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Nuh News: स्कूल के रिकॉर्ड में 250 बच्चों के नाम, मिले सिर्फ 20
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गुबराड़ी के मिडिल स्कूल में सात कमरे, पांच जर्जर हालत में, छत से निकले सरिये, बरसात में टपकता है पानी
गुरुदत्त भारद्वाज
पुन्हाना। गुबराड़ी गांव के राजकीय मिडिल स्कूल की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। स्कूल के रिकॉर्ड में करीब 250 विद्यार्थियों के नाम दर्ज हैं, लेकिन बुधवार सुबह पड़ताल के दौरान स्कूल में महज 20 बच्चे ही मौजूद मिले। सुबह स्कूल खुलने के समय परिसर में एक चौकीदार दिखाई दिया, जबकि करीब सवा आठ बजे पांच शिक्षक स्कूल पहुंचे। विद्यार्थियों की कम संख्या और स्कूल भवन की जर्जर हालत को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्कूल भवन में कुल सात कमरे हैं। इनमें से पांच कमरे जर्जर हालत में हैं। कई कमरों की छत से सरिये बाहर निकले हुए हैं। दीवारों और छत की हालत भी खराब है। बरसात के दिनों में अधिकांश कमरों की छत से पानी टपकता है। इससे विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई करने में परेशानी होती है। वहीं, जर्जर कमरों में कक्षाएं लगने से किसी अनहोनी की आशंका भी बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन की हालत लंबे समय से खराब है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
शिक्षक बोले-गांव के अधिकतर बच्चे मदरसे में पढ़ते हैं
शिक्षकों का कहना है कि गांव के अधिकतर बच्चे मदरसे में पढ़ते हैं। मदरसे की पढ़ाई पूरी करने के बाद ये बच्चे सुबह 10 बजे के बाद स्कूल पहुंचते हैं। शिक्षकों के मुताबिक बच्चों को स्कूल आने के लिए गांव की मस्जिद से भी सूचना दी जाती है। इसके बावजूद सुबह के समय स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या काफी कम रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग को स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति की भी जांच करनी चाहिए।
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दो साल पहले प्राइमरी से मिडिल में हुआ अपग्रेड
ग्रामीणों के अनुसार, राजकीय स्कूल को करीब दो वर्ष पहले प्राइमरी से मिडिल स्कूल में अपग्रेड किया गया था। स्कूल के रिकॉर्ड के मुताबिक प्राइमरी कक्षाओं में 151 विद्यार्थी और मिडिल कक्षाओं में करीब 90 विद्यार्थी दर्ज हैं। स्कूल को अपग्रेड किए जाने के बाद विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन भवन में पर्याप्त और सुरक्षित कमरों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। सात कमरों में से पांच की हालत खराब होने के कारण विद्यार्थियों को बैठाने की व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
हादसे का बना रहता है डर
ग्रामीण सलीम, तौफिक, अलीम, अय्युब, शरीफ ने बताया कि जर्जर कमरों की छत से सरिये दिखाई दे रहे हैं। बरसात में पानी टपकने के कारण भवन और अधिक खराब हो रहा है। यदि समय रहते कमरों की मरम्मत या नए कमरों का निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से स्कूल भवन की तकनीकी जांच कराने, जर्जर कमरों को हटाने और नए कमरों का निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही स्कूल में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति की जांच कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की है।
स्कूल के जर्जर कमरों के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उच्च अधिकारियों के आदेश मिलते ही जर्जर कमरों को तोड़कर नए कमरों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।
- वीरेन्द्र कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी पुन्हाना
फोटो कैप्शन:- स्कूल की छत से दिखाई देता सरिया व स्कूल परिसर में अध्यापक व बच्चे।
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गुरुदत्त भारद्वाज
पुन्हाना। गुबराड़ी गांव के राजकीय मिडिल स्कूल की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। स्कूल के रिकॉर्ड में करीब 250 विद्यार्थियों के नाम दर्ज हैं, लेकिन बुधवार सुबह पड़ताल के दौरान स्कूल में महज 20 बच्चे ही मौजूद मिले। सुबह स्कूल खुलने के समय परिसर में एक चौकीदार दिखाई दिया, जबकि करीब सवा आठ बजे पांच शिक्षक स्कूल पहुंचे। विद्यार्थियों की कम संख्या और स्कूल भवन की जर्जर हालत को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्कूल भवन में कुल सात कमरे हैं। इनमें से पांच कमरे जर्जर हालत में हैं। कई कमरों की छत से सरिये बाहर निकले हुए हैं। दीवारों और छत की हालत भी खराब है। बरसात के दिनों में अधिकांश कमरों की छत से पानी टपकता है। इससे विद्यार्थियों को कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई करने में परेशानी होती है। वहीं, जर्जर कमरों में कक्षाएं लगने से किसी अनहोनी की आशंका भी बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन की हालत लंबे समय से खराब है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
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शिक्षक बोले-गांव के अधिकतर बच्चे मदरसे में पढ़ते हैं
शिक्षकों का कहना है कि गांव के अधिकतर बच्चे मदरसे में पढ़ते हैं। मदरसे की पढ़ाई पूरी करने के बाद ये बच्चे सुबह 10 बजे के बाद स्कूल पहुंचते हैं। शिक्षकों के मुताबिक बच्चों को स्कूल आने के लिए गांव की मस्जिद से भी सूचना दी जाती है। इसके बावजूद सुबह के समय स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या काफी कम रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग को स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति की भी जांच करनी चाहिए।
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दो साल पहले प्राइमरी से मिडिल में हुआ अपग्रेड
ग्रामीणों के अनुसार, राजकीय स्कूल को करीब दो वर्ष पहले प्राइमरी से मिडिल स्कूल में अपग्रेड किया गया था। स्कूल के रिकॉर्ड के मुताबिक प्राइमरी कक्षाओं में 151 विद्यार्थी और मिडिल कक्षाओं में करीब 90 विद्यार्थी दर्ज हैं। स्कूल को अपग्रेड किए जाने के बाद विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन भवन में पर्याप्त और सुरक्षित कमरों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। सात कमरों में से पांच की हालत खराब होने के कारण विद्यार्थियों को बैठाने की व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
हादसे का बना रहता है डर
ग्रामीण सलीम, तौफिक, अलीम, अय्युब, शरीफ ने बताया कि जर्जर कमरों की छत से सरिये दिखाई दे रहे हैं। बरसात में पानी टपकने के कारण भवन और अधिक खराब हो रहा है। यदि समय रहते कमरों की मरम्मत या नए कमरों का निर्माण नहीं कराया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से स्कूल भवन की तकनीकी जांच कराने, जर्जर कमरों को हटाने और नए कमरों का निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही स्कूल में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति की जांच कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की है।
स्कूल के जर्जर कमरों के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उच्च अधिकारियों के आदेश मिलते ही जर्जर कमरों को तोड़कर नए कमरों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।
- वीरेन्द्र कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी पुन्हाना
फोटो कैप्शन:- स्कूल की छत से दिखाई देता सरिया व स्कूल परिसर में अध्यापक व बच्चे।