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दिनेश दरियानुमल ठक्कर: 'आजाद परिंदा’ बनने की चाह में शेयर बाजार की राह चुनी, 711 करोड़ में जुहू टावर सौदा किया
Mon, 28 Sep 2026 09:40 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क।
अमर उजाला नेटवर्क।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 28 Sep 2026 09:40 AM IST
सार
करोड़ों की जायदाद के मालिक दिनेश दरियानुमल ठक्कर चर्चा में हैं। मुंबई में स्थित करीब 711 करोड़ रुपये के जुहू टावर सौदे के बाद दिनेश सुर्खियों में आए। इसे भारत के सबसे बड़े निजी आवासीय सौदों में से एक माना जा रहा है।
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711 करोड़ की डील के बाद चर्चा में दिनेश दरियानुमल ठक्कर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट-ग्राफिक्स
विस्तार
पोर्श और लेम्बोर्गिनी जैसी एक दर्जन से अधिक दुर्लभ कारों के मालिक हैं। पारिवारिक कारोबार से अलग हटकर ‘आजाद परिंदा’ बनने की चाह में शेयर बाजार की राह चुनी। 1996 में छोटी-सी ब्रोकिंग फर्म से शुरुआत करने और वर्षों तक किराये के मकान में रहने वाले एंजेल वन के संस्थापक दिनेश ठक्कर आज करीब 711 करोड़ रुपये के जुहू टावर सौदे को लेकर सुर्खियों में हैं।
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साल 1992। जगह थी मुंबई। दलाल स्ट्रीट में भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा भूचाल आया हुआ था, जिसे दुनिया ने हर्षद मेहता घोटाला कहा। इसी तूफान में मुलुंड के एक युवा कारोबारी का भी काफी कुछ दांव पर लगा था। उसने दोस्तों और जान-पहचान वालों से करीब ढाई लाख रुपये जुटाकर बाजार में पैसा लगाया था। हजारों निवेशकों की तरह उसकी भी जमा-पूंजी डूब गई थी। अब वह पूरी तरह से कर्ज में डूब चुका था। पर, उसने हार नहीं मानी।
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वह एक-एक कर अपने हर लेनदार के पास गया और उनके पूरे पैसे लौटाने का वादा किया। फिर, उसने शेयर बाजार को नए सिरे से समझा, रात-दिन मेहनत की। वक्त बदला। उसने पाई-पाई जोड़कर सबका कर्ज पूरी ईमानदारी से चुकाया और 1996 में एक छोटी-सी फर्म की नींव रखी-एंजेल ब्रोकिंग। दिलचस्प बात यह है कि उस वक्त लोग अपनी कमाई से घर-गाड़ी खरीद रहे थे, लेकिन अपनी खुद की कंपनी होने के बावजूद वह युवक वर्षों तक किराये के मकान में ही रहा। वह अपने पैसों का इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने में करना चाहता था। और, आज करीब तीन दशक बाद उसने एक ऐसा सौदा किया है, जिसे भारत में किसी एक व्यक्ति द्वारा निजी आवास के लिए किए गए अब तक के सबसे बड़े सौदों में से एक माना जा रहा है।
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हम बात कर रहे हैं एंजेल वन के संस्थापक, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश दरियानुमल ठक्कर की। इन दिनों वह मुंबई में स्थित करीब 711 करोड़ रुपये के जुहू टावर सौदे को लेकर चर्चा में हैं। इस घर का नाम एंजेलस रखा गया है।
पान की दुकान से शुरू हुआ सफर
