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Hindi News ›   Chandigarh ›   The story of the 'cancer train' in Bathinda has changed; now, instead of leaving, patients are arriving

अमर उजाला की ग्राउंड जीरो से पड़ताल: बठिंडा में कैंसर ट्रेन की बदल गई कहानी, अब जाते नहीं... आते हैं मरीज

Sat, 31 Oct 2026 03:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा पंजाब से अंकित यादव की रिपोर्ट
पंजाब से अंकित यादव की रिपोर्ट Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 31 Oct 2026 03:55 AM IST
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सार
ऐसा तब हो पाया है जब मालवा क्षेत्र में कैंसर की स्थिति बिगड़ने पर यहां एम्स और एडवांस कैंसर इंस्टीट्यूट के अलावा कई निजी कैंसर संस्थान स्थापित हुए। हालांकि यह बात भी सच है, कैंसर ट्रेन की दिशा भले ही बदल गई हो लेकिन लोगों की धारणा आज भी नहीं बदल पाई। 
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The story of the 'cancer train' in Bathinda has changed; now, instead of leaving, patients are arriving
सांकेतिक चित्र - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

पंजाब की मालवा बेल्ट में कभी कैंसर मरीजों के लिए बेबसी की पहचान बनी बीकानेर जाने वाली ट्रेन जिसे लोगों ने कैंसर ट्रेन की संज्ञा दे दी थी, की दिशा अब बदल गई है। यानी अब ट्रेन कैंसर मरीजों को बठिंडा से बीकानेर लेकर जाती नहीं बल्कि वहां से मरीजों को लेकर आती है। 



ऐसा तब हो पाया है जब मालवा क्षेत्र में कैंसर की स्थिति बिगड़ने पर यहां एम्स और एडवांस कैंसर इंस्टीट्यूट के अलावा कई निजी कैंसर संस्थान स्थापित हुए। हालांकि यह बात भी सच है, कैंसर ट्रेन की दिशा भले ही बदल गई हो लेकिन लोगों की धारणा आज भी नहीं बदल पाई। 


स्थानीय लोग आज भी रात 9.20 बजे बठिंडा से बीकानेर जाने वाली ट्रेन को कैंसर ट्रेन के नाम से ही जानते हैं। अमर उजाला के संवाददाता ने इलाके के कैंसर रोग विशेषज्ञों, स्थानीय लोगों से जानकारी लेने के अलावा बठिंडा से बीकानेर जाने वाली अबोहर-जोधपुर एक्सप्रेस (कैंसर ट्रेन) में जाकर भी यात्रियों से बात की। बठिंडा या मालवा बेल्ट के अन्य इलाकों से बीकानेर जाने वाले कैंसर मरीज या उनके परिवार तो नहीं मिले लेकिन राजस्थान से कैंसर के उपचार के लिए बठिंडा आने वाले कई लोग मिले। ये लोग दिन में इलाज करवाकर वापस अपने घरों की ओर लौट रहे थे।

एम्स बठिंडा में अब पेट में फैले कैंसर के उपचार के लिए हाइपेक मशीन
एम्स बठिंडा के कैंसर रोग विभाग के एचओडी डॉ. निखिल गर्ग ने बताया मालवा बेल्ट में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन अब उपचार के लिए मरीजों को बीकानेर नहीं जाना पड़ता है बल्कि राजस्थान और अन्य राज्यों के मरीज बठिंडा आ रहे हैं। चिकित्सक के मुताबिक फैल चुके कैंसर के अत्याधुनिक हाइपेक मशीन लगाई गई है।

जब भी दिखाने आते हैं कोच में 8 से 10 मरीज कैंसर के मिल जाते हैं 
राजस्थान के गंगानगर निवासी सुशील बताते हैं कि उनके भाई को कैंसर हुआ है। उनका इलाज एम्स बठिंडा में चल रहा है। जब भी वह अपने भाई को दिखाने आते हैं तो उनके कोच में आठ से 10 मरीज कैंसर के मिलते हैं जो बठिंडा में उपचार के लिए आते हैं। राजस्थान निवासी सुनीता और रामचंद्र भी यही बात दोहराते हैं। 

कैंसर ट्रेन को लेकर पूरे देश में बदनाम है बठिंडा, अब धारणा बदलनी होगी 
पंजाब स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. राजीव देवगन कहते हैं कि प्रदेश में कैंसर के मरीज आज भले ही पहले से ज्यादा देखने को मिलते हैं लेकिन उपचार के लिए उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ता है। बठिंडा में जिस तरह से चिकित्सा संसाधन बढ़े हैं इससे अधिक मामलों की पहचान होना लाजमी है। पूरे देश में बठिंडा कैंसर ट्रेन को लेकर बदनाम है। यह धारणा अब बदलनी होगी। 

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