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खुलेंगे स्टार्टअप कृषि, एआई विस्तार के द्वार: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के संकट से निपटने की पहल, सहमति पर जोर

Fri, 11 Sep 2026 09:58 AM IST
ज्योति भास्कर अजीत खरे, अमर उजाला, नई दिल्ली/बीजिंग।
अजीत खरे, अमर उजाला, नई दिल्ली/बीजिंग। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 11 Sep 2026 09:58 AM IST
सार

ब्रिक्स देशों की शिखर बैठक की मेजबानी कर रहे भारत के पास अपना सॉफ्ट पावर दिखाने का अवसर है। स्टार्टअप, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विस्तार से जुड़े नए द्वार खुलेंगे। ईरान-अमेरिका जंग और रूस-यूक्रेन टकराव के बीच उपजे वैश्विक आपूर्ति शृंखला के संकट से निपटने के लिए सहमति पर जोर दिया जा रहा है।

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ब्रिक्स में भारत की सॉफ्ट पावर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिमी एशिया संकट और उससे उपजी अस्थिरता के बीच भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनी कूटनीतिक और तकनीकी सॉफ्ट पावर का प्रभावी रूप सामने रखने की तैयारी में है। ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर और अधिक जोर रहेगा। इनमें स्टार्टअप, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए सहयोग के नए द्वार खोले जाएंगे। इसके लिए भारत ने व्यावहारिक तंत्र खड़ा करने के लिए साल भर में संवाद के साथ तैयारी की है।

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इसका सीधा लाभ ब्रिक्स देशों के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण के अन्य देशों को भी मिलेगा। सबसे ज्यादा जोर वैश्विक आपूर्ति शृंखला का किसी भी संकट से निपटने का है। सूत्रों के मुताबिक सम्मेलन के दौरान भारत की ओर से नवाचार फंड बनाने, एक डिजिटल कृषि नेटवर्क बनाने, मानसिक स्वास्थ्य पूर्ति शृंखलाओं को पश्चिमी एशिया जैसे संकट आने पर एक वैकल्पिक ढांचे बनाने व सीमा पार भगोड़े अपराधियों को पकड़ने में प्रभावी उपायों की तलाश जैसे अहम कदम शामिल हैं। अब भारत चाहता है कि इन पर अमल के लिए ब्रिक्स सदस्य साझा तंत्र विकसित करें।
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डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर व तकनीकी साझेदारी पर जोर
भारत की रणनीति अपने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम के सफल अनुभवों को सदस्य देशों के साथ साझा करने की है। इसके तहत सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल हेल्थ सिस्टम और किफायती चिकित्सा समाधानों के भारतीय मॉडल को पेश किया जाएगा। कृषि तकनीक और छोटे किसानों तक नवाचार पहुंचाने के तौर-तरीकों पर जोर होगा। 
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निष्पक्ष कारोबारी माहौल जरूरी: चीन
चीन ने भारत से विदेशी कंपनियों के लिए निष्पक्ष, न्यायसंगत, पारदर्शी और भेदभाव रहित कारोबारी माहौल बनाने के लिए कहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन बृहस्पतिवार को कहा कि चीन-भारत आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पारस्परिक लाभ और साझा हितों वाला है। वह चीनी कंपनी शाओमी के खिलाफ गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (एसएफआईओ) की जांच की खबर पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। हालांकि जियाकुन ने यह भी कहा कि उन्हें शाओमी से जुड़े मामले की जानकारी नहीं है।चीन के विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी उन खबरों पर आई है, जिनमें दावा किया गया था कि एसएफआईओ ने शाओमी के भारतीय कारोबार की विस्तृत जांच की सिफारिश की है।

चीन की ताजा टिप्पणी को भारत में काम कर रही चीनी कंपनियों पर बढ़ी नियामकीय निगरानी के बीच बीजिंग की चिंता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत और चीन संबंधों में आर्थिक गतिविधियों को फिर से गति देने की कोशिश की जा रही है।

इन पर होगा आगे काम
ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड और इन्क्यूबेटर नेटवर्क, एग्रो इकोलॉजी एंड रिजेनरेशन एग्रीकल्चर के तहत सेंटर आफ एक्सीलेंस,ब्रिक्स एग्रो इनपुट जेनेटिक रिसोर्सेज एंड इनफार्मेशन नेटवर्क पर साझा काम होना है। खान-पान, व्यायाम, पारंपरिक खाद्य पद्धतियां और पुरानी बीमारियों की रोकथाम जैसे विषयों पर सहयोग होगा।

ऊर्जा सुरक्षा व समुद्री परिवहन में सहयोग
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों, परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की कमजोरियां उजागर की हैं। भारत ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री परिवहन के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। 

ब्रिक्स...विकास की साझा धुरी: भारत इस समूह का बड़ा रणनीतिकार
वैश्विक कूटनीति के पटल पर जब भी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) की बात होती है, तो ब्रिक्स और भारत का नाम स्वाभाविक रूप से एक साथ आता है। भारत इस समूह का सिर्फ सदस्य भर नहीं रहा, बल्कि वह इसका वैचारिक, आर्थिक और रणनीतिक केंद्र बनकर उभरा है।

  1. रूस और चीन की मौजूदगी के बावजूद भारत ने ब्रिक्स के पश्चिम विरोधी नहीं बनने दिया। भारत संतुलनकारी शक्ति का काम करता है, जिससे यह मंच निष्पक्षता और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बनाए रखता है।
  2. ब्रिक्स समूह की कुल आर्थिक ताकत का एक बड़ा हिस्सा भारत है। आज जब कई बड़े देश धीमी विकास दर, ऋण संकट से जूझ रहे हैं, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है।
  3. भारत ने हमेशा विकासशील और कम आय वाले देशों के हितों की वकालत बिना किसी विस्तारवादी मंशा के की है। कभी किसी छोटे देश पर राजनीतिक शर्तें नहीं थोपीं। न ही उन्हें कर्ज के जाल में फंसाया।
  4. भारत के प्रस्ताव पर 2014-15 में ब्रिक्स का न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) ने आकार लिया। आज यह बैंक विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे के निर्माण में वित्तीय मदद दे रहा है।
  5. 140 करोड़ से अधिक की आबादी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे यूपीआई, आधार) में भारत की महारत अन्य देशों के लिए बड़ा आकर्षण है।

ब्रिक्स से भारतीयों को होते हैं कई लाभ

  • भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ब्रिक्स देशों से रियायती दरों पर ईंधन मिलता है, जिससे रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती है।
  • ब्रिक्स के जरिये निर्बाध उर्वरक आपूर्ति मिलने से किसानों को उचित दर पर खाद मिलता है।
  • भारत दुनिया की फार्मेसी कहलाता है। ब्रिक्स समझौतों के तहत भारतीय फार्मा कंपनियों को सदस्य देशों में निर्यात के लिए आसान मंजूरी मिलती है।
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