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जिला उपभोक्ता आयोग का आदेश रद्द: पंजाब राज्य आयोग बोला- सरकारी दस्तावेज देने से इनकार गलत

Mon, 05 Oct 2026 09:52 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

राज्य आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि आवेदक की ओर से दी गई अर्जी में स्पष्ट रूप से भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76 का उल्लेख था।
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पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सरकारी आईटीआई गुरदासपुर से दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया है। आयोग ने आईटीआई के सहायक निदेशक एवं प्राचार्य को संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि आवेदक ने सूचना भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 76 के तहत मांगी थी, न कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत। यह फैसला आयोग की अध्यक्ष जस्टिस दया चौधरी, सदस्य सिमरजोत कौर व विश्वकांत गर्ग की बेंच ने दिया है।

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आयोग के समक्ष गुरदासपुर निवासी बलजिंदर सिंह ने अपील दायर की थी। उन्होंने सरकारी आईटीआई गुरदासपुर से निर्धारित शुल्क जमा कर कुछ दस्तावेजों और उनकी प्रमाणित प्रतियों की मांग की थी। जिला उपभोक्ता आयोग ने 20 सितंबर 2023 को शिकायत खारिज करते हुए कहा था कि मामला सूचना का अधिकार अधिनियम से संबंधित है और ऐसे मामले में उपभोक्ता आयोग का हस्तक्षेप नहीं बनता।

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राज्य आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि आवेदक की ओर से दी गई अर्जी में स्पष्ट रूप से भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76 का उल्लेख था। आयोग ने कहा कि इस धारा के तहत सार्वजनिक दस्तावेज की अभिरक्षा रखने वाला अधिकारी, निर्धारित कानूनी शुल्क लेने के बाद, उस दस्तावेज की प्रमाणित प्रति देने के लिए बाध्य है।

आदेश में आयोग ने कहा कि सरकारी आईटीआई गुरदासपुर सरकारी संस्था है और उसके पास आधिकारिक एवं प्रशासनिक कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज हैं। आवेदक ने निर्धारित शुल्क जमा किया था और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त शुल्क देने की इच्छा भी जताई थी। ऐसे में मांगी गई सूचना को केवल आंतरिक, गोपनीय या निजी बताते हुए प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध नहीं कराना उचित नहीं थी। आयोग ने इसे सेवा में कमी माना।

आयोग ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर मांगी गई सूचना की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही भविष्य में ऐसी किसी अर्जी पर सावधानीपूर्वक विचार कर उचित कार्रवाई करने को कहा गया है। हालांकि, प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर आयोग ने कहा कि इसके लिए संबंधित विभाग के प्रमुख या अनुशासनिक प्राधिकारी के समक्ष उचित कानूनी उपाय अपनाया जा सकता है।
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