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झारखंड: हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं, दुर्गा पूजा के बाद बिना तनख्वाह मनेगी दिवाली?
Thu, 22 Oct 2026 04:28 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Thu, 22 Oct 2026 04:28 PM IST
सार
झारखंड के विभिन्न सरकारी विभागों, जिला और क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। दुर्गा पूजा आर्थिक तंगी में गुजारने के बाद अब कर्मचारियों के सामने दिवाली भी बिना वेतन के मनाने का संकट है।
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झारखंड सीएम हेमंत सोरेन से कर्मचारियों ने की मांग।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड के विभिन्न सरकारी विभागों, जिला और क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। दुर्गा पूजा का त्योहार आर्थिक तंगी में गुजारने के बाद अब कर्मचारियों पर दिवाली भी बिना पारिश्रमिक के मनाने का संकट मंडरा रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए झारखंड राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघ ने मांग की है कि त्योहार से पहले अक्तूबर तक के बकाया वेतन का भुगतान हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
अनुबंध प्रक्रिया में हुई देरी का असर
कर्मचारी संघ के अनुसार, JAP-IT द्वारा सूचीबद्ध एजेंसियों के साथ पूर्ववर्ती अनुबंध जुलाई 2026 में ही समाप्त हो गया था। इसके बाद अनुबंध विस्तार की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
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वहीं, झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल, 2025 के तहत नई संविदा को अंतिम रूप दिए जाने की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। इन प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी का सीधा खमियाजा सरकारी कार्यालयों में लगातार काम कर रहे कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। संघ ने सवाल उठाया है कि जब कर्मचारियों से लगातार काम लिया जा रहा है, तो उनके पारिश्रमिक के भुगतान की समयबद्ध व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
बुनियादी जरूरतों पर मंडराया गंभीर संकट
सरकारी कार्यालयों में कंप्यूटर संचालन, डेटा प्रविष्टि, सरकारी अभिलेखों के संधारण, पत्राचार और अन्य कार्यों में लगे कर्मचारी सीमित मानदेय पर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। तीन माह से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और दूसरी जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है। संघ का कहना है कि अनुबंध संबंधी प्रक्रियाएं लंबित हो सकती हैं, लेकिन कर्मचारियों के घर का खर्च और परिवार की जरूरतें इंतजार नहीं कर सकतीं।
समीक्षा व जवाबदेही तय करने की मांग
संघ ने सरकार से दिवाली से पहले अक्तूबर तक के लंबित वेतन का भुगतान कराने का आग्रह किया है। इसके साथ ही JAP-IT और संबंधित एजेंसियों के बीच अनुबंध विस्तार या नई संविदा की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की गई है।
ये भी पढ़ें- बिहार: आठ सीटों पर एमएलसी चुनाव में कहां, कौन चर्चा में? किन दिग्गजों की प्रतिष्ठा मतपेटी में कल होगी बंद
संघ ने भविष्य में एजेंसी बदलने या अनुबंध समाप्त होने पर भी वेतन बाधित न होने की स्थायी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है। इसके अतिरिक्त वेतन भुगतान में हुई देरी की गहन समीक्षा कर जवाबदेही तय करने की मांग भी मुख्यमंत्री से की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने काम के बदले उचित पारिश्रमिक चाहते हैं।
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इस स्थिति को देखते हुए झारखंड राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघ ने मांग की है कि त्योहार से पहले अक्तूबर तक के बकाया वेतन का भुगतान हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
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अनुबंध प्रक्रिया में हुई देरी का असर
कर्मचारी संघ के अनुसार, JAP-IT द्वारा सूचीबद्ध एजेंसियों के साथ पूर्ववर्ती अनुबंध जुलाई 2026 में ही समाप्त हो गया था। इसके बाद अनुबंध विस्तार की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
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वहीं, झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल, 2025 के तहत नई संविदा को अंतिम रूप दिए जाने की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। इन प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी का सीधा खमियाजा सरकारी कार्यालयों में लगातार काम कर रहे कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। संघ ने सवाल उठाया है कि जब कर्मचारियों से लगातार काम लिया जा रहा है, तो उनके पारिश्रमिक के भुगतान की समयबद्ध व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
बुनियादी जरूरतों पर मंडराया गंभीर संकट
सरकारी कार्यालयों में कंप्यूटर संचालन, डेटा प्रविष्टि, सरकारी अभिलेखों के संधारण, पत्राचार और अन्य कार्यों में लगे कर्मचारी सीमित मानदेय पर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। तीन माह से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और दूसरी जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है। संघ का कहना है कि अनुबंध संबंधी प्रक्रियाएं लंबित हो सकती हैं, लेकिन कर्मचारियों के घर का खर्च और परिवार की जरूरतें इंतजार नहीं कर सकतीं।
समीक्षा व जवाबदेही तय करने की मांग
संघ ने सरकार से दिवाली से पहले अक्तूबर तक के लंबित वेतन का भुगतान कराने का आग्रह किया है। इसके साथ ही JAP-IT और संबंधित एजेंसियों के बीच अनुबंध विस्तार या नई संविदा की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की गई है।
ये भी पढ़ें- बिहार: आठ सीटों पर एमएलसी चुनाव में कहां, कौन चर्चा में? किन दिग्गजों की प्रतिष्ठा मतपेटी में कल होगी बंद
संघ ने भविष्य में एजेंसी बदलने या अनुबंध समाप्त होने पर भी वेतन बाधित न होने की स्थायी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है। इसके अतिरिक्त वेतन भुगतान में हुई देरी की गहन समीक्षा कर जवाबदेही तय करने की मांग भी मुख्यमंत्री से की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने काम के बदले उचित पारिश्रमिक चाहते हैं।