काम की थकान, ज्यादा शारीरिक मेहनत या फिर वायरल संक्रमण जैसी बीमारियों के कारण शरीर में दर्द होना आम है। आमतौर पर दर्द की समस्या अपने आप या फिर हल्की-फुल्की दवाओं और घरेलू उपायों से ठीक हो जाती है। पर अगर आपको लगातार दर्द की दिक्कत बनी रहती है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। कई बार सामान्य सा लगने वाला दर्द असल में किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
सेहत की बात: बीमारी कहीं और पर दर्द कहीं और, शरीर के इन संकेतों को समझना जरूरी
शरीर में दर्द की जगह और उसकी असली वजह अलग-अलग हो सकती हैं। दिल की समस्या में जबड़े या बांह में, पित्ताशय की परेशानी में पीठ तक और नस दबने पर हाथ-पैर में दर्द फैल सकता है। दर्द के साथ दिखने वाले दूसरे लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।
शरीर में दर्द पर गंभीरता से दें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर में लगातार रहने वाले दर्द पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है।
- दिल से जुड़ी किसी समस्या में सीने के अलावा जबड़े, कंधे, पीठ या बांह में भी दर्द हो सकता है।
- इसी तरह पित्ताशय में पथरी होने पर दर्द पेट के ऊपरी हिस्से से पीठ या दाएं कंधे तक महसूस हो सकता है।
- नसों से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी दर्द उस हिस्से में भी महसूस होता है, जहां समस्या सीधे तौर पर मौजूद नहीं होती। शरीर की नसें अलग-अलग अंगों से मिलने वाले संकेतों को दिमाग तक पहुंचाती हैं यही कारण है कि क्रॉनिक दर्द पर ध्यान देना जरूरी है।
हार्ट समस्या में जबड़े, कंधे या हाथों में दर्द
दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट होने पर दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे सीने में दबाव, जकड़न, भारीपन या दर्द महसूस हो सकता है। दिल से जुड़ा दर्द हमेशा सीने तक सीमित नहीं रहता। कुछ लोगों में यह एक या दोनों हाथों, कंधों, गर्दन या जबड़े तक भी फैल सकता है।
- दिल का दौरा पड़ने के दौरान भी ऐसी दिक्कतें हो सकती हैं।
- अगर जबड़े, बांह या सीने में अचानक दर्द हो और साथ में सांस लेने में परेशानी या बेचैनी हो, तो इसमें तुरंत डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी है।
गॉलब्लैडर स्टोन में होने वाला दर्द
गॉलब्लैडर लिवर के नीचे मौजूद एक छोटी थैली होती है, जिसमें पित्त जमा रहता है। यह पाचन में मदद करता है। जब पित्ताशय में पथरी बन जाती है और पित्त के बहाव में रुकावट हो सकती है। इससे पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में दर्द हो सकता है। कई बार यह दर्द पीठ या दाएं कंधे के नीचे भी महसूस होता है।
- भारी या ज्यादा वसा वाला भोजन करने के बाद ये दिक्कतें ज्यादा महसूस होती हैं।
- अगर दर्द लगातार बना रहे, बुखार आए, उल्टी हो या आंखों और त्वचा में पीलापन दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
नसों के दर्द की समस्या
गर्दन या कमर में मौजूद नसों पर दबाव पड़ने से शरीर के किसी दूसरे हिस्से तक दर्द फैल जाता है।
- कमर की नस दबने पर दर्द कमर से होते हुए पैर तक जा सकता है। इसे आमतौर पर साइटिका से जुड़ा दर्द माना जाता है।
- इसी तरह गर्दन की नस प्रभावित होने पर कंधे, बांह या उंगलियों में दर्द, झनझनाहट और सुन्नपन महसूस हो सकता है।
- अगर हाथ-पैर में कमजोरी बढ़ रही हो, चलने में परेशानी हो या पेशाब-शौच पर नियंत्रण न रह जाए तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर बार दर्द होने का मतलब कोई बीमारी नहीं होतू। इसलिए दर्द के साथ शरीर में होने वाली दूसरी दिक्कतों पर भी ध्यान देना जरूरी है। अचानक और तेज दर्द, सांस फूलने, बेहोशी, तेज बुखार की दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टरी मदद लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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