भारत का स्वदेशी 'काल' ड्रोन: दुश्मन के घर में घुसकर मचाएगा तबाही, हवा को एक हजार किमी तक भेदकर करेगा अटैक
आईजी डिफेंस की ओर से विकसित काल (केएल) लंबी दूरी वाले वन-वे अटैक ड्रोन का राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में सफल परीक्षण किया गया। कंपनी के मुताबिक काल को एक हजार किलोमीटर तक की रेंज के साथ उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी एंड्योरेंस सात से आठ घंटे और पेलोड क्षमता 50 किलोग्राम तक है।
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भारत में लंबी दूरी के स्वदेशी मानवरहित स्ट्राइक सिस्टम विकसित करने में नोएडा की डिफेंस कंपनी ने अपना नाम रोशन किया। आईजी डिफेंस की ओर से विकसित काल (केएल) लंबी दूरी वाले वन-वे अटैक ड्रोन का राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में सफल परीक्षण किया गया। कंपनी के अनुसार, 20 सितंबर को हुए परीक्षण में ड्रोन के एयरफ्रेम, प्रोपल्शन, एवियोनिक्स, नेविगेशन और मिशन सिस्टम को परखा गया।
कंपनी के मुताबिक काल को एक हजार किलोमीटर तक की रेंज के साथ उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी एंड्योरेंस सात से आठ घंटे और पेलोड क्षमता 50 किलोग्राम तक है। ड्रोन 5,000 मीटर तक की ऊंचाई पर संचालन कर सकता है। इसमें मल्टी-बैंड जीएनएसएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे मिशन के दौरान यह स्वायत्त रूप से उड़ान भर सकता है। आईजी डिफेंस के अधिकारियों ने कहा कि पोखरण में सफल परीक्षण कंपनी और भारत के स्वदेशी रक्षा तकनीक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि काल को लंबी दूरी, स्वायत्त संचालन, पेलोड क्षमता और बड़े पैमाने पर स्वदेशी उत्पादन को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। वह इसी तरह अन्य डिफेंस उपकरण को तैयार करने पर काम कर रहे हैं।
रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को बनाया जा सकता है निशाना
आईजी डिफेंस के अनुसार, काल को निर्धारित लक्ष्यों पर सटीक कार्रवाई के लिए तैयार किया गया है। मिशन कॉन्फिगरेशन और संबंधित मंजूरियों के आधार पर इसका इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर, रडार इंस्टॉलेशन, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है।
आधुनिक युद्ध में निभाएगा बड़ी भूमिका
रूस-यूक्रेन युद्ध समेत हालिया संघर्षों में लंबी दूरी के वन-वे अटैक ड्रोन के इस्तेमाल ने इस तकनीक का महत्व बढ़ाया है। शहेद-136 और गेरेन-2 जैसे ड्रोन सिस्टम के इस्तेमाल से लंबी दूरी की मानवरहित स्ट्राइक क्षमता और बड़े पैमाने पर ड्रोन उत्पादन पर दुनिया का ध्यान गया है। इसी बढ़ती जरूरत के बीच काल को भारत की स्वदेशी क्षमता के रूप में विकसित किया गया है।
अब इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित करने पर काम कर रही कंपनी
काल को आईजी डिफेंस के ग्रिड स्ट्राइक लॉन्ग रेंज प्रिसिजन-स्ट्राइक पोर्टफोलियो का हिस्सा बताया गया है। कंपनी इंटरसेप्टर ड्रोन, एफपीवी कॉम्बैट ड्रोन, ऑटोनॉमस यूएवी, काउंटर-यूएएस, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एआई आधारित स्वार्म तकनीक समेत अन्य रक्षा प्रणालियों पर भी काम कर रही है।
काल को लंबी दूरी, स्वायत्त संचालन, पेलोड क्षमता और बड़े पैमाने पर स्वदेशी उत्पादन को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, अन्य इसी तरह के उपकरण भी तैयार किए जा रहे हैं। -बोधिसत्व संघप्रिय, संस्थापक व सीईओ, आईजी डिफेंस, सेक्टर 63