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बाइक का बीमा लेते समय न करें ये गलतियां: पॉलिसी लेने से पहले जांचें 5 बातें, वरना क्लेम में फंस सकता है पैसा

Mon, 26 Oct 2026 08:00 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Mon, 26 Oct 2026 08:00 AM IST
सार

  • सस्ता बीमा हर बार बेहतर नहीं।
  • थर्ड-पार्टी बीमा कानूनन अनिवार्य है।
  • कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी बाइक का नुकसान भी कवर करती है।
  • जीरो डेप्रिसिएशन क्लेम में कटौती घटाता है।

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Buying Two-Wheeler Insurance? 5 Things Check Before You Pay
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

अगर आप रोजाना बाइक या स्कूटर से दफ्तर जाते हैं या शहर में सफर करते हैं, तो सही इंश्योरेंस चुनना जरूरी है। सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी खरीदना बाद में महंगा पड़ सकता है। दुर्घटना, चोरी या बाइक को बड़ा नुकसान होने पर आपकी जेब से काफी पैसा खर्च हो सकता है। ऐसे में बीमा लेते समय आईडीवी, जीरो डेप्रिसिएशन, इंजन प्रोटेक्शन और नो क्लेम बोनस जैसे फीचर्स को समझना जरूरी है। आइए जानते हैं कि कौन-सा टू-व्हीलर इंश्योरेंस आपके लिए सही हो सकता है और पॉलिसी खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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बाइक इंश्योरेंस के कितने प्रकार होते हैं?
रोजाना के सफर में बाइक और स्कूटर लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकती है, लेकिन सड़क पर दुर्घटना, वाहन चोरी और दूसरी तरह के नुकसान का जोखिम बना रहता है। सही इंश्योरेंस ऐसे समय में आर्थिक मदद दे सकता है। भारत में टू-व्हीलर इंश्योरेंस मुख्य रूप से तीन तरह का होता है।
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1. थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस
यह कानूनन अनिवार्य बीमा है। अगर आपकी बाइक से किसी दूसरे इंसान, वाहन या संपत्ति को नुकसान होता है, तो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार उसकी देनदारी कवर होती है। हालांकि, इससे आपकी अपनी बाइक को हुए नुकसान की भरपाई नहीं होती।
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2. ऑन-डैमेज (OD) कवर
यह कवर आपकी अपनी बाइक को हुए नुकसान के लिए होता है। इसमें पॉलिसी की शर्तों के अनुसार दुर्घटना, आग, प्राकृतिक आपदा या चोरी से होने वाले नुकसान को कवर किया जा सकता है। जिन लोगों के पास पहले से थर्ड-पार्टी बीमा है, वे अपनी बाइक की सुरक्षा के लिए अलग से ओडी कवर ले सकते हैं।

3. कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस
इस पॉलिसी में थर्ड-पार्टी देनदारी के साथ आपकी अपनी बाइक को हुए नुकसान का कवर भी शामिल होता है। इसलिए यह उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है, जो अपनी बाइक को ज्यादा सुरक्षा देना चाहते हैं। नई या महंगी बाइक के लिए इस तरह की पॉलिसी पर विचार किया जा सकता है।

बाइक का सही आईडीवी चुनना क्यों जरूरी है?
आईडीवी यानी इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू वह रकम है, जो बाइक चोरी होने या पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक बीमा कंपनी की ओर से अधिकतम भुगतान के आधार के रूप में इस्तेमाल होती है।

आईडीवी चुनते समय दो बातें ध्यान में रखें:

  • प्रीमियम घटाने के लिए आईडीवी बहुत कम न रखें: ऐसा करने पर बाइक चोरी होने या टोटल लॉस की स्थिति में मिलने वाली रकम कम हो सकती है।
  • बेवजह आईडीवी ज्यादा भी न रखें: इससे प्रीमियम बढ़ सकता है। बाइक की उम्र और बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर उचित आईडीवी चुनें।


ये एड-ऑन कवर भी आ सकते हैं काम
कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी के साथ कुछ अतिरिक्त कवर यानी एड-ऑन लिए जा सकते हैं। इनके लिए अलग प्रीमियम देना पड़ सकता है। अपनी बाइक और जरूरत के हिसाब से इन पर विचार करें।

जीरो डेप्रिसिएशन कवर
क्लेम के दौरान बाइक के प्लास्टिक, रबर और फाइबर जैसे पार्ट्स की घिसावट की वजह होने वाली कटौती को कम करने में यह कवर मदद करता है। इससे पात्र क्लेम में ज्यादा रकम मिल सकती है। नई बाइक के लिए यह खास तौर पर उपयोगी हो सकता है। इसका लाभ पॉलिसी की शर्तों और लागू सीमाओं पर निर्भर करता है।

