राज्यसभा चुनाव: केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का टिकट कटा, रुहेलखंड में बदलेंगे सियासी समीकरण
बदायूं के रहने वाले केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का टिकट कटने के बाद रुहेलखंड में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा के इस फैसले के पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं। इससे यूपी चुनाव से पहले सियासी समीकरण बदल सकते हैं।
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भाजपा की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए आठ प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद सबसे ज्यादा हलचल रुहेलखंड और ब्रज क्षेत्र में है। बदायूं से ताल्लुक रखने वाले लोध समाज के नेता केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का टिकट कटना भी बड़े सियासी उलटफेर का इशारा कर रहा है। बदायूं के स्थानीय विधायकों के लिए भी ये खतरे की घंटी बताई जा रही है। वहीं, धर्मपाल सिंह को टिकट मिलना लोध बिरादरी के बड़े नेताओं के टकराव का नतीजा माना जा रहा है।
बीएल वर्मा बदायूं जिले के बिल्सी विधानसभा क्षेत्र के गांव ज्योरा पारवाला के मूल निवासी हैं। वह 26 नवंबर 2020 को राज्यसभा सदस्य बने और इस समय वह केंद्र में उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण विभाग के राज्यमंत्री हैं। उनका कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है। बीएल वर्मा ऐसे नेता हैं जो सीधे चुनाव लड़कर जीतने के बजाय कभी विधान परिषद तो कभी राज्यसभा के जरिये सत्ता में बने रहे।
कल्याण सिंह के उत्तराधिकारी की जंग में धर्मपाल को मिला मौका
बीएल वर्मा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के करीबियों में शामिल रहे और उनके करीब रहकर सत्ता में चमकते रहे। पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कल्याण सिंह के बेटे एटा के पूर्व सांसद राजवीर सिंह और बीएल वर्मा के बीच खुद को कल्याण सिंह का असली उत्तराधिकारी साबित करने की होड़ रही है।
सूत्र बताते हैं कि दोनों के बीच अरसे से जो खटास है उसकी वजह से भाजपा का परंपरागत लोध राजपूत वोट बैंक न छिटके, इसलिए इसी वर्ग के धर्मपाल सिंह को राज्यसभा भेजने की तैयारी है। धर्मपाल राज्यसभा जाएंगे तो वह पूरे प्रदेश में लोध वोट बैंक को साध सकेंगे। बताया जा रहा है कि एटा में सपा प्रत्याशी से चुनाव हारने वाले राजवीर सिंह को भी इसीलिए राज्यसभा टिकट से दूर रखा गया है।
आंवला में भाजपा दे सकती है राजपूत प्रत्याशी
आंवला लोकसभा व विधानसभा क्षेत्र को क्षत्रिय जाति के प्रभाव वाली सीट माना जाता है। वहां पहले भाजपा के दिवंगत राजवीर सिंह व सपा से सर्वराज सिंह लंबे समय तक सांसद रहे थे। पिछले कई चुनाव से भाजपा वहां लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र कश्यप को प्रत्याशी बना रही थी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले धर्मेंद्र कश्यप के एक जुमले ने उनका खेल बिगाड़ दिया। उन्हें क्षत्रिय व ब्राह्मण समाज के वोटरों की नाराजगी झेलनी पड़ी और सपा के नीरज मौर्य चुनाव जीत गए।
विधानसभा चुनाव में लोध बिरादरी के धर्मपाल सिंह लगातार जीतते आ रहे हैं। बीच में एक बार जरूर आरके शर्मा यहां से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में कामयाब हुए थे। ऐसे में भाजपा अब एक बार फिर अपने परंपरागत क्षत्रिय वोट बैंक को सहेजने के लिहाज से आंवला में किसी कद्दावर राजपूत प्रत्याशी को मैदान में उतार सकती है।
मध्यप्रदेश के प्रयोग का हो सकता है दोहराव
मध्य प्रदेश में भाजपा ने केंद्रीय व राज्य के मंत्रियों को विधानसभा चुनाव में उतारा था। इसके पीछे सोच थी कि बड़े नेताओं को उनके क्षेत्र की किसी सीट से चुनाव लड़ाने से सकारात्मक असर पूरे जिले व मंडल पर होता है। वहीं, संबंधित इलाके की जनता व संबंधित बिरादरी के वोटर भी नेता को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की आस में ज्यादा जोश से लड़ाते हैं। मध्यप्रदेश में यह प्रयोग सफल होने से भाजपा उत्साहित है।
राजनीतिक जानकार भी ये कयास लगा रहे हैं कि बीएल वर्मा को उनके क्षेत्र की किसी सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा सकता है। ऐसे में मौजूदा विधायकों के लिए यह प्रयोग खतरे की घंटी जैसा है। वर्मा जिस उझानी कस्बे में रहते हैं, वह बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में आता है जहां से हरीश शाक्य भाजपा से ही मौजूदा विधायक हैं। उझानी से सटे बदायूं शहर से भाजपा के ही महेश चंद्र गुप्ता विधायक हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने बताया कि नवंबर में मेरा राज्यसभा का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इस बार की सूची में नाम नहीं है तो कोई बात नहीं। मैं भाजपा का अनुशासित सिपाही हूं। मुझे पार्टी जिस काम लायक समझेगी, उस जिम्मेदारी को निभाऊंगा।