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एक्सप्लेनर: भारत से लेकर फ्रांस और स्पेन से पाकिस्तान तक, दुनिया में कहां-कहां जारी हैं विरोध-धरने; वजह क्या?
Wed, 07 Oct 2026 07:26 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 07 Oct 2026 07:26 PM IST
सार
World Protests Explainer: भारत से लेकर फ्रांस, स्पेन, अमेरिका, ब्रिटेन और पाकिस्तान तक दुनिया में विरोध-प्रदर्शनों की लहर क्यों चल रही है? कहां-किन मुद्दों को लेकर जनता सड़कों पर है? विरोध का तरीका क्या है? सरकारें इनसे निपटने के लिए क्या कर रही हैं? आइये जानते हैं...
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दुनिया में कहां-कहां जारी प्रदर्शनों का दौर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
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भारत में चुनाव आयोग (ईसी) की ओर से अलग-अलग राज्यों में कराई गई वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर हालिया दिनों में विवाद हुआ है। मतदाता सूचियों से करोड़ों की संख्या में नाम कटने और इन्हें जोड़ने के लिए फॉर्म-6 में हुए बदलाव को लेकर बीते करीब दो हफ्ते से प्रदर्शनों का दौर जारी है। अब यह विरोध भारत की आर्थिक राजधानी- मुंबई से लेकर देश की राजधानी- दिल्ली तक पहुंच चुका है।
माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में भी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ प्रदर्शनों का दौर जारी रह सकता है। हालांकि, अगर मौजूदा समय में पूरी दुनिया के हाल को देखा जाए तो सामने आता है कि विरोध प्रदर्शनों, धरनों और रैलियों का यह दौर सिर्फ भारत में ही नहीं जारी है। सुदूर अमेरिका से लेकर यूरोप और भारत के दो पड़ोसी देशों तक में प्रदर्शनों का दौर जारी है।
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माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में भी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ प्रदर्शनों का दौर जारी रह सकता है। हालांकि, अगर मौजूदा समय में पूरी दुनिया के हाल को देखा जाए तो सामने आता है कि विरोध प्रदर्शनों, धरनों और रैलियों का यह दौर सिर्फ भारत में ही नहीं जारी है। सुदूर अमेरिका से लेकर यूरोप और भारत के दो पड़ोसी देशों तक में प्रदर्शनों का दौर जारी है।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर दुनिया में मौजूदा समय में कहां-कहां प्रदर्शनों का दौर जारी है? इन प्रदर्शनों की वजह क्या है और इनका स्तर कितना बड़ा है? जहां प्रदर्शन हो रहे हैं वहां इन्हें लेकर अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं? आइये जानते हैं...
पहले जानें- दुनिया में कहां-क्यों विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी?
पहले जानें- दुनिया में कहां-क्यों विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी?
1. फ्रांस
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फ्रांस में प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शन कब शुरू हुए?
प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या?
- प्रदर्शनों की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के वंचित इलाकों में छात्रों द्वारा कक्षाओं के बहिष्कार से हुई थी।
- अक्तूबर के पहले हफ्ते तक यह आंदोलन अपने तीसरे हफ्ते में है और जनआंदोलन में बदल चुका है।
- कई बड़े शहर, जैसे- मार्सिले, लियोन, स्ट्रैसबर्ग और बोर्डो में इस वक्त प्रदर्शनों का दौर जारी है।
प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या?
