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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Strict standards for financial discipline for five years; FRBM Amendment Bill 2026 introduced

उत्तराखंड: वित्तीय अनुशासन के पांच साल तक कड़े मानक, एफआरबीएम संशोधन विधेयक 2026 पेश, 3% राजकोषीय घाटा

Wed, 28 Oct 2026 12:14 PM IST
Renu Saklani आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, भराणीसैंण
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, भराणीसैंण Published by: Renu Saklani Updated Wed, 28 Oct 2026 12:14 PM IST
सार

राज्य सरकार ने वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने और कर्ज पर नियंत्रण रखने के लिए नई व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत 2026-27 से 2030-31 तक राजकोषीय घाटे और कुल कर्ज की सीमा तय रहेगी। विधानसभा में पेश संशोधन विधेयक में इन प्रावधानों को 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों और केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रखा गया है।

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Strict standards for financial discipline for five years; FRBM Amendment Bill 2026 introduced
बैठक - फोटो : सूचना

विस्तार

प्रदेश में वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य 16वें वित्त आयोग की संस्तुतियों और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना है।

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विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के पांच वर्षों की अवधि में राज्य सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के तीन प्रतिशत तक सीमित रखेगी। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल दायित्व या संचयी ऋण की सीमा जीएसडीपी के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होने का प्रावधान किया गया है।

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पूंजीगत निवेश और आपदाओं पर विशेष छूट

भारत सरकार की पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत किए गए व्यय को राजकोषीय घाटे की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य के वित्त पर अप्रत्याशित भार पड़ने पर राजकोषीय व राजस्व घाटे की तय सीमा में सशर्त छूट मिल सकेगी। हालांकि, सीमा से अधिक घाटे की संभावना बनने पर सरकार को इसके कारणों और विस्तृत रिपोर्ट को यथाशीघ्र राज्य विधानसभा के पटल पर रखना अनिवार्य होगा।

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