दिनेश ठक्कर का जन्म दो फरवरी, 1962 को मुंबई, महाराष्ट्र में एक मध्यमवर्गीय कारोबारी परिवार में हुआ था। उनके पिता दरियानुमल ठक्कर कपड़ा कारोबार से जुड़े थे। इस वजह से दिनेश को बचपन से ही व्यापार का माहौल मिला। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई ठाणे के सेंट जॉन द बैपटिस्ट हाईस्कूल से की। 12वीं के बाद उन्होंने मुंबई के किशिनचंद चेलाराम कॉलेज (केसी कॉलेज) में विज्ञान विषय में दाखिला लिया। हालांकि, उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की और बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने परिवार के कारोबार में काम करना तो शुरू किया, लेकिन वह एक 'आजाद परिंदा' बनना चाहते थे। यही कारण है कि कंपनी खास रुचि के चलते उन्होंने शेयर बाजार की ओर कदम बढ़ाया। उनकी यात्रा की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई और उन्हें पहले दो ग्राहक एक पान की दुकान पर मिले थे।
सुपरकार्स और ट्रैक ड्राइविंग का शौक
दिनेश ठक्कर ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग और सुपरकार्स के बड़े शौकीन हैं। उनके गैराज में मैकलारेन 750एस स्पाइडर, फेरारी 488 पिस्ता, लेम्बोर्गिनी हुराकैन परफॉर्मेंट, और पोर्श 911 जीटी3 आरएस जैसी एक दर्जन से अधिक बेहद दुर्लभ स्पोर्ट्स कारें शामिल हैं। वह इन गाड़ियों को ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसे रेसिंग ट्रैक पर खुद ड्राइव करने और अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोटिव इवेंट्स में शामिल होने का शौक रखते हैं। हालांकि, उनकी पहली कार ‘प्रीमियर पद्मिनी’ थी। लेह-लद्दाख की पहाड़ी सड़कें और खारदुंग ला (पास) उनके पसंदीदा रास्तों में शामिल हंै। हालांकि, कैलिफोर्निया के योजमाइट की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच की ड्राइव उनकी अब तक की पसंदीदा है। रविवार की सुबह वह अपनी लाल मर्सिडीज से मरीन ड्राइव की सैर करना भी पसंद करते हैं। वह अपनी कारों को बेचने के बारे में सोचते तक नहीं। बाजार के उतार-चढ़ाव में तेजी से फैसले लेने और ट्रैक पर रफ्तार साधने के कारण कई लोग उन्हें 'दलाल स्ट्रीट का रेसर' भी कहते हैं।
धर्मशाला का मोमोज और सिडनी हार्बर
दिनेश ठक्कर अपने दिन की शुरुआत संगीत सुनने और मेडिटेशन से करते हैं। उन्हें परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना तथा साथ में फिल्में देखना पसंद है। व्यापार, तकनीक और लीडरशिप से जुड़ी किताबें पढ़ने में उनकी खास रुचि है। वह शेयर बाजार, कंपनियों की सालाना रिपोर्ट और आंकड़ों को पढ़ने में भी काफी समय बिताते हैं। स्ट्रीट फूड में धर्मशाला के एक मठ के बाहर मिलने वाले मोमोज उन्हें बेहद पसंद हैं। वह मकाऊ में बंजी जंपिंग भी कर चुके हैं और सिडनी हार्बर व स्विस आल्प्स जैसी जगहों पर जाना पसंद करते हैं। वियना का ‘कोर्सो डेल ओपेरा’ उनका पसंदीदा रेस्तरां है, जहां उन्होंने पत्नी कांता ठक्कर के साथ अपनी सगाई का जश्न मनाया था। उनके दो बेटे विजय ठक्कर और विनय ठक्कर हैं।
फेलियर क्लब की शुरुआत
2001 के आसपास दिनेश ठक्कर ने इंटरनेट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में बड़ा निवेश किया था, लेकिन डॉट-कॉम बबल फूटने पर उनकी लगभग 80 फीसदी पूंजी डूब गई। इस असफलता को छिपाने के बजाय उन्होंने एंजेल वन में एक ‘फेलियर क्लब’ बनाया। इस क्लब में वह कर्मचारियों के साथ असफल प्रोजेक्ट्स और उनसे मिली सीख पर खुलकर चर्चा करते हैं। 360 वन वेल्थ क्रिएटर्स लिस्ट के अनुसार, दिनेश ठक्कर की अनुमानित नेटवर्थ करीब 3,948 करोड़ रुपये है।