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अमेरिका में पाकिस्तानी को जेल: फर्जी अधिकारी बनकर बुजुर्ग से की थी ठगी, अपराध पर जॉर्जिया अटॉर्नी क्या बोले?

Thu, 08 Oct 2026 01:30 PM IST
अमन मौर्या आईएएनएस, वॉशिंगटन, अमेरिका
आईएएनएस, वॉशिंगटन, अमेरिका Published by: अमन मौर्या Updated Thu, 08 Oct 2026 01:30 PM IST
सार

अमेरिका में खुद को फर्जी एजेंट बता बुजुर्ग से सोना और नकदी ठगने की साजिश में पाकिस्तानी नागरिक जावेद आशिक को 14 साल जेल की सजा सुनाई गई है। सजा के बाद उसे वापस पाकिस्तान भेजा जाएगा।

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us pakistani national sentenced 14 years elderly fraud case fake federal agent
अमेरिका में पाकिस्तानी को 14 साल की जेल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में एक 52 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक को धोखाधड़ी की साजिश में शामिल होने के लिए 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। इस साजिश में आरोपी व्यक्ति ने खुद को फेडरल एजेंट बताकर एक बुजुर्ग से सोना और नकदी ले लिया था। जॉर्जिया के डेकाटुर के रहने वाले जावेद आशिक को वायर फ्रॉड (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धोखाधड़ी) के आरोप में दोषी पाए जाने के बाद 168 महीने (14 साल) की जेल और 886,799.84 डॉलर (8,57,99,214.72 भारतीय रुपए) का हर्जाना भरने का आदेश दिया गया। यह जानकारी बुधवार को जॉर्जिया के दक्षिणी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने दी। अमेरिकी जिला न्यायाधीश डडली एच. बोवेन ने आशिक की जेल की सजा पूरी होने के बाद तीन साल की निगरानी वाली रिहाई का आदेश भी दिया।
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पाकिस्तानी नागरिक पर क्या है आरोप?
संघीय अभियोजकों ने कहा कि सजा पूरी होने के बाद आशिक को देश से वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संघीय जेल प्रणाली में पैरोल का प्रावधान नहीं है। अदालती दस्तावेजों और गवाही के अनुसार, आशिक ने जुलाई और अगस्त 2024 के बीच एक आपराधिक साजिश के लिए कूरियर के तौर पर काम किया। उसने एक बुजुर्ग पीड़ित से सोने की ईंटें और नकदी इकट्ठा की और उन्हें ऑपरेशन से जुड़े अन्य सदस्यों तक पहुंचाया। साजिशकर्ताओं ने पीड़ित को यकीन दिलाया कि उनकी पहचान चोरी हो गई है और उसका इस्तेमाल धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। धोखे को सच जैसा दिखाने के लिए, समूह के सदस्यों ने खुद को 'फेडरल ट्रेड कमीशन' (उपभोक्ता संरक्षण के लिए जिम्मेदार अमेरिकी सरकारी एजेंसी) के संघीय एजेंट के तौर पर पेश किया।
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उन्होंने पीड़ित को क्रिप्टोकरेंसी और सोना खरीदने के लिए राजी किया और दावा किया कि पीड़ित की संपत्ति की सुरक्षा के लिए ये लेनदेन जरूरी हैं। खरीदारी पूरी होने के बाद, आशिक ने संपत्ति इकट्ठा की और उसे अपने साथियों (सह-साजिशकर्ताओं) को सौंप दिया, जिससे पीड़ित के पास न तो पैसे बचे और न ही कीमती सामान। अभियोजकों ने कहा कि इस योजना में पीड़ित के पहचान चोरी होने के डर और संघीय अधिकारियों पर उनके भरोसे का फायदा उठाया गया।

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अमेरिकी अटॉर्नी ने क्या कहा?
अमेरिकी अटॉर्नी मार्गरेट ई. 'मेग' हीप ने कहा कि यह मामला उन तरीकों को उजागर करता है जिनका इस्तेमाल स्कैमर्स बुजुर्गों का फायदा उठाने के लिए करते हैं, जिसमें उन एजेंसियों का रूप धारण करना भी शामिल है जिनका काम उनकी सुरक्षा करना है। एफबीआई ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि कैसे आपराधिक नेटवर्क कमजोर लोगों को निशाना बनाने के लिए धोखे और सरकारी अधिकारी होने का नाटक करने जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
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