हमीरपुर। स्कूलों में मध्याह्न भोजन उधारी की आंच पर पक रहा है। बच्चों की थाली में खाना रोज पहुंच रहा है लेकिन इसकी कीमत नहीं दी जा रही। विद्यालयों में मई से कन्वर्जन कॉस्ट का भुगतान अटका है। तीन महीने में देनदारी तीन करोड़ आठ लाख रुपये से अधिक पहुंच चुकी है और चौथा महीना शुरू चुका है।
मौसमी फल का भुगतान भी नहीं किया गया है। ऐसे में प्रधानाध्यापक दुकानदारों से उधार लेकर किसी तरह बच्चों का पेट भरने में जुटे हैं। जिले के 1029 परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक 55,136 और कक्षा छह से आठ तक 34,354 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बच्चों को रोज भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापकों की है।
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भोजन बनाने के लिए कन्वर्जन कॉस्ट का भुगतान शासन स्तर से किया जाता है लेकिन भुगतान अटकने से प्रधानाध्यापकों को दुकानदारों और रसोइयों के बीच सामंजस्य बैठाना पड़ रहा है।
अफसरों के तेवरों को देखकर कुछ बोल भी नहीं पा रहे हैं। हालांकि दबी जुबां से कह रहे हैं कि नौकरी करनी है तो व्यवस्था करना मजबूरी है। प्राथमिक स्तर पर कन्वर्जन कॉस्ट छह रुपए 78 पैसे है और जूनियर स्तर पर प्रति बच्चा 10 रुपये 17 पैसे है। फल का चार रुपये प्रति छात्र अलग से दिया जाता है। (संवाद)