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Hindi News ›   World ›   China Five Siberian tigress cubs Rare family scattering how much tiger population grown over nine years

चीन में साइबेरियाई बाघिन के पांच शावक: जंगल में बिखर रहा दुर्लभ परिवार, नौ साल में बाघों की संख्या कितनी बढ़ी?

Mon, 12 Oct 2026 11:51 PM IST
डॉ. संजय पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, शंघाई।
अमर उजाला नेटवर्क, शंघाई। Published by: डॉ. संजय पांडेय Updated Mon, 12 Oct 2026 11:51 PM IST
सार

चीन में पहली बार जंगली साइबेरियाई बाघ के पांच शावकों के जन्म का मामला दर्ज हुआ। हालांकि, तीन ने मां का साथ छोड़ दिया है। ऐसे में चीन के जंगल में यह दुर्लभ परिवार अब बिखरने लगा है।

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China Five Siberian tigress cubs Rare family scattering how much tiger population grown over nine years
बाघों की आबादी बढ़ाने का प्रयास - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स-एजेंसी

विस्तार

एक बाघिन, पांच शावक और जंगल में बड़े होते एक दुर्लभ परिवार की कहानी। चीन के जंगलों में पहली बार दर्ज किए गए जंगली साइबेरियाई बाघ के पांच शावकों का यह परिवार अब धीरे-धीरे बिखरने लगा है। पांच में से तीन शावक अपनी मां से अलग होकर स्वतंत्र जीवन की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि दो अभी उसके साथ हैं। इस दुर्लभ घटना ने न केवल वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान खींचा है, बल्कि चीन के उस जंगल में हो रहे बदलावों को भी सामने रखा है, जहां संरक्षण के प्रयासों के बीच बाघों की आबादी बढ़ रही है।

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चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में पूर्वोत्तर चीन के टाइगर एंड लेपर्ड नेशनल पार्क प्रशासन के हवाले से यह जानकारी दी। पार्क प्रशासन के अधिकारी चेन शियाओकाई के मुताबिक तीन शावक अगस्त से अपनी मां से अलग होकर स्वतंत्र होने लगे हैं। आम तौर पर नर बाघ पहले मां का साथ छोड़ते हैं। युवा बाघ लगभग 18 महीने से दो साल की उम्र में स्वतंत्र जीवन शुरू करते हैं। बाघिन और उसके पांच शावकों को नवंबर 2025 में चीन के जिलिन प्रांत के हुंचुन इलाके में लगे इन्फ्रारेड कैमरों ने रिकॉर्ड किया था। पार्क प्रशासन के अनुसार चीन में जंगली बाघ के पांच शावकों वाले परिवार का यह पहला दर्ज मामला है। निगरानी रिकॉर्ड में बाघिन की पहचान जीएच005एफ के रूप में की गई है। अनुमान है कि उसने जून 2025 के आसपास शावकों को जन्म दिया था।
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मां से अलग हुए तीनों शावक अभी हुंचुन क्षेत्र में हैं और कभी-कभी सीमा पार करके रूस की ओर भी चले जाते हैं। पार्क प्रशासन निगरानी प्रणाली की मदद से उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है।इस परिवार से जुड़ा एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। अधिकारी चेन के मुताबिक, निगरानी रिकॉर्ड से यह संभावना जताई गई है कि बाघिन अपना इलाका अपनी सबसे कमजोर बेटी के लिए छोड़ रही है। इससे युवा मादा को अपना क्षेत्र स्थापित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभी केवल एक संभावना है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

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नौ साल में लगभग तीन गुनी हुई बाघों की संख्या

इस दुर्लभ परिवार की कहानी ऐसे समय सामने आई है, जब राष्ट्रीय उद्यान में बाघों और तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है। राष्ट्रीय वानिकी एवं घासभूमि प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यहां जंगली साइबेरियाई बाघों की संख्या 2017 में 27 थी, जो 2026 में बढ़कर 72 हो गई। इसी अवधि में जंगली तेंदुओं की संख्या 42 से बढ़कर 115 दर्ज की गई।पार्क प्रशासन के मुताबिक सीका हिरण, रो हिरण और जंगली सूअर जैसे जानवर बाघों के भोजन का प्रमुख आधार हैं। अधिकारी का कहना है कि सीका हिरणों की संख्या पहले की तुलना में तीन गुने से अधिक हो गई है। भोजन की बेहतर उपलब्धता से बाघिनों को शावकों के पालन-पोषण में मदद मिलती है।जंगलों में मानवीय गतिविधियां कम होने, वन क्षेत्र बहाल करने, वन्यजीव गलियारे विकसित करने और अवैध शिकार रोकने के लिए लगातार गश्त जैसे उपायों ने भी बाघों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने में योगदान दिया है।

चीन और रूस के जंगलों पर साझा नजर

बाघों और तेंदुओं के संरक्षण के लिए चीन और रूस के बीच भी सहयोग बढ़ा है। दोनों देशों ने 2024 में बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए सीमा-पार संरक्षित क्षेत्र स्थापित करने का समझौता किया था। दोनों देशों के जुड़े संरक्षित क्षेत्रों का कुल विस्तार लगभग 17,000 वर्ग किलोमीटर बताया गया है।इस क्षेत्र में वन्यजीवों की निगरानी के लिए उपग्रह आधारित जानकारी, ड्रोन और जंगल में लगे कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तकनीकी सहायता देने वाली कंपनी जिशी मीडिया के अधिकारी हू शिन्यू के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली प्रजातियों की पहचान में लगभग 90 प्रतिशत और अलग-अलग बाघों तथा तेंदुओं की पहचान में 80 प्रतिशत सटीकता हासिल करती है। 2017 में शुरुआती चरण में शामिल हुआ यह राष्ट्रीय उद्यान 2021 में औपचारिक रूप से स्थापित किया गया था। पांच शावकों वाला दुर्लभ परिवार इस बात की याद दिलाता है कि जंगल में संरक्षण की सफलता केवल बाघों की गिनती से नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित प्रजनन और अगली पीढ़ी के स्वतंत्र जीवन तक पहुंचने से भी समझी जाती है।

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