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म्यूचुअल फंड में 38306 करोड़ रुपये का निवेश: एसआईपी भी रिकॉर्ड स्तर पर; किस फंड पर टूटा भरोसा?
Tue, 13 Oct 2026 05:10 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 13 Oct 2026 05:10 AM IST
सार
शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 30.6% बढ़ा, स्मॉलकैप फंड्स में रिकॉर्ड पैसा आया।
एसआईपी निवेश भी ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा, तो डेट फंड्स से आखिर क्यों निकले 1.83 लाख करोड़ रुपये? पढ़िए इस रिपोर्ट ेमें।
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निवेश
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू खुदरा निवेशकों का म्यूचुअल फंड्स पर भरोसा कायम है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में शेयरों से जुड़ी म्यूचुअल फंड योजनाओं (इक्विटी फंड) में शुद्ध निवेश 30.6% बढ़कर 38,306 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। अगस्त में यह 29,329 करोड़ था।
इस अभूतपूर्व तेजी का नेतृत्व स्मॉल-कैप फंड्स ने किया, जिन्होंने अपने इतिहास का सबसे बड़ा मासिक प्रवाह दर्ज किया। इसके साथ ही सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये आने वाला मासिक निवेश भी 32,490 करोड़ रुपये के नए सार्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। सितंबर में इक्विटी फंड में निवेश अप्रैल के बाद सबसे ज्यादा रहा। अप्रैल में इन योजनाओं में 38,440 करोड़ रुपये आए थे। बाजार में गिरावट के बावजूद फंड हाउसों की कुल प्रबंधन परिसंपत्तियां सितंबर के अंत में 82.64 लाख करोड़ दर्ज की गईं।
स्मॉल और मिडकैप का दबदबा फ्लेक्सी-कैप में 32% की छलांग
निवेशकों ने सबसे ज्यादा 9,039 करोड़ रुपये स्मॉल-कैप फंड में लगाए। अगस्त में यह राशि 7,973 करोड़ रुपये थी। वहीं, मिड-कैप फंड में 7,835 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ, जो अगस्त के 6,989 करोड़ रुपये से अधिक है। इन दोनों श्रेणियों से इक्विटी फंड में आए कुल निवेश का करीब 44% हिस्सा मिला। फ्लेक्सी-कैप में शुद्ध निवेश 32.5% बढ़कर 6,702 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो अगस्त में 5,059 करोड़ था। ये फंड छोटी, मध्यम और बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। बड़ी कंपनियों में निवेश पैसा लगाने वाले लार्ज-कैप फंड में तीन महीने बाद फिर शुद्ध निवेश आया।
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ये भी पढ़ें: युद्ध की आग में झुलसी खेती: 25.5 करोड़ लोगों के भोजन जितनी जमीन घटी; कितने लोगों की मंडराया खाद्य संकट?
इनमें 859 करोड़ रुपये लगाए गए। गोल्ड ईटीएफ निवेश में 71.4% की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह 4,451 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। ग्रो म्यूचुअल फंड के वरुण गुप्ता के मुताबिक, मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड में निवेशकों की दिलचस्पी बताती है कि निकट अवधि के उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबी अवधि में बढ़त की उम्मीद कायम है।
कहां से निकले पैसे
कहां हुआ ज्यादा निवेश
स्रोत : एम्फी, आंकड़ें करोड़ रुपये में
डेट फंड से 1.83 लाख करोड़ निकले
एक ओर जहां इक्विटी फंड में निवेश बढ़ा, वहीं कर्ज और छोटी अवधि के वित्तीय साधनों में पैसा लगाने वाली डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं से सितंबर में 1.83 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। अगस्त में इनसे 8,127 करोड़ रुपये निकाले गए थे। कुल निकासी में लिक्विड फंड सबसे आगे रहे।
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इस अभूतपूर्व तेजी का नेतृत्व स्मॉल-कैप फंड्स ने किया, जिन्होंने अपने इतिहास का सबसे बड़ा मासिक प्रवाह दर्ज किया। इसके साथ ही सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये आने वाला मासिक निवेश भी 32,490 करोड़ रुपये के नए सार्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। सितंबर में इक्विटी फंड में निवेश अप्रैल के बाद सबसे ज्यादा रहा। अप्रैल में इन योजनाओं में 38,440 करोड़ रुपये आए थे। बाजार में गिरावट के बावजूद फंड हाउसों की कुल प्रबंधन परिसंपत्तियां सितंबर के अंत में 82.64 लाख करोड़ दर्ज की गईं।
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स्मॉल और मिडकैप का दबदबा फ्लेक्सी-कैप में 32% की छलांग
निवेशकों ने सबसे ज्यादा 9,039 करोड़ रुपये स्मॉल-कैप फंड में लगाए। अगस्त में यह राशि 7,973 करोड़ रुपये थी। वहीं, मिड-कैप फंड में 7,835 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ, जो अगस्त के 6,989 करोड़ रुपये से अधिक है। इन दोनों श्रेणियों से इक्विटी फंड में आए कुल निवेश का करीब 44% हिस्सा मिला। फ्लेक्सी-कैप में शुद्ध निवेश 32.5% बढ़कर 6,702 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो अगस्त में 5,059 करोड़ था। ये फंड छोटी, मध्यम और बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। बड़ी कंपनियों में निवेश पैसा लगाने वाले लार्ज-कैप फंड में तीन महीने बाद फिर शुद्ध निवेश आया।
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ये भी पढ़ें: युद्ध की आग में झुलसी खेती: 25.5 करोड़ लोगों के भोजन जितनी जमीन घटी; कितने लोगों की मंडराया खाद्य संकट?
इनमें 859 करोड़ रुपये लगाए गए। गोल्ड ईटीएफ निवेश में 71.4% की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह 4,451 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। ग्रो म्यूचुअल फंड के वरुण गुप्ता के मुताबिक, मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड में निवेशकों की दिलचस्पी बताती है कि निकट अवधि के उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबी अवधि में बढ़त की उम्मीद कायम है।
कहां से निकले पैसे
|
फंड का नाम |
निकासी |
|---|---|
|
लिक्विड फंड |
95,743.20 |
|
मनी मार्केट फंड |
50,846.21 |
|
अल्ट्रा शॉर्ट फंड |
11,728.87 |
|
ओवरनाइट फंड |
7,281.20 |
|
कॉरपोरेट बॉन्ड फंड |
4,652.24 |
|
बैंकिंग एंड पीएसयू डेट फंड |
2,411.55 |
कहां हुआ ज्यादा निवेश
|
फंड का नाम |
निवेश |
|---|---|
|
स्मॉलकैप फंड |
9,038.57 |
|
मिडकैप फंड |
7,834.84 |
|
फ्लेक्सीकैप फंड |
6,701.80 |
|
मल्टीकैप फंड |
3,859.55 |
|
सेक्टोरल फंड |
1,840.02 |
|
थीमैटिक फंड |
1,800.07 |
|
लार्जकैप फंड |
859.47 |
डेट फंड से 1.83 लाख करोड़ निकले
एक ओर जहां इक्विटी फंड में निवेश बढ़ा, वहीं कर्ज और छोटी अवधि के वित्तीय साधनों में पैसा लगाने वाली डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं से सितंबर में 1.83 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। अगस्त में इनसे 8,127 करोड़ रुपये निकाले गए थे। कुल निकासी में लिक्विड फंड सबसे आगे रहे।