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Mau News: 6 हजार वाहनों पर सिर्फ एक ट्रैफिक कर्मी, 3 नगर पंचायतों सहित पांच शहरी इलाके में तैनाती ही नहीं
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नगर का फातिमा चौहारे से होकर जाते वाहन। संवाद
मऊ। त्योहारी सीजन शुरू होते ही शहर की सड़कें पैर रखने लायक नहीं बची है और यातायात व्यवस्था संभालने वाला तंत्र पूरी तरह हांफ चुका है। एआरटीओ के रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 3.90 लाख पंजीकृत वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें बाहर से आने वाले वाहनों का कोई हिसाब नहीं है। इतने बड़े वाहन बोझ के मुकाबले जिले में यातायात पुलिस के पास कुल 63 पुलिसकर्मी ( एक निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक, 27 कांस्टेबल, 30 हेड कांस्टेबल) ही तैनात हैं। यानी एक जवान पर करीब 6 हजार 190 वाहनों की निगरानी का जिम्मा है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ये यातायात पुलिसकर्मी केवल मऊ शहर में तैनात किए गए हैं। जबकि मुहम्मदाबाद गोहना, चिरैयाकोट और दोहरीघाट नगर पंचायत जिले की सीमा पर स्थित हैं, वहां यातायात पुलिस की तैनाती नहीं है। घोसी और मधुबन नगर पंचायत में भी यही हाल है। दिवाली और छठ पूजा को लेकर इन जगहों पर रोजाना करीब पंजीकृत सहित बाहर से आने वाले 4 लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही रहती है।
अकेले मऊ शहर में ही दिनभर पंजीकृत सहित बाहरी लेकर लगभग पांच लाख वाहनों का आना जाना होता है। शहर में चकहरी मोड़ से गाजीपुर तिराहा, फातिमा तिराहा होते हुए भीटी तक ही ये सभी जवान सीमित रह जाते हैं। यातायात पुलिसकर्मी बताते हैं कि यह गिनती केवल कागजों तक सीमित है। ऑफिस स्टाफ और वाहन चालकों को निकाल दें, तो करीब एक तिहाई बल फील्ड ड्यूटी से बाहर ही रहता है। यातायात पुलिसकर्मी कहते हैं कि बाजार में पूरी फोर्स जितनी है, उतनी तो केवल एक एंट्री पॉइंट पर चाहिए। वहीं, थाना पुलिस मौके पर रहते हुए भी यातायात व्यवस्था से पल्ला झाड़ लेती है, जिससे हालात और बिगड़ते हैं।
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सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ये यातायात पुलिसकर्मी केवल मऊ शहर में तैनात किए गए हैं। जबकि मुहम्मदाबाद गोहना, चिरैयाकोट और दोहरीघाट नगर पंचायत जिले की सीमा पर स्थित हैं, वहां यातायात पुलिस की तैनाती नहीं है। घोसी और मधुबन नगर पंचायत में भी यही हाल है। दिवाली और छठ पूजा को लेकर इन जगहों पर रोजाना करीब पंजीकृत सहित बाहर से आने वाले 4 लाख से अधिक वाहनों की आवाजाही रहती है।
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अकेले मऊ शहर में ही दिनभर पंजीकृत सहित बाहरी लेकर लगभग पांच लाख वाहनों का आना जाना होता है। शहर में चकहरी मोड़ से गाजीपुर तिराहा, फातिमा तिराहा होते हुए भीटी तक ही ये सभी जवान सीमित रह जाते हैं। यातायात पुलिसकर्मी बताते हैं कि यह गिनती केवल कागजों तक सीमित है। ऑफिस स्टाफ और वाहन चालकों को निकाल दें, तो करीब एक तिहाई बल फील्ड ड्यूटी से बाहर ही रहता है। यातायात पुलिसकर्मी कहते हैं कि बाजार में पूरी फोर्स जितनी है, उतनी तो केवल एक एंट्री पॉइंट पर चाहिए। वहीं, थाना पुलिस मौके पर रहते हुए भी यातायात व्यवस्था से पल्ला झाड़ लेती है, जिससे हालात और बिगड़ते हैं।

नगर का फातिमा चौहारे से होकर जाते वाहन। संवाद
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