रक्षाबंधन यानी रखड़ी के पावन पर्व के साथ ही उपमंडल अंब के कड़प स्थित प्राचीन गुग्गा मंदिर में बाबा गुग्गा जाहरवीर के धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हो गया है। शुक्रवार से शुरू हुआ बाबा के गुणगान और गाथा वाचन का सिलसिला जन्माष्टमी तक चलेगा। इस दौरान मंडलियां क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पहुंचकर घर-घर बाबा की गाथा का गुणगान करेंगी। डमरू की थाप और पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच मंडली के सदस्य बाबा गुग्गा जाहरवीर के जन्म से लेकर उनके जीवन से जुड़े धार्मिक प्रसंगों और कथाओं का श्रद्धापूर्वक वाचन करेंगे। मंडलियों के गांवों में पहुंचने से क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। रक्षाबंधन से शुरू होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों का विधिवत समापन 5 सितंबर को बाबा गुग्गा जाहरवीर जी को रोट चढ़ाने के साथ होगा। स्थानीय लोगों के अनुसार पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जा रही है। बाबा का गुणगान करने वाली मंडली में शत उठाने वाले व्यक्ति को चेला कहा जाता है। कठिन नियमों और वर्षों पुरानी परंपराओं के बीच बाबा गुग्गा जाहरवीर का यह गुणगान क्षेत्र की धार्मिक श्रद्धा, लोकविश्वास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक पेश करता है।