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ममदानी ऐसा कैसे कर सकते हैं?: आतंक की निंदा में दोहरे मापदंड क्यों?
Wed, 14 Oct 2026 07:42 AM IST
नितिन गौतम
ब्रेट स्टीफेंस, द न्यूयॉर्क टाइम्स
ब्रेट स्टीफेंस, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 14 Oct 2026 07:42 AM IST
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न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी
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विस्तार
न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने बीते सात अक्तूबर को इस्राइलियों के नरसंहार की याद में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की, जिसकी तीखी आलोचना हो रही है। इसमें बस एक छोटा-सा हिस्सा ही हमास की निंदा करने और पीड़ितों के प्रति संवेदना जताने के लिए था। बाकी का हिस्सा इस्राइल द्वारा गाजा में जारी नरसंहार की लंबी-चौड़ी निंदा से भरा था। इसके जवाब में, न्यूयॉर्क बोर्ड ऑफ रब्बीस के प्रेसिडेंट एम्मिएल हिर्श ने कहा कि ‘यह बयान इतने सारे यहूदियों के लिए कितना अपमानजनक था, यह बताना भी मुश्किल है।’असल में, यह उसी तरह गलत है, जैसे 11 सितंबर की 25वीं बरसी पर पीड़ितों को बस नाममात्र की श्रद्धांजलि देना और फिर पश्चिम एशिया में अमेरिकी विदेश नीति की लंबी-चौड़ी आलोचना करना। 11 सितंबर और सात अक्तूबर, दोनों ही दिन जो हुआ, वह पूरी तरह से बुरा था। दोनों ही मामलों में बिना किसी उकसावे के जान-बूझकर बहुत ज्यादा हिंसा की गई। यह इसलिए आपत्तिजनक है, क्योंकि सात अक्तूबर को मारे गए कई यहूदी, जो साफ तौर पर वामपंथी विचारधारा वाले सामुदायिक बस्तियों में रहते थे, शांति आंदोलन में सबसे आगे थे। मसलन, वे बीमार फलस्तीनियों को इलाज के लिए पास के इस्राइली अस्पतालों तक ले जाने का काम स्वेच्छा से करते थे। हमास न केवल निर्दोषों की हत्या कर रहा था और उनमें दहशत फैला रहा था, बल्कि नेक व भले लोगों की जान भी ले रहा था।
यह बात इसलिए भी गलत है, क्योंकि हमास ने अपने पीड़ितों को सिर्फ किसी रणनीतिक मकसद को पूरा करने के लिए नहीं मारा। उसने उन्हें ऐसे तड़पा-तड़पाकर और बेरहमी से मारा, जैसे सीरियल किलर्स की कोई फौज हो, जिन्हें अपने पीड़ितों की तकलीफ में मजा आता है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने इस्राइली महिलाओं की लाशों के बारे में बताया कि उनके ‘यौनांगों पर गोली मारी गई थी।’ कुछ महिलाओं के साथ इतनी बेरहमी से दुष्कर्म किया गया था कि उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। माता-पिता को उनके बच्चों के सामने मार डाला गया; बच्चों की हत्या उनके बिस्तर पर ही कर दी गई। एक फील्डवर्कर का सिर काट दिया गया। हमास ने ऐसा करते हुए अपना वीडियो भी बनाया था।
यह इसलिए गलत है, क्योंकि, गाजा में चल रही लड़ाई के बारे में आपकी राय चाहे जो भी हो, सात अक्तूबर से ठीक पहले इस्राइल और गाजा की सीमा पर युद्ध विराम लागू था। हमास ने ही हिंसा शुरू करने का फैसला किया, ठीक वैसे ही, जैसे 1941 में जापानियों ने पर्ल हार्बर पर हमला किया था। चाहे कोई भी लड़ाई हो, जो पहला वार करता है, वह आखिरी वार करने का अधिकार खो देता है। यह इसलिए भी गलत है, क्योंकि ममदानी गुमराह कर रहे हैं। वह ऐसा दिखाते हैं, मानो इस्राइल से उनकी मुख्य नाराजगी सात अक्तूबर के बाद की घटनाओं को लेकर है। असल में, वह कॉलेज के दिनों से ही इस्राइल-विरोधी रहे हैं। खुद के लिखे एक रैप गीत में उन्होंने उन पांच लोगों के प्रति ‘प्यार’ जताया है, जिन्हें अमेरिकी अदालत ने हमास को पैसे पहुंचाने का दोषी ठहराया था। सात अक्तूबर के अगले ही दिन, उन्होंने एक बयान जारी किया, जिसमें हमास का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन इस्राइल की निंदा की गई थी।
