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झारखंड: जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती रद्द मामले में हाईकोर्ट सख्त, अभ्यर्थियों की शिकायत सुनेंगे सेवानिवृत्त जज
Sat, 19 Sep 2026 07:46 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sat, 19 Sep 2026 07:46 AM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने तथा नियुक्त कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सेवानिवृत्त जज गौतम कुमार चौधरी को एसआईटी जांच का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
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झारखंड हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय ने जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती प्रक्रिया रद्द करने और इसके तहत नियुक्त कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अहम निर्देश दिया है। अदालत ने निर्दोष अभ्यर्थियों को किसी भी तरह के उत्पीड़न या मानसिक दबाव से बचाने के लिए सेवानिवृत्त जज गौतम कुमार चौधरी को विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना की वैधता से जुड़े मामले की सुनवाई की, जिसके तहत पूरी चयन प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी और नियुक्त कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया था। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्तूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे होगी।
अभ्यर्थियों ने उत्पीड़न की आशंका जताई
सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकीलों ने पीठ के सामने शिकायत रखी कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम की ओर से निर्दोष अभ्यर्थियों को भी समन भेजकर परेशान किया जा रहा है। वकीलों ने अभ्यर्थियों पर जांच के दौरान दबाव बनाए जाने की आशंका भी जताई। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि कानूनी प्रावधानों के तहत जांच अधिकारी को पूछताछ के उद्देश्य से किसी भी व्यक्ति को बुलाने का अधिकार है।
समन मिलने पर जांच में सहयोग करने का निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभ्यर्थियों के मन से डर दूर करने और जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए बीच का रास्ता निकाला। हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को निर्देश दिया कि यदि उन्हें जांच के संबंध में समन जारी किया जाता है तो वे जांच में पूरा सहयोग करें।
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एसआईटी जांच की निगरानी करेंगे सेवानिवृत्त जज
अदालत ने सेवानिवृत्त जज गौतम कुमार चौधरी को विशेष जांच टीम की जांच का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। कोर्ट के निर्देश के अनुसार, यदि किसी अभ्यर्थी को जांच के दौरान उत्पीड़न या अनुचित दबाव का सामना करना पड़ता है तो वह सीधे सेवानिवृत्त जज के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
यदि शिकायत सही पाई जाती है तो सेवानिवृत्त जज जांच टीम के प्रमुख को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश देंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यवेक्षक की नियुक्ति से एसआईटी की स्वतंत्र जांच प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। साथ ही, इसे जांच पर किसी तरह की प्रतिकूल टिप्पणी के तौर पर भी नहीं देखा जाएगा।
राज्य सरकार उठाएगी मानदेय और कार्यालय का खर्च
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, सेवानिवृत्त जज गौतम कुमार चौधरी के मानदेय और उनके कार्यालय से जुड़े सभी खर्चों का वहन राज्य सरकार करेगी। इसके अलावा अदालत ने पहले जारी किए गए अपने अंतरिम आदेश को अगली सुनवाई तक प्रभावी रखने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्तूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे होगी। हाईकोर्ट के इस आदेश से भर्ती मामले की जांच के दौरान अभ्यर्थियों को शिकायत और सुरक्षा से जुड़ी एक व्यवस्था मिल गई है।
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अभ्यर्थियों ने उत्पीड़न की आशंका जताई
सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकीलों ने पीठ के सामने शिकायत रखी कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम की ओर से निर्दोष अभ्यर्थियों को भी समन भेजकर परेशान किया जा रहा है। वकीलों ने अभ्यर्थियों पर जांच के दौरान दबाव बनाए जाने की आशंका भी जताई। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि कानूनी प्रावधानों के तहत जांच अधिकारी को पूछताछ के उद्देश्य से किसी भी व्यक्ति को बुलाने का अधिकार है।
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समन मिलने पर जांच में सहयोग करने का निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभ्यर्थियों के मन से डर दूर करने और जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए बीच का रास्ता निकाला। हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को निर्देश दिया कि यदि उन्हें जांच के संबंध में समन जारी किया जाता है तो वे जांच में पूरा सहयोग करें।
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एसआईटी जांच की निगरानी करेंगे सेवानिवृत्त जज
अदालत ने सेवानिवृत्त जज गौतम कुमार चौधरी को विशेष जांच टीम की जांच का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। कोर्ट के निर्देश के अनुसार, यदि किसी अभ्यर्थी को जांच के दौरान उत्पीड़न या अनुचित दबाव का सामना करना पड़ता है तो वह सीधे सेवानिवृत्त जज के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
यदि शिकायत सही पाई जाती है तो सेवानिवृत्त जज जांच टीम के प्रमुख को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश देंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यवेक्षक की नियुक्ति से एसआईटी की स्वतंत्र जांच प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। साथ ही, इसे जांच पर किसी तरह की प्रतिकूल टिप्पणी के तौर पर भी नहीं देखा जाएगा।
राज्य सरकार उठाएगी मानदेय और कार्यालय का खर्च
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, सेवानिवृत्त जज गौतम कुमार चौधरी के मानदेय और उनके कार्यालय से जुड़े सभी खर्चों का वहन राज्य सरकार करेगी। इसके अलावा अदालत ने पहले जारी किए गए अपने अंतरिम आदेश को अगली सुनवाई तक प्रभावी रखने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्तूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे होगी। हाईकोर्ट के इस आदेश से भर्ती मामले की जांच के दौरान अभ्यर्थियों को शिकायत और सुरक्षा से जुड़ी एक व्यवस्था मिल गई है।