द बोनस मार्केट अपडेट: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक गिरा, निफ्टी 22300 से नीचे, कितना नुकसान?
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1000 से अधिक अंक और निफ्टी 1.6 फीसदी से ज्यादा टूटा। आरबीआई की सख्त नीति, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपये ने बाजार पर दबाव डाला, जिससे निवेशकों को 11.37 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,045.46 अंक टूटकर 71,593.24 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 371.25 अंक गिरकर 22,231.80 पर आ गया। इस एक दिन की बिकवाली से निवेशकों को करीब 11.37 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इससे पहले सेंसेक्स 72,668.00 पर खुला और दिन के निचले स्तर 71,327.75 तक गया। निफ्टी 50 ने 22,599.05 पर कारोबार शुरू किया और 22,179.90 के निचले स्तर पर पहुंचा। बाजार पूंजीकरण 4,72,35,273.39 करोड़ रुपये से घटकर 4,60,97,838.63 करोड़ रुपये रह गया। भारतीय रिजर्व बैंक की सख्त नीतिगत रुख, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया। रुपये में कमजोरी और सभी क्षेत्रों में व्यापक बिकवाली भी गिरावट का कारण बनी।
बाजार क्यों गिरा और आरबीआई की नीति का क्या असर हुआ?
आरबीआई ने रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया था। उसने अपनी नीतिगत रुख को "तटस्थ" से "कैलिब्रेटेड सख्ती" में बदल दिया। इस बदलाव से आगे ब्याज दर में वृद्धि की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इससे इक्विटी मूल्यांकन और दर-संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव पड़ा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि आरबीआई की सख्त नीति से निकट अवधि के मूल्यांकन फिर से तय हो रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने क्या किया?
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया। ब्रेंट क्रूड 4.25 फीसदी बढ़कर 104.46 डॉलर प्रति बैरल हो गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.15 फीसदी बढ़कर 91.94 डॉलर पर पहुंच गया। भारत के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें नकारात्मक हैं क्योंकि यह महंगाई बढ़ा सकती हैं और आयात बिल पर दबाव डाल सकती हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से लगातार पैसा निकाला। बुधवार को उन्होंने 6,121.37 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
रुपये की कमजोरी और अन्य क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ा?
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.78 पर लगभग सपाट बंद हुआ। यह मई में अपने सर्वकालिक निचले स्तर 96.96 के करीब रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी फंडों की निकासी और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल से रुपये पर दबाव बना हुआ है। धातु, रियल्टी, स्वास्थ्य सेवा, ऑटो और तेल एवं गैस जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारी गिरावट देखी गई। निफ्टी आईटी सूचकांक में केवल 0.08 फीसदी की मामूली गिरावट आई। यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट दर ढांचे पर रिपोर्टों से डिजिटल भुगतान स्टॉक भी दबाव में रहे।
शेयर बाजार में इस भारी गिरावट के प्रमुख कारण क्या हैं?
बाजार से जुड़े विश्लेषकों के अनुसार, इस भारी बिकवाली के पीछे निम्नलिखित कारक जिम्मेदार हैं:
- आरबीआई की सख्त मौद्रिक नीति: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लगभग चार वर्षों में पहली बार ब्याज दर में वृद्धि की घोषणा की है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि दर वृद्धि से ज्यादा आरबीआई द्वारा अपने रुख को 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' करना बाजार के लिए बड़ा सरप्राइज रहा, जिसका सीधा मतलब है कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है।
- 24 साल के उच्च स्तर पर बॉन्ड यील्ड: वैश्विक बॉन्ड बाजार में जारी बिकवाली के कारण अमेरिका की 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.71% के पार पहुंच गई है, जबकि 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.3% और 2-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई है। उच्च बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशक इक्विटी से पैसा निकालकर डेट मार्केट की ओर रुख कर रहे हैं।
- कच्चे तेल की कीमतों में उबाल (102 डॉलर प्रति बैरल के पार): मध्य पूर्व के खाड़ी क्षेत्रों और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर बढ़ते हमलों से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल 2% उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। अमेरिका में कच्चा तेल भंडार भी 3.2 मिलियन बैरल घटकर 424.1 मिलियन बैरल रह गया है।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की रिकॉर्ड बिकवाली: विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। केवल बुधवार को एफआईआई ने 6,121 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे, जबकि बीते 9 कारोबारी सत्रों में वे कुल 57,000 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं।
- फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की चिंताएं: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मिनट्स से संकेत मिला है कि महंगाई दर को काबू में रखने के लिए दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, बाजार दिसंबर में 80% दर वृद्धि की संभावना मानकर चल रहा है।
- कमजोर वैश्विक संकेत: एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% से अधिक, जबकि जापान का निकेई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग 1% से अधिक टूटे। अमेरिकी और यूरोपीय बाजार भी बीते सत्र में गहरे लाल निशान में बंद हुए थे।
- तकनीकी स्तरों का टूटना: निफ्टी द्वारा अपने 22,500 के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़ने के बाद तकनीकी बिकवाली और तेज हो गई। एक्सिस डायरेक्ट के वरिष्ठ विश्लेषक हिमांग गोर के अनुसार, 22,500 का स्तर टूटने से सूचकांक के 22,300 और 52-सप्ताह के निचले स्तर 22,180 तक फिसलने का जोखिम बन गया।