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जबलपुर: हनुमानताल में मूर्तिकार की गोली मारकर हत्या, गणेश प्रतिमा बनाते समय दो युवकों ने किया हमला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Updated Sat, 05 Sep 2026 05:50 PM IST

हनुमानताल थाना क्षेत्र में देर रात आपसी रंजिश के चलते दो युवकों ने गोली मारकर मूर्तिकार की हत्या कर दी। मूर्तिकार आगामी गणेश महोत्सव के लिए प्रतिमा तैयार कर रहा था। इसी दौरान आरोपी पंडाल में पहुंचे और उस पर फायरिंग कर दी। गोली गर्दन में लगने से उसकी मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस को आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आयुष जाखड़ के अनुसार हनुमानताल क्षेत्र स्थित मथुरा सेठ की बाड़ी निवासी मनोज उर्फ बाबा सोनकर (50) मूर्तिकारी का काम करता था। बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात करीब 11:30 बजे वह दुकान के सामने बने पंडाल में अपनी पत्नी विमला सोनकर और बेटे अनुराग सोनकर के साथ आगामी गणेश महोत्सव के लिए भगवान गणेश की मूर्ति बना रहा था। इसी दौरान रोहित मराठा और चिंटू उर्फ भरत यादव एक वाहन से वहां पहुंचे। दोनों ने आपसी रंजिश के चलते मनोज उर्फ बाबा सोनकर पर फायरिंग कर दी। मनोज ने बचने का प्रयास किया, लेकिन एक गोली उसकी गर्दन में जा लगी। वारदात के बाद दोनों आरोपी वाहन से फरार हो गए।

पढे़ं: उज्जैन में हनुमान जी की प्रतिमा पर बड़ा संकट?: हटाने से पहले प्रशासन से मांगी लिखित गारंटी, किसने बढ़ाई चिंता परिजन घायल मनोज को तत्काल ऑटो से मेट्रो अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। यहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश और तनाव का माहौल बन गया। सुरक्षा की दृष्टि से इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पीड़ित पक्ष घटना के विरोध में चक्काजाम की तैयारी कर रहा था। साथ ही जेल में निरुद्ध मृतक के बेटों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की जा रही थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों को समझाइश दी और जेल में निरुद्ध बेटों को अंतिम संस्कार में शामिल कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रशासन के प्रयासों से दोनों बेटों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिल गई। अनुमति मिलने के बाद पीड़ित पक्ष ने मृतक का अंतिम संस्कार किया।

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