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सरकारी आंकड़े: कमजोर मानसून से रबी फसलों की बुवाई में गिरावट, गेहूं सबसे प्रभावित

Tue, 27 Oct 2026 10:19 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 27 Oct 2026 10:19 AM IST
सार

कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण रबी फसलों की बुवाई में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, गेहूं की बुवाई पिछले साल के मुकाबले काफी कम हुई है, जिससे उत्पादन लक्ष्य पर खतरा मंडरा रहा है।

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Weak Monsoon Impact: Rabi Crop Sowing Plunges, Wheat Most Affected
रबी फसल - फोटो : ANI

विस्तार
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कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण इस साल रबी फसलों की बुवाई में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्तूबर तक गेहूं की बुवाई पिछले साल के मुकाबले काफी कम हुई है। यह स्थिति आगामी फसल उत्पादन के लिए चिंताजनक संकेत दे रही है।

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गेहूं जो एक प्रमुख रबी फसल है, आमतौर पर अक्तूबर-नवंबर में बोया जाता है और मार्च-अप्रैल में काटा जाता है। इस साल अब तक केवल 11,000 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 27,000 हेक्टेयर था। 
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मंत्रालय ने 2026-27 फसल वर्ष के लिए 121 दस लाख टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष 120.7 दस लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून में 13 फीसदी की कमी रही। कमजोर मानसून से मिट्टी में नमी कम हो जाती है। साथ ही, जलाशयों और नहरों में पानी का स्तर भी घट जाता है।

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क्यों घट रही है बुवाई?

गेहूं की बुवाई के बाद कई बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। खराब बारिश से बुवाई में देरी हो सकती है। इससे बुवाई का क्षेत्र कम हो सकता है और उपज को खतरा हो सकता है। पंजाब और राजस्थान विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। इन राज्यों में बारिश की कमी क्रमशः 38 फीसदी और 22 फीसदी रही है। सितंबर के अंत तक जलाशयों में पानी का भंडारण भी सामान्य से कम रहा।

किन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर?

पंजाब और राजस्थान भारत के कुल गेहूं क्षेत्र का लगभग 31 फीसदी हिस्सा हैं। इन राज्यों में सिंचाई की कमी राष्ट्रीय बुवाई को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बुंदेलखंड और मध्य भारत के कुछ हिस्से भी संवेदनशील हैं। ये क्षेत्र बारिश पर निर्भर हैं और कम सिंचित हैं। मानसून की नमी की कमी को नहर या भूजल सिंचाई से आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता। इससे इन इलाकों में फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।

अन्य रबी फसलों की क्या स्थिति है?

अन्य फसलों में, 23 अक्तूबर तक चावल का रकबा 1.02 लाख हेक्टेयर था। यह पिछले साल के 2.13 लाख हेक्टेयर से काफी कम है। दलहन का क्षेत्र 3.27 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 4.39 लाख हेक्टेयर था। तिलहन की बुवाई 13.38 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल के 21.34 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि, मोटे अनाज का क्षेत्र बढ़कर 23,000 हेक्टेयर हो गया, जो पिछले साल 13,000 हेक्टेयर था। कुल रबी फसलों की बुवाई 18.02 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 28.26 लाख हेक्टेयर थी।

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