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जीएसटी का नया दौर: कर का आधार बढ़ाने और नकद संग्रह पर जोर; 2027 से शुरू होगी बी2सी ई-इनवॉइसिंग

Mon, 12 Oct 2026 07:24 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 12 Oct 2026 07:24 PM IST
सार

जीएसटी अधिकारी अब कर आधार बढ़ाने, नकद कर संग्रह बढ़ाने और कर चोरी रोकने के लिए डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करेंगे। 1 अप्रैल, 2027 से बी2सी ई-इनवॉइसिंग भी स्वैच्छिक रूप से लागू होगी, जिससे कारोबारों को अनुपालन में मदद मिलेगी।

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New Era of GST: Focus on Widening tax Base, Boosting Cash Collection; B2C E-Invoicing Soon
जीएसटी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

जीएसटी लागू होने के नौ साल बाद केंद्र और राज्य के कर अधिकारियों को करदाता आधार बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। उनसे नकद कर संग्रह बढ़ाने को कहा गया है। साथ ही, कर चोरी रोकने के लिए खुफिया जानकारी व गहन डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करने का निर्देश मिला है। सूत्रों के अनुसार, जीएसटी दरें और प्रक्रियाएं अब लगभग स्थिर हो चुकी हैं। अधिकारियों को कारोबारों के लिए एक सहूलियत भरा नजरिया अपनाने को कहा गया है।

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बी2सी लेनदेन के लिए ई-इनवॉइसिंग 1 अप्रैल, 2027 से लागू होगी। जीएसटी नेटवर्क राज्यों को इसके लिए सहायता प्रणाली प्रदान करेगा। जीएसटी अधिकारी कारोबारों को कर विभाग के पास विस्तृत डेटा होने के ऑडिट लाभ बताएंगे। कुछ प्रक्रिया सुधार, जैसे नोटिस भेजने के लिए 10,000 रुपये की सीमा, 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में अनुमोदित हुए हैं। इन सुधारों के लिए केवल नियमों में बदलाव की आवश्यकता है। इन्हें जल्द लागू किया जा सकता है। पिछले साल के जीएसटी दर युक्तिकरण के आर्थिक लाभ दिखने लगे हैं। अधिकारी अब "अनिवार्य अनुपालन" के बजाय सुविधापूर्ण दृष्टिकोण अपनाएंगे। वर्तमान में, जीएसटी के तहत लगभग 1.68 करोड़ करदाता पंजीकृत हैं।

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कर आधार बढ़ाने पर क्यों जोर दिया जा रहा है?

सूत्रों ने बताया कि जीएसटी में पंजीकृत करदाताओं की संख्या अच्छी है। फिर भी, कर आधार को व्यापक बनाने की गुंजाइश है। राज्यों से कर आधार बढ़ाने को कहा गया है। राज्य कर अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नकद कर संग्रह बढ़े। कारोबारों की आउटपुट कर देनदारी उनके इनपुट कर क्रेडिट दावों के बराबर नहीं होनी चाहिए। एक सूत्र ने आयकर विभाग के 'नज' अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रणाली को मजबूत करना होगा। गैर-घुसपैठी दृष्टिकोण अपनाना होगा और डेटा एनालिटिक्स में सुधार करना होगा।

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बी2सी ई-इनवॉइसिंग कैसे काम करेगा?

बी2सी ई-इनवॉइसिंग आपूर्ति शृंखला में अंतिम मील तक डेटा सुनिश्चित करेगा। यह आपूर्तिकर्ताओं से अंतिम खरीदार तक की जानकारी प्रदान करेगा। वर्तमान में, 5 करोड़ रुपये के औसत वार्षिक टर्नओवर वाले कारोबारों को बी2बी बिक्री के लिए अनिवार्य रूप से ई-इनवॉइस बनाना होता है। जीएसटी परिषद ने सितंबर 2024 में बी2सी ई-इनवॉइसिंग के लिए एक पायलट शुरू करने की सिफारिश की थी। बी2सी ई-इनवॉइसिंग 1 अप्रैल, 2027 से स्वैच्छिक आधार पर लागू की जाएगी। राज्यों को बी2सी ई-इनवॉइसिंग के लिए जीएसटीएन प्रणाली का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कारोबारों को बी2सी ई-इनवॉइसिंग से क्या लाभ होगा?

सूत्रों के अनुसार, कारोबारों को बी2सी ई-इनवॉइसिंग के लाभ बताए जाएंगे। उन्हें ऑडिट अनुपालन पर इसके प्रभाव के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। बी2बी और बी2सी ई-इनवॉइस से कर अधिकारियों को विस्तृत डेटा मिलेगा। इससे उन्हें कर प्रशासन में बेहतर तरीके से व्यवहार किया जाएगा। वर्तमान में, बी2सी बिक्री के दुरुपयोग के कई मामले सामने आते हैं। इनमें आपूर्तिकर्ता इनपुट कर क्रेडिट लाभ का दावा करने के लिए बिक्री को गलत तरीके से दिखाते हैं। खुफिया जानकारी और एनालिटिक्स को निवारक के रूप में कार्य करने की आवश्यकता है।

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