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छत्तीसगढ़: तलाक के केस में पत्नी को नहीं मिला नोटिस, फैमिली कोर्ट के एकतरफा फैसले को हाईकोर्ट ने किया रद्द

Mon, 05 Oct 2026 08:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 05 Oct 2026 08:35 AM IST
सार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में फैमिली कोर्ट के एकतरफा फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना उसके खिलाफ आदेश नहीं दिया जा सकता। अखबार में नोटिस प्रकाशित करना अंतिम उपाय है और उससे पहले नोटिस देने तथा घर पर चस्पा करने की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।

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Chhattisgarh High Court Quashes Family Court's Ex-Parte Divorce Ruling After Wife Receives No Notice
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय - फोटो : C.G. High Court

विस्तार

फैमिली कोर्ट ने तलाक के मामले में पत्नी को समुचित तरीके से नोटिस दिए बिना एकतरफा फैसला सुना दिया। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इसे कानून में निर्धारित प्रक्रिया के खिलाफ माना है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डीबी ने कहा कि किसी पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बिना उसके खिलाफ आदेश नहीं दिया जा सकता। एकतरफा फैसले के लिए अखबार में नोटिस प्रकाशित करना अंतिम उपाय है। इससे पहले सामान्य तरीके से नोटिस देने और घर पर चस्पा करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 12 अक्टूबर को फैमिली कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

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फैमिली कोर्ट में पेश किया था तलाक का केस
दरअसल, सूरजपुर निवासी महिला के पति ने 9 जनवरी 2024 को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का केस फैमिली कोर्ट में पेश किया था। फैमिली कोर्ट ने पत्नी के दिए पते पर पंजीकृत डाक से नोटिस भेजा, लेकिन नोटिस सही पता नहीं होने के कारण वापस आ गया। इसके बाद पति ने अखबार में नोटिस प्रकाशित कराने की मांग की, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। 29 फरवरी 2024 को स्थानीय अखबार में नोटिस प्रकाशित हुआ।

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रिकॉर्ड में नहीं दिखे प्रयास
हाईकोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 के नियम 17 और 20 का हवाला देते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट ने केवल एक बार नोटिस वापस आने के बाद सीधे अखबार में प्रकाशन का आदेश दे दिया। रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रयास नहीं दिखा कि पत्नी के घर पर नोटिस चस्पा कराया गया हो। फैमिली कोर्ट ने यह मान लिया कि पत्नी जानबूझकर नोटिस से बच रही है, जबकि रिकॉर्ड में ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था। प्रक्रिया पूरी किए बगैर अखबार में नोटिस प्रकाशित कर दिया गया, जबकि यह अंतिम उपाय था।
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पत्नी का क्या कहना था?
पत्नी का कहना था कि उसे तलाक की कार्यवाही की जानकारी नहीं थी। उसे 18 नवंबर 2024 को औरंगाबाद में चल रहे भरण-पोषण के मामले की काउंसलिंग के दौरान तलाक की डिक्री की कॉपी दिखाई गई। इसके बाद उसने प्रमाणित प्रति हासिल की और 2 दिसंबर 2024 को एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने की अर्जी दायर की।

बता दें कि, पत्नी के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर 25 अप्रैल 2024 को तलाक की डिक्री पारित हो गई। हाईकोर्ट ने पत्नी की देरी माफ करने की अर्जी मंजूर करते हुए फैमिली कोर्ट का 23 जून 2025 का आदेश रद्द कर दिया। अब एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने की पत्नी की अर्जी पर फैमिली कोर्ट नए सिरे से फैसला करेगा।

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