्री भारत में मान्य नहीं हुई तो उनका पूरा करियर प्रभावित हो सकता है।
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