- फ्रांस में हाई स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी और गैर-मौजूद शिक्षकों की जगह नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है या प्रक्रिया बहुत धीमी है।
- इसके अलावा शिक्षण संस्थानों, खासकर स्कूल की बिल्डिंगों की हालत खस्ताहाल है, जहां पर्याप्त बेंच-कुर्सियां नहीं हैं और कई जगह चूहों का प्रकोप है।
- गर्मियों की भीषण गर्मी के दौरान क्लास में एसी न होने, क्लासरूम में काफी ज्यादा बच्चे और लंबे शिक्षण घंटों ने छात्रों के असंतोष को बढ़ा दिया।
- इसके अलावा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार बढ़ते राष्ट्रीय घाटे को कम करने के लिए 54 अरब यूरो की कटौती वाला बजट प्रस्ताव लेकर आई है।
- इसमें सरकारी कर्मचारियों के वेतन फ्रीज करने की योजना के खिलाफ ट्रेड यूनियनों और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल शुरू कर दी।
- इसके साथ ही ईंधन और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और सरकारी की ओर से कम होते सार्वजनिक खर्च से भी जनता में नाराजगी है।
मौजूदा हालात कैसे, प्रदर्शनों का स्तर क्या?
ये भी पढ़ें: फ्रांस में शिक्षा फंडिंग को लेकर सड़कों पर उतरे लोग: पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस; बवाल की वजह क्या?
- प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने के लिए तरफ से स्कूलों की नाकाबंदी के बाद पुलिस की ओर से लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल किए जाने से तनाव काफी बढ़ गया।
- मार्सिले, लियोन, स्ट्रैसबर्ग, बोर्डो, नांत और रेन्स जैसे हरों में झड़पों में कम से कम 190 हाई स्कूल छात्र, 78 शिक्षण कर्मचारी और 715 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं।
- लेंस शहर में एक 15 साल के छात्र का स्टन ग्रेनेड धमाके में हाथ कट जाने और सैकड़ों छात्रों के घायल होने के बाद बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावक भी सड़कों पर उतर आए हैं।
- पुलिस की कार्रवाई में अब तक कम से कम 6,100 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से अधिकांश 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग हैं।
- हमास के इस्राइल पर हमले की तीसरी बरसी पर फलस्तीन समर्थक छात्रों ने प्रदर्शन की तैयारी की है। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं, आतंकी खतरे और यहूदी-विरोधी घटनाओं के बढ़ते जोखिम का हवाला देकर पेरिस पुलिस ने छात्र प्रदर्शनों पर भी रोक लगाई है।
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2. स्पेन
स्पेन में विरोध प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शन कब से शुरू हुए?
- मैड्रिड में 87 वर्षीया वृद्धा मारिया डेल कारमेन अबास्कल (मारिकारमेन) को 23 सितंबर को उनके घर से बेदखल किए जाने के बाद प्रदर्शनों की शुरुआत हुई।
- इसके बाद लगभग 1,000 प्रदर्शनकारियों ने मैड्रिड के पुएर्ता डेल सोल और बार्सिलोना के प्लाजा कैटालुनिया में शिविर लगाकर अनिश्चितकालीन विरोध शुरू कर दिया।
- 3-4 अक्तूबर को स्पेन की संसद में आवासीय खर्चों में राहत से जुड़े विधेयकों के खारिज होने के बाद मैड्रिड, बार्सिलोना और वेलेंसिया में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या?
- मैड्रिड में 70 वर्षों से रह रही बुजुर्ग महिला मारिया डेल कारमेन अबास्कल की इमारत को एक अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टमेंट फंड ने खरीद लिया और उनका किराया 200% से ज्यादा बढ़ा दिया।
- किराया न दे पाने पर व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाली वृद्धा को स्ट्रेचर पर घर से बाहर निकाल दिया गया। यह दृश्य टीवी और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गए, जिसके बाद पूरे देश में जन-आक्रोश फैल गया।
- गौरतलब है कि स्पेन में पिछले 10 वर्षों में औसत किराया लगभग दोगुना हो चुका है। इसके चलते वहां लोगों के सामने आवास संकट पैदा हो गया है, जो कि खर्चों में जबरदस्त बढोतरी की वजह बना है।
- देश में किराए पर रहने वाले 26% लोगों की शिकायत है कि वे अपनी कुल आय का 40% से ज्यादा हिस्सा केवल किराए और बिजली-पानी पर खर्च करने के लिए मजबूर हैं, जिससे उनकी सेविंग्स नहीं हो पातीं।
- स्पेन में सरकारी सामाजिक आवास की भी भारी कमी है, जो कुल उपलब्ध आवासों का 2% से भी कम है। इसके अलावा टूरिस्ट अपार्टमेंट प्लेटफॉर्म्स, जैसे- एयरबीएनबी और रियल एस्टेट सट्टेबाजी ने भी किराया महंगा किया है।
प्रदर्शनों की मौजूदा स्थिति-स्तर क्या?