रोडसाइड असिस्टेंस
रास्ते में बाइक खराब हो जाए, टायर पंचर हो जाए या पेट्रोल खत्म हो जाए, तो रोडसाइड असिस्टेंस के तहत मदद मिल सकती है। इससे सफर के दौरान अचानक परेशानी आने पर सहायता पाने में आसानी होती है।

इंजन प्रोटेक्शन
जलभराव या इंजन में पानी घुसने से होने वाले नुकसान की स्थिति में यह एड-ऑन उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किस तरह का नुकसान कवर होगा, यह पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करता है।

रिटर्न टू इनवॉइस
बाइक चोरी होने या पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में यह कवर मददगार हो सकता है। इसकी शर्तों के मुताबिक भुगतान बाइक की मूल इनवॉइस कीमत के आधार पर किया जा सकता है। यह जरूरी नहीं कि हर स्थिति में सभी ऑन-रोड खर्चों की पूरी रकम मिले, इसलिए कवर की सीमा पहले समझ लें।

क्लेम सेटलमेंट और कैशलेस गैरेज की जांच करें
इंश्योरेंस कंपनी चुनते समय सिर्फ प्रीमियम की तुलना करना काफी नहीं है। कंपनी की क्लेम प्रक्रिया और मरम्मत की सुविधा भी देखनी चाहिए।

  • क्लेम सेटलमेंट रेशियो: यह देखें कि कंपनी के क्लेम सेटलमेंट का रिकॉर्ड कैसा है। 95 फीसदी से ज्यादा का अनुपात एक उपयोगी संकेत हो सकता है, लेकिन केवल इसी आंकड़े के आधार पर फैसला न लें। यह भी समझें कि आंकड़ा किस अवधि और किस तरह के क्लेम से संबंधित है।
  • कैशलेस गैरेज: जांचें कि कंपनी के नेटवर्क में आपके घर या दफ्तर के पास गैरेज हैं या नहीं। कैशलेस सुविधा मिलने पर पात्र मरम्मत का भुगतान बीमा कंपनी सीधे नेटवर्क गैरेज को कर सकती है। इससे आपको पूरा बिल पहले अपनी जेब से देने की जरूरत नहीं पड़ सकती।


नो क्लेम बोनस से प्रीमियम में बचत

  • अगर पॉलिसी की अवधि के दौरान आपने कोई क्लेम नहीं लिया है, तो रिन्यूअल के समय नो क्लेम बोनस (NCB) मिल सकता है। इससे अपने नुकसान वाले कवर के प्रीमियम पर छूट मिलती है। यह छूट आम तौर पर 20 फीसदी से शुरू होकर लगातार क्लेम-मुक्त वर्षों में 50 फीसदी तक पहुंच सकती है, जो लागू नियमों और पात्रता पर निर्भर करती है।
  • बाइक बेचने पर भी पात्रता और बीमा कंपनी की प्रक्रिया के अनुसार एनसीबी को नई बाइक की पॉलिसी में ट्रांसफर कराया जा सकता है। इसलिए पॉलिसी रिन्यू कराते समय अपने एनसीबी की जांच जरूर करें।


ऑनलाइन तुलना करें, फिर खरीदें पॉलिसी

  • बीमा एजेंट के बताए प्लान को बिना जांचे खरीदने के बजाय अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसियों की तुलना करें। प्रीमियम के साथ कवर, एड-ऑन, डिडक्टिबल्स यानी क्लेम के समय आपके हिस्से की रकम और कैशलेस गैरेज की उपलब्धता भी देखें।
  • पॉलिसी के एक्सक्लूजन यानी किन परिस्थितियों में बीमा नहीं मिलेगा, उन्हें ध्यान से पढ़ना भी जरूरी है। इससे क्लेम के समय गलतफहमी और परेशानी से बचा जा सकता है।

बाइक इंश्योरेंस लेते समय किन बातों का रखें ध्यान

  • सही टू-व्हीलर इंश्योरेंस चुनने के लिए सिर्फ सस्ता प्रीमियम न देखें। पहले तय करें कि आपको थर्ड-पार्टी, ओडी या कॉम्प्रिहेंसिव कवर में से किसकी जरूरत है। इसके बाद आईडीवी, जरूरी एड-ऑन, कंपनी का क्लेम रिकॉर्ड, कैशलेस गैरेज और एनसीबी जैसे पहलुओं की तुलना करें। पॉलिसी की शर्तें समझकर लिया गया फैसला दुर्घटना, चोरी या बड़े नुकसान की स्थिति में आपकी आर्थिक सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
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