पंजाब के खरड़ में स्थित ऐतिहासिक महाराजा अज्ज सरोवर की कायाकल्प और पुनर्विकास के लिए केंद्र सरकार ने 93.94 करोड़ रुपये की परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके तट पर अयोध्या की तर्ज पर श्रीराम मंदिर भी बनाया जाएगा। महाराजा अज्ज भगवान श्री राम जी के पितामह थे और यह सरोवर उन्हीं के नाम से हैं जोकि करीब 154 साल पुराना है।
पंजाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्र सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला पंजाब की धार्मिक, ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। केंद्र के पर्यटन मंत्रालय ने यह परियोजना स्वदेश दर्शन योजना के तहत मंजूर की है। करीब 133 कनाल में फैला महाराजा अज्ज सरोवर चंडीगढ़-खरड़ राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित है।
पंजाब पर्यटन विभाग परियोजना को लागू करेगा। केंद्र की औपचारिक मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और इसके बाद धनराशि जारी की जाएगी। सरोवर को विकसित कर विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में तैयार करने से क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सरोवर के किनारे बने श्रीराम मंदिर को भी परियोजना से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ढिल्लों ने बताया कि करीब चार दशक से सरोवर के संरक्षण और विकास के प्रयास चल रहे थे। केंद्र की यह पहल उस दिशा में बड़ी उपलब्धि है। इससे पंजाब की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के साथ पर्यटन को नई गति मिलेगी।
आस्था, इतिहास और विरासत का संगम है सरोवर
खरड़ स्थित महाराजा अज्ज सरोवर धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व रखने वाला स्थल है। स्थानीय परंपरा के अनुसार इसका संबंध महाराजा अज्ज से है, जिन्हें भगवान श्रीराम के दादा और राजा दशरथ के पिता के रूप में माना जाता है।
सरोवर के किनारे स्थित चिंता हरण मंदिर भी इस धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार ब्रिटिशकाल में भी इस स्थल को विशेष महत्व प्राप्त था। तत्कालीन प्रशासन ने 1891, 1896 और 1926 में इसके संरक्षण से जुड़े आदेश जारी किए थे। उस वक्त यह क्षेत्र जिला अंबाला के अंतर्गत था। सरोवर में शिकार पर रोक लगाने के लिए लगाया गया पुराना पत्थर आज भी इसके इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। उस दौर में यहां नौका चलाने और मछली पकड़ने पर भी प्रतिबंध था।
समय के साथ सरोवर अतिक्रमण, गंदगी और पानी की कमी जैसी समस्याओं से जूझता रहा। 1980 के दशक से स्थानीय स्तर पर इसके संरक्षण के प्रयास तेज हुए। अब केंद्र सरकार ने इसके विकास के लिए 93.94 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। प्रस्तावित योजना में सरोवर का कायाकल्प, घाट, आध्यात्मिक पार्क, वेलनेस सेंटर, ओपन एयर थिएटर, ऑडिटोरियम और अन्य पर्यटन सुविधाएं शामिल हैं। इस तरह अज्ज सरोवर रामायण परंपरा, स्थानीय आस्था, ब्रिटिशकालीन इतिहास और पुरातात्विक विरासत का संगम है।