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Dehradun News: एसडीएस दफ्तर में एसआईटी ने तीन घंटे की जांच, दस्तावेज कब्जे में लिए

Sun, 20 Sep 2026 02:34 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 02:34 AM IST
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The SIT conducted a three-hour investigation at the SDS office and seized documents
फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले के मामले की जांच एसआईटी ने तेज कर दी है। शनिवार को एसआईटी ने एसडीएम सदर कार्यालय पहुंचकर करीब तीन घंटे तक जांच की। टीम ने प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित फाइलों और राजस्व अभिलेखों की पड़ताल की। कई अहम दस्तावेज कब्जे में लेने के साथ ही प्रमाणपत्र से जुड़े तत्कालीन जांचकर्ता पटवारी के बयान भी दर्ज किए गए। एसआईटी ने एसडीएम कार्यालय से इस प्रकरण से जुड़ी सभी फाइलें और अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा है।
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मामला नीट-यूजी 2025 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी का लाभ लेकर एमबीबीएस में दाखिले से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर के नाम से जारी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया। इस मामले में रायपुर और क्लेमेंटटाउन थाने में प्राथमिकी दर्ज है। जांच में सामने आया था कि चार छात्राओं परी, खुशी, स्वाति और तृप्ति ने एमबीबीएस में दाखिले के लिए धर्मवीर वर्मा नाम के व्यक्ति को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बताते हुए उनके नाम पर आश्रित प्रमाणपत्र बनवाया था। जिला प्रशासन की सरकारी पंजिका और रिकॉर्ड खंगाले गए तो इस नाम के किसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल खड़े हुए। अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों की जांच के लिए एसएसपी ने 18 सितंबर को एसपी देहात के पर्यवेक्षण में पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की थी।
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टीम ने प्रमाणपत्र के सत्यापन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े पटवारी को भी एसआईटी ने जांच के दायरे में शामिल किया है। पटवारी के बयान दर्ज कर यह जानने का प्रयास किया गया कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले किस तरह का सत्यापन किया गया था। राजस्व अभिलेखों में दर्ज जानकारी और प्रमाणपत्र में लिखे तथ्यों के बीच अंतर है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। एसआईटी प्रभारी एसपी देहात जया बलोनी ने बताया कि एसआईटी ने इस मामले से संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए हैं। जांच में जो भी तथ्य प्रकाश में आएंगे उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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एसडीएम कार्यालय में खंगाली प्रमाणपत्र की पूरी प्रक्रिया
एसआईटी ने शनिवार को एसडीएम सदर के कार्यालय में पहुंचकर प्रमाणपत्र तैयार होने से लेकर उसके जारी होने तक की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। टीम ने राजस्व विभाग की उन फाइलों को देखा, जिनके आधार पर स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र जारी किया गया था। अधिकारियों और कर्मचारियों से प्रमाणपत्र के लिए प्राप्त आवेदन, उसके सत्यापन और रिपोर्ट से संबंधित जानकारी भी जुटाई गई। एसआईटी ने कार्यालय से इस मामले से संबंधित सभी फाइलें और अभिलेख मांगे हैं। इन दस्तावेजों का मिलान प्रमाणपत्र में दर्ज तथ्यों और अभ्यर्थियों की ओर से दाखिले के समय प्रस्तुत दस्तावेजों से किया जाएगा। जांच टीम यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रमाणपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर सत्यापन हुआ था।
धर्मवीर के पुत्र-पौत्र से पूछताछ
जिस स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर के नाम से प्रमाणपत्र जारी होने की बात सामने आई है, उनके परिवार के सदस्यों से भी एसआईटी ने पूछताछ की। टीम ने धर्मवीर के पुत्र और पौत्र के बयान दर्ज किए हैं। परिजनों से यह जानकारी ली गई कि उनके परिवार में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र से संबंधित कौन-कौन से दस्तावेज मौजूद हैं और संबंधित अभ्यर्थियों से उनका कोई संबंध है या नहीं। परिजनों के बयानों का अब प्रमाणपत्र में दर्ज विवरण और राजस्व रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि प्रमाणपत्र में दर्ज पारिवारिक और अन्य जानकारियां वास्तविक हैं या नहीं।
चार अभ्यर्थियों के पते निकले फर्जी
एसआईटी की जांच में अब तक प्रकरण में शामिल चार अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए हैं। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इन पतों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और दाखिले के लिए जमा कराए गए दस्तावेजों में इनका उल्लेख कैसे हुआ। पुलिस अभ्यर्थियों की ओर से दाखिले के समय प्रस्तुत किए गए अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

विश्वविद्यालय से भी मांगे रिकॉर्ड
एसआईटी ने एमबीबीएस दाखिले से संबंधित रिकॉर्ड के लिए संबंधित विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थानों से भी दस्तावेज मांगे हैं। इनमें अभ्यर्थियों की ओर से जमा किए गए प्रमाणपत्र, आवेदन पत्र और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी के तहत दाखिले से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं। इन दस्तावेजों का राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। एसआईटी अब तक सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी होने की पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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