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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sagar News ›   MP: After Kuno and Gandhisagar, Veerangana Durgavati Tiger Reserve becomes the third home for cheetahs.

एमपी: कूनो-गांधीसागर के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बना चीतों का तीसरा घर, सीएम यादव ने छोड़े दो चीते

Wed, 07 Oct 2026 05:32 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 07 Oct 2026 05:32 PM IST
सार

सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीते छोड़े गए। इसके साथ यह मध्यप्रदेश का तीसरा चीता आवास बना। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गिद्धों की संख्या में 123% वृद्धि, ग्रामीण पर्यटन और होम स्टे को लेकर योजनाएं बताईं।

 

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MP: After Kuno and Gandhisagar, Veerangana Durgavati Tiger Reserve becomes the third home for cheetahs.
सीएम मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सागर स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त किया। इसके साथ ही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन गया है। इससे पहले कूनो और गांधीसागर में चीते मौजूद हैं।

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वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में आयोजित वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने गिद्ध संख्या आकलन-2026 रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में गिद्धों की संख्या में 123 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने इसे वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रभावी प्रयासों की सफलता बताया।

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सीएम यादव क्या बोले?
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बुंदेली बोली में रचित पुस्तक ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’ का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक बुंदेलखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां अभयारण्य हैं और पर्यटक आते हैं, वहां पर्यटन से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इस वर्ष अभयारण्यों से करीब 80 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है, जिसमें से 20 करोड़ रुपये आसपास के ग्रामीणों को वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह ग्रामीणों का हक है, क्योंकि वे वर्षों से अभयारण्यों के आसपास अपने गांव और घरों में रह रहे हैं।


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उन्होंने कहा कि छोटे काश्तकारों के साथ ऐसे बड़े काश्तकार, जिनके पास अधिक भूमि है और जो किसी कारणवश वर्तमान दायरे में लाभ से वंचित रह जाते हैं, उन्हें भी लाभ दिलाने के लिए कैबिनेट में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। किसी को भी लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बफर जोन के गांवों में होम स्टे विकसित किए जा रहे हैं। ग्रामीण अपने घरों में एक, दो या तीन कमरे बनाकर उन्हें पर्यटकों के लिए होम स्टे के रूप में किराए पर दे सकते हैं। ऐसे ग्रामीणों को सरकार की ओर से दो से तीन लाख रुपये तक का अनुदान दिलाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे पर्यटन से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें।

आगे उन्होंने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों की आवश्यकताओं और पर्यटन विकास के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना सरकार का प्रयास है, ताकि अभयारण्य और पर्यटन का लाभ सबसे पहले वहां रहने वाले ग्रामीणों तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूध उत्पादकों के लिए भी नया समय आया है। यह किसान कल्याण वर्ष है, इसलिए समितियों के माध्यम से उत्पादित दूध की उचित कीमत सुनिश्चित कर स्थायी लाभ दिलाने का लक्ष्य है। विशेषकर वन क्षेत्रों में, जहां खेती की जमीन सीमित है, वहां पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश ने बड़ा लक्ष्य तय किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि कूनो और गांधीसागर के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व तीसरा ऐसा घर है, जहां टाइगर की मौजूदगी के साथ चीते भी छोड़े जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में देश में सबसे ज्यादा गिद्ध, टाइगर, कछुआ और घड़ियाल हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की धरती अब चीते के नाम से भी पहचानी जाएगी।

उन्होंने कहा कि करीब 110 से 115 वर्ष पहले मध्यप्रदेश में आखिरी बार चीता देखा गया था। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट शुरू हुआ। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद आज चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है और हाल ही में पांच नए शावकों का आगमन हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती आज वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है। सरकार का संकल्प है कि जंगल भी आबाद रहें और मानव जीवन भी प्रगति करे। यही ‘जियो और जीने दो’ का सच्चा अर्थ है।

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