आईसीएमआर के अनुसंधान केंद्र का भूमिपूजन करते जेपी नड्डा।
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हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड और बदलती जलवायु से सैनिकों तथा स्थानीय लोगों की सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों का अब वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए लाहौल-स्पीति के जिला मुख्यालय केलांग के पास 35 करोड़ रुपये की लागत से उच्च हिमालयी चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जाएगा। सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के इस केंद्र की आधारशिला रखी। अनुसंधान केंद्र में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर मिलकर काम करेंगे। यहां हिमालयी क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड के कारण उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का अध्ययन किया जाएगा।
कम ऑक्सीजन और ठंड का सैनिकों पर असर जानेंगे वैज्ञानिक
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां और मौसम यहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को भी कई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों को समझने और उनके अनुरूप उपचार विकसित करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र में ऊंचाई के अनुकूल शरीर को ढालने की प्रक्रिया, स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की समय रहते पहचान और बेहतर उपचार के तरीकों पर शोध किया जाएगा। इससे सैनिकों और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं विकसित करने में मदद मिलेगी।
हिमाचल ही नहीं, छह राज्यों और क्षेत्रों को भी मिलेगा लाभ
नड्डा ने कहा कि इस अनुसंधान केंद्र में होने वाले शोध का लाभ हिमाचल प्रदेश के अलावा लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य हिमालयी क्षेत्रों को भी मिलेगा। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए शोध आधारित उपाय तैयार किए जाएंगे। अनुसंधान के आधार पर बीमारियों से बचाव, उनकी समय पर पहचान और प्रभावी उपचार के तरीके सुझाए जाएंगे।