यह इसलिए आपत्तिजनक है, क्योंकि कुछ लोग बिना सोचे-समझे इस्राइल पर नरसंहार का आरोप लगाते हैं। ऐसे लोग या तो युद्ध और नरसंहार के बीच का अंतर समझना नहीं चाहते या फिर पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं। लेकिन, यह आरोप जितना झूठा है, उतना ही खतरनाक भी है। झूठा इसलिए, क्योंकि नरसंहार का मतलब है, लोगों के किसी पूरे समूह को इसलिए मार डालना कि वे कौन हैं, न कि इसलिए कि उन्होंने क्या किया है। और, अगर इस्राइल फलस्तीनियों को सिर्फ फलस्तीनी होने के नाते मारना चाहता, तो वह कभी भी युद्ध के लिए अपने हजारों सैनिकों को जुटाने की जहमत नहीं उठाता और न ही शहरी इलाकों में भीषण लड़ाई में अपने सैकड़ों सैनिकों को खोता। खतरनाक इसलिए, क्योंकि नरसंहार के आरोप का राजनीतिक मकसद सात अक्तूबर के हमलों को कमतर दिखाना या उन्हें मिटा देना है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि उन हमलों में हुई मौतों को फलस्तीनियों की उन मौतों के मुकाबले कम गंभीर दिखाया जा सके, जो दुखद रूप से उन हमलों के बाद हुईं और जिनका होना लगभग तय था।
यह इसलिए भी निंदनीय है, क्योंकि इस्राइल के प्रति हमास का इरादा सचमुच नरसंहार का है। उसके नेताओं ने कई बार और सबके सामने कसम खाई है कि वे भविष्य में सात अक्तूबर जैसी घटनाएं दोहराएंगे। अगर उस दिन इस समूह को ताकत के दम पर नहीं रोका गया होता, तो यह मानने का कोई कारण नहीं है कि वे तेल अवीव और इस्राइल के दूसरे शहरों की ओर बढ़ते हुए अपना कत्लेआम जारी न रखते।
यह इसलिए भी आपत्तिजनक है, क्योंकि इस्राइल पर नरसंहार का आरोप लगाने के पीछे एक और बुरा मकसद है, जो गाजा में हालिया युद्ध से बहुत पहले से चला आ रहा है। यह यहूदियों के नरसंहार को मिटाने की कोशिश का एक नमूना है: यह उस बेवकूफी भरे तरीके जैसा नहीं है, जो नाजी जर्मनी द्वारा साठ लाख यहूदियों की हत्या से इन्कार करता है, बल्कि यह एक ज्यादा चालाकी भरा तरीका है। इसमें जिंदा यहूदियों पर ही नरसंहार का आरोप लगाया जाता है, ताकि यहूदियों के उत्पीड़न और लगभग खत्म कर दिए जाने के उस लंबे इतिहास पर उनके दावे को खत्म किया जा सके, जिसके कारण उन्हें अपने लोगों की रक्षा करने में सक्षम एक आजाद देश की जरूरत पड़ी।
यह बात इसलिए भी गलत है, क्योंकि ममदानी लगभग दस लाख यहूदी न्यूयॉर्क निवासियों के मेयर हैं, जिनमें से कई के करीबी रिश्तेदार इस्राइल में रहते हैं। दुख के इस दिन, उन्हें बेहतर व्यवहार मिलना चाहिए। यह आधुनिक समय में यहूदियों के प्रति नफरत दिखाने का एक और दोहरा मापदंड है: जब भी प्रगतिशील हलकों में यहूदी-विरोधी भावना का जिक्र होता है, तो उसके साथ-साथ इस्लाम-विरोधी भावना या अन्य तरह के भेदभाव की बातें भी जरूर की जाती हैं।
बेहतर होगा कि ऐसा मेयर हो, जो कम से कम सात अक्तूबर को यह कह सके: यहूदियों की जिंदगी मायने रखती है। इस्राइलियों की जिंदगी मायने रखती है। बस बात यहीं खत्म होती है। गाजा के बारे में किसी और दिन भी बातें की जा सकती हैं।