उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर हलचल लगातार बढ़ रही है। राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां अपनी सरकार को बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन के लिए नए समीकरण बनाने में जुटा है। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं शिकोहाबाद विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला फिरोजाबाद है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें- फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद, जसराना और सिरसागंज शामिल हैं। सीटों के समीकरण की कड़ी में आज हम फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा सीट की बात करेंगे। फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा सीट 1952 में ही अस्तित्व में आ गई थी। उस समय शिकोहाबाद विधानसभा सीट दो प्रमुख हिस्सों में बंटी हुई थी, जिसे शिकोहाबाद पश्चिम और करहल पश्चिम-शिकोहाबाद पूर्व के नाम से जानते थे। हालांकि, साल 1957 में यह सीट शिकोहाबाद के नाम से अस्तित्व में आई और इस नाम से यहां पहला चुनाव 1957 में आयोजित हुआ।
शिकोहाबाद विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
शिकोहाबाद विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी और निर्णायक हिस्सेदारी यादव मतदाताओं की है, जिनकी संख्या इस क्षेत्र में सबसे अधिक लगभग 22% है। इसके बाद निषाद और लोधी समाज के मतदाताओं की एक बड़ी और मजबूत आबादी लगभग 20% है, जो चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं जाटव (दलित) समुदाय के करीब 11% और मुस्लिम समुदाय के लगभग 8% मतदाता हैं। इनके अलावा ब्राह्मण समाज करीब 4%, कुशवाह समाज (लगभग 3%), बघेल समाज (करीब 3%) और गुर्जर समाज के लगभग 2% मतदाता भी मौजूद हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य समुदायों से आते हैं।
शिकोहाबाद विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
शिकोहाबाद विधानसभा सीट के पहले यानी की 1957 के चुनाव में निर्दलीय (IND) उम्मीदवार लायक सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के महाराज सिंह को 11,761 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में लायक सिंह को 25,758 वोट मिले, जबकि महाराज सिंह को 13,997 वोट मिले।
1962: निर्दलीय ने दोहराई जीत
1957 के बाद राज्य में 1962 के विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार मनसा राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम स्वरूप यादव को महज 657 वोटों से हराया।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1967: पहली बार जीती कांग्रेस
इस विधानसभा चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस के राम स्वरूप विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार एम. राम को 13,279 वोटों के अंतर से हराया।
1969: भारतीय क्रांति दल ने मारी बाजी
इस चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय क्रांति दल (BKD) की एंट्री हुई। चुनाव में मनसा राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के हकीम सिंह को 4,516 वोटों के अंतर से हराया।
1974: भारतीय क्रांति दल ने दोहराई जीत
1974 के चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (BKD) ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की। चुनाव में वीरेंद्र स्वरूप विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के हकीम सिंह को 20,004 वोटों के अंतर से हराया।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977: शिकोहाबाद में पहली बार जीती जनता पार्टी
1977 के विधानसभा चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार गंगा सहाय यादव विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के दुर्गा विजय सिंह को 15,531 वोटों के अंतर से हराया।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980: कांग्रेस को कड़े मुकाबले में मिली जीत
इस चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) के जगदीश सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के गंगा सहाय यादव को महज 588 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जगदीश सिंह को 16,397 वोट मिले, जबकि गंगा सहाय यादव को 15,809 वोट मिले।
1985: निर्दलीय उम्मीदवारों के दबदबे की शुरुआत
इस विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार राम नरेश विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के निहाल सिंह को 29,754 वोटों के अंतर से हराया।
1989: चेहरा नया पर निर्दलीय को ही मिली जीत
1989 के विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार राकेश कुमार विजयी हुए। उन्होंने जनता दल के उम्मीदवार झाऊ लाल को 1,803 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राकेश कुमार को 21,073 वोट मिले, जबकि झाऊ लाल को 19,270 वोट मिले।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में शिकोहाबाद विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991: निर्दलीय की लगातार तीसरी जीत
1991 के विधानसभा चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार झाऊ लाल यादव विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के राजेश कुमार को 2,245 वोटों से हराया।
1993: पहली बार जीती समाजवादी पार्टी
इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में मुलायम सिंह यादव विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अशोक यादव को 15,691 वोटों के अंतर से हराया।
1996: भाजपा की हुई एंट्री
वहीं, 1996 के विधानसभा चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर भाजपा की एंट्री हुई। चुनाव में अशोक यादव विजयी हुए। उन्होंने सपा के लखन सिंह को 1,896 वोटों के अंतर से हराया।
2002: सपा ने की वापसी
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। 2002 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के हरिओम विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के विमल कुमार को 18,365 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरिओम को 42,711 वोट मिले, जबकि विमल कुमार को 24,346 वोट मिले।
2007: एक बार फिर निर्दलीय ने जीता चुनाव
2007 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। चुनाव में अशोक यादव विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के हरिओम को 17,973 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अशोक यादव को 58,240 वोट मिले, जबकि हरिओम को 40,267 वोट मिले।
2022 का नतीजा
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2012: सपा की हुई वासपी
वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के ओम प्रकाश वर्मा विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के डॉ. मुकेश वर्मा को 43,994 वोटों के भारी अंतर से हराया। चुनाव में ओम प्रकाश वर्मा को 98,682 वोट मिले, जबकि डॉ. मुकेश वर्मा को 54,688 वोट मिले।
2017: भाजपा ने की वापसी
2012 के बाद राज्य में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुकेश वर्मा विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के संजय कुमार को हराया। चुनाव में मुकेश वर्मा को 87,851 वोट मिले, जबकि संजय कुमार को 77,074 वोट मिले।
2022 में सपा ने मारी बाजी
2017 के चुनाव के बाद राज्य में 2022 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव से पहले मुकेश वर्मा सपा में शामिल हो गए और सपा ने शिकोहाबाद सीट से उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया। चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के मुकेश वर्मा विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ओम प्रकाश वर्मा को 9,328 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मुकेश वर्मा को 1,06,279 वोट मिले, जबकि ओम प्रकाश वर्मा को 96,951 वोट मिले।