हिमाचल: कुल्लू दशहरा की रंगीन संस्कृति ने अमेरिकी पर्यटक को किया आकर्षित, बोले- बेहद खूबसूरत अनुभव
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देश-विदेश से पहुंचे पर्यटक हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति और परंपराओं से रूबरू हो रहे हैं। अमेरिका से आई पर्यटक कैनेडी ने उत्सव में सजे रंग-बिरंगे देवी-देवताओं, विभिन्न संस्कृतियों, बाजारों और पारंपरिक नृत्य की सराहना की।
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की रंगीन संस्कृति और अनूठी देव परंपराएं विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रही हैं। अमेरिका से कुल्लू पहुंची पर्यटक कैनेडी यहां के उत्सवी माहौल, रंग-बिरंगे देवी-देवताओं और विभिन्न संस्कृतियों की झलक देखकर खासी प्रभावित हुई। उन्होंने कुल्लू दशहरा में शामिल होने के अनुभव को बेहद खूबसूरत और आनंददायक बताया। कैनेडी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में विभिन्न रंगों के देवी-देवताओं और अलग-अलग संस्कृतियों को एक साथ देखना बेहद सुंदर अनुभव है। यहां का माहौल रंगों और उत्साह से भरा हुआ है। उन्होंने उत्सव में लगने वाले बाजारों को देखने और पारंपरिक नृत्य का आनंद लेने की भी सलाह दी।
#WATCH | Kullu, Himachal Pradesh | A tourist from America, Kennedy, says, "...We are here at the International Dusshera Festival in Kullu, and there are a lot of colourful deities and a lot of different cultures that are coming here, and it is a really beautiful experience, and come see all of the markets, come see all of the dancing. There's a lot of colourfulness and a lot of fun... It is super fun to participate in and experience."
— ANI (@ANI) October 21, 2026विज्ञापन
रंग-बिरंगे देवी-देवता और सांस्कृतिक विविधता बनी आकर्षण
अमेरिकी पर्यटक के अनुसार, कुल्लू दशहरा में अलग-अलग संस्कृतियों का एक साथ दिखाई देना इसकी खासियत है। उत्सव में सजे देवी-देवता, पारंपरिक वेशभूषा, बाजारों की रौनक और नृत्य-संगीत पर्यटकों को एक अलग अनुभव प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस उत्सव में शामिल होना और यहां की संस्कृति को करीब से अनुभव करना बेहद मजेदार है। कुल्लू दशहरा की जीवंतता और रंगीन माहौल इसे पर्यटकों के लिए खास बनाते हैं।
विदेशी पर्यटकों को भी भा रही देवभूमि की परंपरा
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और देव परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला प्रमुख उत्सव है। इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवता पहुंचते हैं, जबकि सांस्कृतिक गतिविधियां, पारंपरिक नृत्य और बाजार उत्सव की रौनक बढ़ाते हैं। विदेशी पर्यटकों की दिलचस्पी से कुल्लू दशहरा की अंतरराष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विविधता भी सामने आती है। कैनेडी ने पर्यटकों को यहां आने, बाजारों का भ्रमण करने और पारंपरिक नृत्य सहित उत्सव की विभिन्न गतिविधियों का अनुभव लेने के लिए प्रोत्साहित किया।