ये उम्र नहीं, मेडल का हाैसला है: 78 में सिल्वर, 98 में गोल्ड; युवाओं के जोश पर भारी इन बुजुर्गों का रिकाॅर्ड
88 साल की उम्र में भी बुजुर्ग खिलाड़ी अपने जोश और जज्बे से युवाओं को प्रेरणा दे रहे हैं। बिना सरकारी मदद के वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक जीत रहे हैं। उम्र उनके हौसले के आगे बाधा नहीं बन रही। लगातार बेहतर प्रदर्शन कर ये खिलाड़ी साबित कर रहे हैं कि प्रतिभा और जुनून के आगे उम्र सिर्फ एक संख्या है।
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उम्र सिर्फ नंबर है, इस बात को आध्यात्मिक नगरी के बुजुर्ग खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से साबित किया है। 88 साल में भी पदक जीत रहे हैं। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पदक जीत कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
बुजुर्ग खिलाड़ी किसी तरह की सरकारी मदद नहीं ले रहे हैं। शहर के अलग-अलग स्टेडियमों और क्लबों में सुबह, शाम नियमित अभ्यास करते हैं। इन सबका मंत्र है खेल में स्टेमिना और फुर्ती जरूरी है। फिट रहने के लिए नियमित रूप से खेलना जरूरी है।
श्रीनारायण खेमका : 400 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीत
88 वर्षीय श्रीनारायण खेमका को काशी का मिल्खा सिंह कहा जाता है। वे नियमित अभ्यास की बदौलत आज भी मिल्खा सिंह की तरह दौड़ लगाने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने 23वें एशिया मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो पदक जीत कर अपनी श्रेष्ठता साबित की। खेमका के इस प्रयास की सराहना हुई। उन्होंने गत वर्ष 23वें एशिया मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 85 प्लस आयु वर्ग में 400 मीटर दौड़ में रजत पदक और 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया।
दधिबल चौहान : अब तक 60 मेडल जीते, इनमें 23 गोल्ड
रामनगर निवासी दधिबल सिंह चौहान की उम्र 65 साल है। रोजाना 24 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। पैदल ही ऑफिस जाते और आते हैं। दौड़ के नियमित अभ्यास और पैसे की बचत के लिए उन्होंने यह प्लान बनाया है। सेना में हवलदार के पद से सेवानिवृत दधिबल एथलीट के कोच रहे हैं। लगातार मास्टर गेम में प्रतिभाग करते हैं। अब तक 60 से ज्यादा पदक जीत चुके हैं। इनमें 23 गोल्ड मेडल हैं।
जगदीप मधोक : 28 साल से निशानेबाजी में हाथ आजमा और पदक जीत रहे
जगदीप मधोक 71 साल की उम्र में निशानेबाजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के पदक जीत रहे हैं। इस साल उत्तराखंड में हुई मास्टर्स निशानेबाजी के एकल और युगल मुकाबले में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता है। वे डबल ट्रैप की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक चुके हैं। अब तक 63 प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। इनमें 34 स्वर्ण और 21 रजत पदक शामिल हैं। कांस्य पदक भी जीते हैं। उन्होंने खेल यात्रा की शुरूआत 1998 में प्रादेशिक निशानेबाजी से किया था। पहले ही मुकाबले में स्वर्ण पदक जीता था। वह निशानेबाजी संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी हैं।
दिनेश जायसावाल : यूपी मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीते तीन स्वर्ण और दो कांस्य पदक
दिनेश जायसवाल ने 68 साल की उम्र में यूपी मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लिया। अब तक तीन स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीत चुके हैं। एक बार राष्ट्रीय मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप भी भाग लिया था लेकिन चौथे पर रहे। राष्ट्रीय शूटिंग में टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है।
रामधनी पटेल : 10 किलो मीटर की दौड़ में रजत पदक जीता
रामधनी पटेल की उम्र 78 साल है। वह स्टीपल चेज खिलाड़ी हैं। 10 किलो मीटर की दौड़ में रजत पदक जीत चुके हैं। यह मुकाबला गोवा में हुआ था। इंफाल में कांस्य पदक जीता था। चंडीगढ़ में 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की दाैड़ में दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया था। आंध्र प्रदेश, बंगलूरू में 10 किलोमीटर में दूसरा, तीसरा स्थान मिला था। मास्टर एथलीट एशिया में तमिलनाडु में भी दमदार प्रदर्शन किया था। वे कहते हैं, खेलने की कोई उम्र नहीं होती है। 2, 5, 10 किलोमीटर और 1500 मीटर की रेस में पदक जीत चुके हैं। प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं लेकिन आज भी नियमिति अभ्यास करते हैं। खेलने के लिए मैदान जाते हैं।
योगेंद्र कुमार जायसवाल : चार घंटे करते हैं वर्कआउट
बैडमिंटन में 75 प्लस आयुवर्ग की चैंपियनशिप जीतने वाले योगेंद्र कुमार जायसवाल ने क्रिकेट का मोह 57 साल पहले यानी 1968 में छोड़ दिया था। तब लगा था कि कॅरिअर खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 1969 में यूपी बैडमिंटन चैंपियनशिप का एकल मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किया। अब नेशनल चैंपियनशिप में जीत हासिल की है। गोवा में नेशनल चैंपियनशिप जीतकर लौटे योगेंद्र कुमार जायसवाल ने बताया कि रोजाना चार घंटे वर्कआउट करते हैं। इस कारण फिट रहते हैं। अब भी बैडमिंटन की शटल कॉक पर अच्छा नियंत्रण रखते हैं।