सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने चुनाव प्रचार के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम जमानत के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को अनुमति दी कि यदि प्रधान लंबित आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत बढ़ाने की मांग करते हैं, तो राज्य सरकार हाईकोर्ट के समक्ष अपनी दलीलें रख सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
शीर्ष अदालत ने कहा कि नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव छह अक्तूबर को मतदान होगा और नौ अक्तूबर को मतगणना होगी। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि मिलन प्रधान के खिलाफ दर्ज मामलों में कुछ गंभीर अपराधों का भी उल्लेख है, लेकिन अंतरिम जमानत मूल रूप से उन्हें चुनाव लड़ने और मतगणना में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए दी गई थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की गई है। इसके पहले 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी, जिसमें 2007 में दर्ज छह आपराधिक मामलों में मिलन प्रधान को दी गई अंतरिम जमानत पर चुनौती दी गई थी।
मिलन प्रधान को कब मिली जमानत?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 सितंबर को मिलन प्रधान को 20 अक्तूबर तक के लिए अंतरिम जमानत दी थी। यह जमानत छह अक्तूबर को नंदीग्राम सीट पर होने वाले उपचुनाव देखते हुए दी गई थी। यह सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा खाली की गई थी। इस साल हुए विधानसभा चुनाव में सीएम शुभेंदु दोनों सीटों से जीतने में कामयाब रहे थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखने का फैसला किया था, नंदीग्राम सीट को छोड़ दी थी।
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हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। साथ ही छह आपराधिक मामलों में से प्रत्येक में 20,000 रुपये का जमानत बांड भी जमा करने के लिए कहा गया था। बता दें कि प्रधान के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोपों में साल 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए थे। इस दौरान हाईकोर्ट ने मिलन प्रधान से जांच अधिकारी को अपना मोबाइल नंबर देने का भी निर्देश दिया था और उम्मीदवार को दिन में दो बार फोन करने की अनुमति दी गई थी। 18 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद से ही प्रधान को न्यायिक हिरासत में रखा गया था।