{"_id":"6ae7a41b1e4284136b0072a9","slug":"itc-evasion-of-ghaziabad-news-c-198-1-gbd1023-26197-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: 12 फर्जी फर्मों से 8.55 करोड़ की आईटीसी चोरी पकड़ी, जांच में खुला फर्जीवाड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: 12 फर्जी फर्मों से 8.55 करोड़ की आईटीसी चोरी पकड़ी, जांच में खुला फर्जीवाड़ा
विज्ञापन
साहिबाबाद। राज्यकर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने गाजियाबाद में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) चोरी का मामला पकड़ा है। विभाग की टीम ने शहीद नगर स्थित एक फर्म की जांच में 12 बोगस और अस्तित्वहीन फर्मों के माध्यम से करीब 8.55 करोड़ रुपये की आईटीसी प्राप्त करने का मामला उजागर किया है। जांच के दौरान फर्म के परिसर में बिना बिल के करीब 58 लाख रुपये का स्टॉक भी मिला। विभाग ने उपलब्ध आईटीसी में से 53 लाख रुपये को राजस्वहित में ब्लॉक कर दिया है।
अपर आयुक्त गाजियाबाद जोन प्रथम और अपर आयुक्त (एसआईबी) के निर्देशन में 31 अक्तूबर 2026 को राज्यकर विभाग की टीम ने शहीद नगर स्थित फर्म की जांच की। यह फर्म केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के अंतर्गत पंजीकृत है। फर्म की ओर से मशीनरी, कटिंग मशीन और पेपर प्रिंटिंग मशीन आदि की खरीद-बिक्री के लिए पंजीकरण कराया गया था। जांच में सामने आया कि फर्म ने दिल्ली की 12 बोगस और अस्तित्वहीन फर्मों से करीब 8.55 करोड़ रुपये की आईटीसी प्राप्त की थी। विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में फर्म की ओर से 30.51 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई गई थी, जबकि करीब 7.50 करोड़ रुपये की खरीद दर्शाई गई। इसमें आईटीसी का समायोजन करते हुए कर देयता को कम किया गया। हरियाणा की दो फर्मों पिंकी सॉल्यूशन एलएलपी और एक अन्य फर्म के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री दर्शाई गई। जांच के दौरान मौके पर कुछ पुरानी मशीनें मिलीं, लेकिन उनके संबंध में फर्म के अधिकृत प्रतिनिधि कोई संतोषजनक अभिलेख या विवरण उपलब्ध नहीं करा सके। इसके अलावा बिना बिल के करीब 58 लाख रुपये का स्टॉक भी मिला, जिसका विभागीय टीम ने सत्यापन किया।
-- -- -- -- -- -- -
रिटर्न में दर्शाई 81.33 लाख रुपये की अतिरिक्त आईटीसी
विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में फर्म ने अपने रिटर्न में 81.33 लाख रुपये की अतिरिक्त आईटीसी भी दर्शाई थी। वहीं, वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक कुल 3.94 करोड़ रुपये के ई-वे बिल का विवरण भी जांच के दायरे में आया है। प्रारंभिक जांच में दिल्ली और हरियाणा की फर्मों से खरीद-बिक्री के दस्तावेजों में अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग ने फर्म के क्रेडिट लेजर में उपलब्ध 53 लाख रुपये की आईटीसी को ब्लॉक कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में विस्तृत जांच जारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अपर आयुक्त गाजियाबाद जोन प्रथम और अपर आयुक्त (एसआईबी) के निर्देशन में 31 अक्तूबर 2026 को राज्यकर विभाग की टीम ने शहीद नगर स्थित फर्म की जांच की। यह फर्म केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के अंतर्गत पंजीकृत है। फर्म की ओर से मशीनरी, कटिंग मशीन और पेपर प्रिंटिंग मशीन आदि की खरीद-बिक्री के लिए पंजीकरण कराया गया था। जांच में सामने आया कि फर्म ने दिल्ली की 12 बोगस और अस्तित्वहीन फर्मों से करीब 8.55 करोड़ रुपये की आईटीसी प्राप्त की थी। विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में फर्म की ओर से 30.51 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई गई थी, जबकि करीब 7.50 करोड़ रुपये की खरीद दर्शाई गई। इसमें आईटीसी का समायोजन करते हुए कर देयता को कम किया गया। हरियाणा की दो फर्मों पिंकी सॉल्यूशन एलएलपी और एक अन्य फर्म के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री दर्शाई गई। जांच के दौरान मौके पर कुछ पुरानी मशीनें मिलीं, लेकिन उनके संबंध में फर्म के अधिकृत प्रतिनिधि कोई संतोषजनक अभिलेख या विवरण उपलब्ध नहीं करा सके। इसके अलावा बिना बिल के करीब 58 लाख रुपये का स्टॉक भी मिला, जिसका विभागीय टीम ने सत्यापन किया।
विज्ञापन
रिटर्न में दर्शाई 81.33 लाख रुपये की अतिरिक्त आईटीसी
विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में फर्म ने अपने रिटर्न में 81.33 लाख रुपये की अतिरिक्त आईटीसी भी दर्शाई थी। वहीं, वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक कुल 3.94 करोड़ रुपये के ई-वे बिल का विवरण भी जांच के दायरे में आया है। प्रारंभिक जांच में दिल्ली और हरियाणा की फर्मों से खरीद-बिक्री के दस्तावेजों में अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग ने फर्म के क्रेडिट लेजर में उपलब्ध 53 लाख रुपये की आईटीसी को ब्लॉक कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में विस्तृत जांच जारी है।
विज्ञापन