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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   JLR to Cut 4,000 UK Jobs: Inside Tata-Owned Carmaker's £1.7 Billion Savings Drive and Global Headwinds

टाटा के जेएलआर में छंटनी की खबर: ब्रिटेन में जाएंगी 4,000 नौकरियां; क्या ट्रंप का टैरिफ और घटती बिक्री कारण?

Sat, 05 Sep 2026 06:15 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 05 Sep 2026 06:15 PM IST
सार

टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) ब्रिटेन में 4,000 नौकरियां घटाने की योजना बना रही है। जानिए 1.7 अरब पाउंड की बचत के इस बड़े फैसले के पीछे अमेरिकी टैरिफ, घटती बिक्री और वैश्विक ऑटो संकट की पूरी कहानी। आगे की स्थिति जानने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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JLR to Cut 4,000 UK Jobs: Inside Tata-Owned Carmaker's £1.7 Billion Savings Drive and Global Headwinds
जेएलआर में छंटनी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वैश्विक ऑटो सेक्टर में मंदी के बीच, टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली लक्जरी कार निर्माता कंपनी जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) ने एक बड़ा फैसला लिया है। ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ब्रिटेन में अगले दो साल में करीब 4,000 नौकरियों की कटौती करने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार जेएलआर का यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए आयात शुल्कों (टैरिफ), घटती बिक्री और बढ़ती उत्पादन लागत का नतीजा है। 

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क्या है जेएलआर के अचानक इतनी बड़ी छंटनी करने की मुख्य वजह?

ब्रिटिश मीडिया के अनुसार, जेएलआर पर इस समय लागत कम करने का भारी दबाव है। दरअसल, जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है:

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  • राजस्व में गिरावट: तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व करीब 10% घट गया।
  • मुनाफे में भारी कमी: कंपनी का कर-पूर्व लाभ दो-तिहाई से अधिक गिरकर केवल 10.9 करोड़ पाउंड रह गया।
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  • बढ़ती लागत: जेएलआर इस समय उत्पादन लागत और वैश्विक मंदी के दबाव से जूझ रही है।

इसी वित्तीय संकट से निपटने के लिए कंपनी ने अगले दो वर्षों में1.7 अरब पाउंड की बचत करने और अपने ब्रेक-इवन प्वाइंट (नुकसान रहित स्तर) को घटाकर 3 लाख वाहनों पर लाने का लक्ष्य रखा है। इसी के तहत अधिकारियों और प्रबंधन वर्ग (मैनेजमेंट) के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वॉलंटरी रिडंडेंसी) कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।

क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां जेएलआर के लिए नई आफत बन गई हैं?

हां, इस संकट का एक बड़ा कारण अमेरिका की नई व्यापार नीतियां हैं। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ब्रिटेन से आयात की जाने वाली कारों पर 10% का टैरिफ लगाने के फैसले ने जेएलआर की वित्तीय स्थिति बिगाड़ दी है।

  • सबसे बड़ा बाजार: जेएलआर के लिए उत्तरी अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है, जहां कंपनी की कुल बिक्री का 29% हिस्सा आता है।
  • दोहरा संकट: अमेरिकी शुल्कों के अलावा, पिछले साल हुए एक बड़े साइबर हमले ने भी कंपनी के वैश्विक परिचालन को कई महीनों तक बाधित किया था।

इस छंटनी का ब्रिटेन के रोजगार और टाटा मोटर्स पर क्या असर पड़ेगा?

ब्रिटेन में इस छंटनी के बड़े सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देखने को मिलेंगे:

  • रोजगार पर असर: जेएलआर ब्रिटेन के वेस्ट मिडलैंड्स और हैलवुड में कुल 34,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देती है। इसके अलावा, यह अपनी ब्रिटिश सप्लाई चेन के जरिए करीब 1,20,000 नौकरियों को भी अप्रत्यक्ष सहारा देती है। इतनी बड़ी छंटनी से हजारों परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
  • टाटा मोटर्स का दबाव: जेएलआर के सीईओ पीबी बालाजी पर टाटा मोटर्स की तरफ से लागत कम करने का कड़ा दबाव है। बालाजी, जो पहले टाटा मोटर्स के सीएफओ थे, को पिछले साल ही कंपनी में वित्तीय अनुशासन लाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

क्या यह संकट केवल टाटा की जेएलआर तक ही सीमित है?

नहीं, यह मंदी पूरे यूरोपीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को प्रभावित कर रही है।

  • वोक्सवैगन का उदाहरण: हाल ही में जर्मनी की वोक्सवैगन ने अपने 90 साल के इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसके तहत 50,000 अतिरिक्त नौकरियों की कटौती की जाएगी।
  • यूरोपीय संकट: यूरोपीय कार निर्माता कमजोर मांग, ऊंचे उत्पादन खर्च और चीन के सस्ते इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा से परेशान हैं।

वैश्विक ऑटो बाजार इस समय चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। इस हालात में जेएलआर अपनी दक्षता बढ़ाने और 1.7 अरब पाउंड बचाने की कोशिश में है, वहीं यह देखना होगा कि पीबी बालाजी का छंटनी से जुड़ा वित्तीय अनुशासन टाटा की इस महत्वपूर्ण इकाई को संकट से बाहर ला पाता है या नहीं।

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