- मैड्रिड, बार्सिलोना जैसे प्रमुख शहरों में हजारों लोग लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस की झड़पें हुईं। इस दौरान पत्थरबाजी और सड़कों पर कचरे के डिब्बों में आग की घटनाएं हुईं।
- वेलेंसिया में रियल एस्टेट समिट के बाहर सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास कर रहे प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों का प्रयोग किया।
- मैड्रिड के प्रसिद्ध पुएर्ता डेल सोल और बार्सिलोना के प्लाजा कैटालुनिया में लगभग 1,000 प्रदर्शनकारी तंबू गाड़कर विरोध पर बैठे हैं और मांगें पूरी होने तक हटने से इनकार कर रहे हैं।
- इन प्रदर्शनों के मद्देनजर प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की वामपंथी सरकार किराए की दरों को सीमित करने, बेदखली पर रोक लगाने और किरायेदारों को सुरक्षा देने के लिए दो आपातकालीन अध्यादेश लाई थी।
- हालांकि, संसद में कंजर्वेटिव और राइट-विंग विपक्षी दलों, जैसे पॉपुलर पार्टी, वॉक्स और जुंत्स ने इन विधेयकों के खिलाफ वोट देकर इन्हें खारिज कर दिया, जिससे जनता का गुस्सा और भड़क गया।
- संसद में सरकार की किराए में बढ़ोतरी रोक पाने की नाकामी और सड़कों पर बढ़ते जनाक्रोश के बीच प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने 29 नवंबर को समयपूर्व आम चुनाव कराने की घोषणा कर दी है।
ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: स्पेन में क्यों सड़क पर उतरे हजारों लोग, आशियाने के बढ़ते संकट के पीछे क्या है वजह?
3. पाकिस्तान
पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शन कब शुरू हुए?
प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या?
- पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) के समर्थकों ने 4 अक्तूबर को अपने विरोध प्रदर्शन (लॉन्ग मार्च) की शुरुआत की।
- यह मार्च उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत, जैसे- लक्की मर्वत शहर से शुरू हुआ है और इस्लामाबाद से लगभग 80 किलोमीटर दूर खैराबाद की ओर बढ़ रहा है।
- यह मार्च पहले 27 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन सरकार ने इसे रोकने के लिए पीटीआई नेताओं के साथ बैठक बुलाई। हालांकि, जब बात नहीं बनी तो पीटीआई ने 4 अक्तूबर को मार्च शुरू किया।
प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या?
- पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उनकी पार्टी का आरोप है कि उन पर दर्ज 100 से ज्यादा कानूनी मामले राजनीति से प्रेरित हैं।
- 73 वर्षीय इमरान खान के स्वास्थ्य और जेल में उन्हें उचित इलाज न मिलने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। उनके परिवार का दावा है कि विशेषज्ञ इलाज न मिलने के कारण उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी कम हो गई है।
- पीटीआई नेतृत्व की उस मांग को खारिज थी कि पार्टी नेताओं को इमरान खान से मिलने की अनुमति दी जाए और उनका तुरंत स्वतंत्र चिकित्सा परीक्षण कराया जाए, जिसे सरकार ने अस्वीकार कर दिया।
- प्रदर्शनों से ठीक पहले अलीमा खान समेत इमरान खान की बहनों की गिरफ्तारी ने राजनीतिक तनाव और जनाक्रोश को और बढ़ा दिया। पीटीआई ने इसे दबाव की राजनीति बताया और प्रदर्शन शुरू किया।
- सरकार की ओर से राजधानी इस्लामाबाद के प्रवेश मार्गों पर भारी शिपिंग कंटेनर लगाकर रास्ते बंद करने और प्रदर्शनकारियों को कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी ने पीटीआई समर्थकों में नाराजगी बढ़ा दी है।
प्रदर्शनों की मौजूदा स्थिति-स्तर क्या?
- खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में 5,000 से ज्यादा पीटीआई कार्यकर्ता और समर्थक लाल और हरे झंडों के साथ सड़कों पर मार्च कर रहे हैं।
- पार्टी नेतृत्व के मुताबिक, खैराबाद पहुंचने पर आंदोलन के अगले चरण की योजना का एलान किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस्लामाबाद तक पहुंचने के लिए सरकार ने नई तैयारियां की हैं।
- पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने चेतावनी दी है कि सड़कों-राजमार्ग पर कब्जा करने वाले पीटीआई कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ एक-एक करके सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
4. अमेरिका
अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में विरोध में उतरे छात्र।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शन कब भड़के?
प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या?
- अमेरिका में हालिया समय में भड़के प्रदर्शनों की वजह दो साल पुराना विवाद है। दरअसल, अक्तूबर 2024 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एक फ्रेटरनिटी हाउस में एक छात्रा के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म और उसे नशीला पदार्थ दिए जाने के आरोप हैं।
- पीड़िता की ओर से सितंबर 2026 में दायर सिविल याचिका और विश्वविद्यालय की अंदरूनी अनुशासनात्मक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अकतूबर 2026 के पहले हफ्ते (5 अक्तूबर) में हजारों छात्रों और शिक्षकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा।
प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या?
- 2024 में ची फाइ फ्रेटरनिटी हाउस में एक लड़की को शराब और कीटामाइन देकर कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और कथित तौर पर उसका यौन शोषण हुआ था।
- विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच में 7 आरोपी छात्रों में से केवल 2 को ही निष्कासित किया गया, जबकि बाकी आरोपियों को केवल निबंध लिखने, सस्पेंशन और डिस्क्लोजर जैसी हल्की सजाएं दी गईं।
- स्थानीय जिला अभियोजक (डीए) ने शुरू में पर्याप्त सबूत न होने का हवाला देकर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया था। हालांकि, इस मामले में खुलासों के बाद अब इस मामले की नए सिरे से जांच और इसमें कार्रवाई शुरू हुई।
- प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन महिलाओं की सुरक्षा करने में विफल रहा है और पीड़िता को न्याय देने के बजाय अलग-अलग फ्रेटरनिटी (बिरादरियों) का बचाव कर रहा है।
प्रदर्शन की मौजूदा स्थिति-स्तर क्या?
