ससुर विनीत मिनोचा की हत्या में साजिश रचने की आरोपी शालू की पुलिस कस्टडी रिमांड इस हत्याकांड की दिशा बदलता नजर आ रहा है। पीसीआर के 12 घंटे के दौरान करीब तीन बार शालू और सुब्रत का आमना-सामना कराया गया। करीब 18 दिन बाद जब शालू ने पति सुब्रत को अपने सामने देखा तो फूटकर रो पड़ी। बोली- तुम मुझे क्यों फंसाना चाहते हो...। कल तक शालू से सामना होने का इंतजार करने वाला सुब्रत उसके इस सवाल पर चुप्पी साधकर मुंह फेर बैठा गया। यहीं से पुलिस ने सुब्रत पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। एक के बाद एक करीब 20 से अधिक ऐसे सवाल सुब्रत से किए गए जिसके जवाब देने में उसकी जुबान लड़खड़ा गई।
बता दें कि पांच सितंबर की देर रात इंद्रानगर निवासी दवा कारोबारी की उन्हीं के फ्लैट में चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने हत्या की साजिश रचने के आरोप में शालू व हत्या के आरोप में उनके पुराने नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस के शक की सुई सुब्रत पर भी घूम रही थी।
सुब्रत की भूमिका स्पष्ट करने और फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बरामद करने के लिए बुधवार दोपहर 12:20 बजे तीनों आरोपियों को जेल से निकाला गया। विशाल और राजकिशोर को पुलिस की गाड़ी और शालू को प्राइवेट कार में बैठाकर पुलिस कल्याणपुर थाने पहुंची। यहां करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली पूछताछ के बाद दोनों सुपारी किलर को पुलिस लाइन लाया गया। शालू को एक अलग जगह पर ले जाकर वहां उसका सुब्रत से सामना कराया गया। शालू के सवाल का सुब्रत की ओर से कोई जवाब न मिलने पर उससे अलग से पूछताछ की गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार सुब्रत ने पुलिस के हर सवाल का जवाब सिर्फ यह कहते हुए दिया कि उसकी इस हत्या में कोई भूमिका नहीं है। पुलिस बेवजह उससे उलझाऊ सवाल क्यों कर रही है।
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विनीत मिनोचा हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के इन सवालों ने सुब्रत को उलझाया
- तुम पर 15 लाख रुपये का कर्ज कैसे हुआ?
- बिरहाना रोड स्थित ऑफिस में किस बात पर पिता से उसका झगड़ा हुआ था ?
- ऑफिस से दवाओं की चोरी में किसका नाम आया था ?
- सैकड़ों बार विशाल से बात करने के बाद भी उसे हत्या के बाद पहचाना क्यों नहीं ?
- गोवा और देहरादून की यात्रा के दौरान विनीत और शालू को लेकर क्या बातें हुई थी ?
- तुम्हें किस तरह यकीन है कि पिता की हत्या में पत्नी शालू का ही हाथ है ?
- विनीत-पुनीता और तुम्हारे व शालू के बीच संबंधों में किसी तरह की दरार है क्या ?
- डुप्लीकेट चाबी बनवाने के दौरान तुम साथ में थे, इसके साक्ष्य को क्यों नकार रहे हो ?
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दवा कारोबारी हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
हत्योरापी ने बरामद कराई डुप्लीकेट चाबी, गमछा व स्कार्फ
पूछताछ के दौरान हत्यारोपी विशाल भी बार-बार बयान बदलता रहा। सूत्रों के अनुसार कभी वह भइया सुब्रत तो कभी भाभी शालू का नाम हत्या कराने के लिए लेता रहा। उसकी निशानदेही पर रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के पास स्थित प्लाॅट से डुप्लीकेट चाबी बरामद की गई। वहीं, राजकिशोर ने सेंट्रल स्टेशन के पास से स्कार्फ और गमछा बरामद कराया। उसने बताया कि डुप्लीकेट चाबी उसने परेड से नहीं बल्कि गुमटी नंबर पांच से 100 रुपये में बनवाई थी।
सवालों से बढ़ा सुब्रत का शुगर लेबल
सूत्राें के अनुसार जब पुलिस के अधिकारी सुब्रत के सामने सवालों की झड़ी लगा रहे थे तो बार-बार उसका शुगर लेबल बढ़ रहा था। नियंत्रित करने के लिए कभी वह कुछ दवाएं लेता कभी आराम करने की बात कहकर कुर्सी में अलग बैठ जाता। पुलिस के मुताबिक रिमांड में सुब्रत को साथ रखने के लिए रजिस्टर में लिखापढ़ी (तस्करा) की गई है। उसके कई क्रेडिट कार्डों की जानकारी भी मिली है।
रात में घटनास्थल पर लेकर पहुंची पुलिस
देर रात पुलिस शालू, विशाल, राजकिशोर और सुब्रत को लेकर विनीत के अपार्टमेंट पर पहुंची। जहां विशाल और राजकिशोर से सीन रीक्रिएट कराया गया कि कैसे गेट से दाखिल हुए, फ्लैट के भीतर कैसे घुसे और विनीत के आने तक किस कमरे में छिपकर उनका इंतजार किया। विनीत के आने पर कैसे उन्हें मौत के घाट उतारा और वहां से भागे कैसे।
रिमांड पूरी होने में अभी काफी घंटे बाकी हैं। बुधवार को हुई पूछताछ के बाद शालू और सुब्रत किसी को क्लीन चिट नहीं दी गई है। अभी कई ऐसे बिंदु हैं जिन पर दंपती से सवाल-जवाब होने हैं। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर