'बुल्ली बाई' नीलामी एप मामले में मुंबई की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने वर्ष 2022 में गिरफ्तार किए गए 25 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र विशाल झा को केस से डिस्चार्ज कर दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि विशाल झा ने यह आपत्तिजनक एप बनाया था, इसे बनाने में किसी की मदद की थी या मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी एप या वेबसाइट को सिर्फ फॉलो करना या सह-आरोपियों के संपर्क में रहना अपने आप में अपराध नहीं है, जब तक कि इसके खिलाफ कोई अतिरिक्त और ठोस सबूत न हो।
क्या है बुल्ली बाई एप विवाद?
यह विवाद 2022 में सामने आया था, जब इस एप पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें उनकी कथित ऑनलाइन नीलामी के नाम पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियों के साथ डाली गई थीं। मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस की बीकेसी साइबर सेल ने जांच शुरू कर बंगलूरू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे विशाल झा को सबसे पहले गिरफ्तार किया था।
विशाल झा की डिस्चार्ज अर्जी पर क्या बोली अदालत?
विशाल झा की डिस्चार्ज अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट आर. टी. इंगले ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि किसी वेबसाइट या पेज को सिर्फ फॉलो करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने पाया कि चार्जशीट में विशाल झा पर केवल एप को शेयर करने, फॉलो करने और सह-आरोपियों के संपर्क में रहने के ही आरोप हैं, जो उसकी अपराध में संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153-ए, 295-ए, 354-डी, 500, 509 और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इन धाराओं में समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, पीछा करने, मानहानि और महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
एक अन्य आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी कोर्ट ने की थी खारिज
इसी साल अप्रैल में अदालत ने मामले के एक अन्य आरोपी मयंक रावत की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी थी। उस दौरान कोर्ट ने माना था कि प्रथम दृष्टया ऐसे पर्याप्त सबूत हैं कि मयंक ने मुस्लिम महिलाओं के सोशल मीडिया अकाउंट से तस्वीरें डाउनलोड कर एप पर पोस्ट की थीं, जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंची थी। हालांकि, विशाल झा के मामले में ऐसे किसी अतिरिक्त साक्ष्य के अभाव में अदालत ने उसे राहत दे दी।