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जबलपुर: पीजी मेडिकल काउंसलिंग की मेरिट लिस्ट में इन-सर्विस अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी, राज्य सरकार से जवाब तलब

Mon, 02 Nov 2026 09:36 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Mon, 02 Nov 2026 09:36 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में पीजी मेडिकल काउंसलिंग की मेरिट सूची में इन-सर्विस उम्मीदवारों को ओपन कैटेगरी में शामिल करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई। याचिका में 30 प्रतिशत आरक्षण का उल्लंघन बताया गया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और डीएमई से दो दिन में जवाब मांगा तथा इन-सर्विस उम्मीदवारों को आरक्षित सीटों तक सीमित रखने के निर्देश दिए। 

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In-service candidates have been assigned a place in the open category in the PG medical counselling merit list
एमपी हाईकोर्ट

विस्तार

पीजी मेडिकल काउंसिलिंग की प्रथम चरण की मेरिट सूची में इन-सर्विस उम्मीदवारों को खुली श्रेणी में दाखिला दिए जाने के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और संचालक चिकित्सा शिक्षा को नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा है। युगलपीठ ने निर्देश दिए हैं कि इन-सर्विस अभ्यर्थियों को 30 फीसदी आरक्षित सीटों के दायरे में ही प्रवेश दिया जाए।
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यह याचिका भोपाल निवासी जान्हवी बतरा और एस. सिंह की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिए 30 फीसदी सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान है। उन्हें खुली श्रेणी में दाखिला देना अवैध है। इससे खुली श्रेणी के छात्रों के हित प्रभावित होंगे। चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने याचिका पर सुनवाई की। अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित की गई है। संचालक चिकित्सा शिक्षा द्वारा पीजी मेडिकल काउंसिलिंग की प्रथम चरण की मेरिट सूची जारी की जा चुकी है। वर्तमान में अभ्यर्थियों के दस्तावेज का सत्यापन चल रहा है। प्रथम चरण की काउंसिलिंग 10 नवंबर तक निर्धारित है।
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याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने दलील दी। उन्होंने कहा कि इन-सर्विस अभ्यर्थियों को खुली श्रेणी का अभ्यर्थी नहीं माना जा सकता। इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा इन-सर्विस श्रेणी के तहत ही दी है। यदि उन्हें खुली श्रेणी में दाखिला दिया जाता है, तो इन-सर्विस उम्मीदवारों की संख्या निर्धारित 30 फीसदी से अधिक हो जाएगी। यह प्रावधानों का उल्लंघन होगा।

उच्च न्यायालय का निर्देश
उच्च न्यायालय ने याचिका की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि इन-सर्विस अभ्यर्थियों को केवल 30 फीसदी आरक्षित सीटों के दायरे में ही प्रवेश दिया जाए। इस निर्देश से खुली श्रेणी के छात्रों के हितों की रक्षा होगी। राज्य सरकार और संचालक चिकित्सा शिक्षा को इस मामले में दो दिन के भीतर जवाब देना होगा।
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