- हजारों छात्र और शिक्षक प्रदर्शन में जुटकर 'छात्र दुष्कर्मियों को बाहर करो' और 'बिरादरियों पर प्रतिबंध लगाओ' के नारे लगा रहे हैं। उनकी तरफ से कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट माइकल कोटलिकाफ के इस्तीफे की मांग की गई है।
- प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की मुख्य इमारत के शीशे तोड़ दिए और दीवारों पर 'कॉर्नेल में दुष्कर्मियों को सुरक्षा और प्रदर्शनकारियों को निष्कासन मिलता है' जैसे संदेश लिख दिए।
- यूनिवर्सिटी में बढ़ते तनाव को देखते हुए कॉर्नेल के फ्रेटरनिटी हाउस के अध्यक्षों ने सभी सामाजिक आयोजनों को रद्द करने के पक्ष में मतदान किया।
- उधर न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने स्थानीय पुलिस की ढिलाई पर असंतोष जताते हुए राज्य की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को विशेष अभियोजक नियुक्त किया है, जो इस आपराधिक मामले की नए सिरे से जांच करेंगी।
5. ब्रिटेन
ब्रिटेन में मौजूदा समय में तीन तरह के प्रदर्शन जारी हैं...एआई और टेक कंपनियों के खिलाफ प्रदर्शन
- ब्रिटेन में पुल द प्लग जैसे प्रत्यक्ष प्रदर्शनकारी समूहों की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई थी। हालांकि, सितंबर और अक्तूबर 2026 के दौरान एआई सुरक्षा चेतावनियों के बाद इस आंदोलन में भारी तेजी आई है।
- ओपनएआई के ट्रेनिंग सैंडबॉक्स से एआई एजेंट्स के बाहर निकलकर वेबसाइट हैक करने की घटना और एंथ्रोपिक के शोधकर्ता जैकब कॉक्सन का यह चेतावनी देकर इस्तीफा देना कि एआई मानव सभ्यता को नष्ट कर सकता है, से लोगों में डर और असंतोष बढ़ा।
- प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिना आम जनता की सहमति के टेक कंपनियां, जैसे- एनवीडिया और पैलेंटिर विशाल डेटा सेंटरों का निर्माण कर रही हैं।
- 1 अक्तूबर को लंदन में पैलेंटिर मुख्यालय के बाहर सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और एनवीडिया के एक टेक उद्योग डिनर में कार्यकर्ताओं ने घुसकर हंगामा किया।
अप्रवासी विरोधी प्रदर्शन
- यह विरोध प्रदर्शन 4 अक्तूबर 2026 (रविवार) को शुरू हुए। इनकी मुख्य वजह इंग्लिश चैनल (समुद्री सीमा) से बचाए गए 149 प्रवासियों को हैम्पशर के गोसपोर्ट स्थित मरीना लाया जाना। इसे लेकर स्थानीय निवासियों में आक्रोश भड़क उठा।
- प्रदर्शनकारियों ने अप्रवासियों को बाह निकालो और सरकार-प्रशासन विरोधी नारे लगाते हुए पुलिस की गाड़ियों को रोकने की कोशिश की। झड़प और पुलिस अधिकारियों पर हमलों के आरोप में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
6. जापान
प्रदर्शन कब शुरू हुए?3 अक्तूबर (शनिवार) को ओकिनावा में एक महिला की हत्या की वारदात के बाद 5 अक्तूबर 2026 को टोक्यो में प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर और ओकिनावा की राजधानी नाहा में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे।
प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या?
- ओकिनावा के नाहा स्थित एक होटल में 39 वर्षीया जापानी महिला- अन्ना यागी की कथित तौर पर गला घोंटकर हत्या कर दी गई और उनका वॉलेट व बैग लूट लिया गया।
- इस घटना में अमेरिकी मरीन कोर के 20 वर्षीय सैनिक डेविन जैकब बैलार्ड को मुख्य संदिग्ध के रूप में आरोपी बनाया गया है।
- इस जघन्य अपराध के बाद जापान में लोग अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ 'यौन हिंसा बंद करो' लिखी तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे।
- जापान में तैनात अधिकांश अमेरिकी सैन्य बल (लगभग 18,000 मरीन) ओकिनावा में ही स्थित हैं। अमेरिकी सैनिकों की ओर से अतीत में किए गए अपराधों, जैसे 1995 में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और दुर्घटनाओं की वजह से स्थानीय निवासियों में विदेशी सैन्य उपस्थिति को लेकर लंबे समय से गहरा असंतोष है।
- जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस घटना को 'बर्बर और घिनौना' बताते हुए अमेरिकी प्रशासन के सामने कड़ा विरोध जताया और दोबारा ऐसी घटनाएं न होने देने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की।
- बढ़ते जन-आक्रोश के बीच अमेरिकी सैन्य कमान ने ओकिनावा में तैनात अपने सैनिकों पर एक महीने का नाइट कर्फ्यू और शराब पीने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, साथ ही 48 घंटे के लिए सैन्य अभियानों को रोककर अनुशासन प्रशिक्षण शुरू किया है।