{"_id":"6a9e4ed3d8274bb65201f065","slug":"some-things-meant-to-be-let-go-overlooking-them-is-not-a-sign-of-weakness-but-of-mental-maturity-2026-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन धारा: कुछ बातें जाने देने के लिए होती हैं, अनदेखी कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक परिपक्वता; सही दृष्टि अपनाएं","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
जीवन धारा: कुछ बातें जाने देने के लिए होती हैं, अनदेखी कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक परिपक्वता; सही दृष्टि अपनाएं
Mon, 07 Sep 2026 11:12 AM IST
ज्योति भास्कर
रिचर्ड कार्लसन
रिचर्ड कार्लसन
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:12 AM IST
सार
अपनी ऊर्जा उन लोगों, कार्यों और सपनों के लिए बचाइए, जो वास्तव में आपके जीवन को अर्थ देते हैं। छोटी बातों की अनदेखी करना कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक परिपक्वता है।
विज्ञापन
हर बात प्रतिक्रिया नहीं मांगती (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मनुष्य के जीवन में बड़ी परेशानियां जितनी पीड़ा नहीं देतीं, कई बार छोटी-छोटी बातें उससे कहीं अधिक बेचैन कर देती हैं। किसी ने हमारी उम्मीद के अनुसार व्यवहार नहीं किया, काम में छोटी-सी गलती हो गई या किसी ने हमारी आलोचना कर दी। घटनाएं छोटी होती हैं, लेकिन हम उन्हें अपने मन में इतना बड़ा बना लेते हैं कि पूरा दिन खराब हो जाता है। जीवन को शांत और सुखी बनाने के लिए यह समझना जरूरी है कि हर बात प्रतिक्रिया नहीं मांगती है। कुछ बातें केवल गुजर जाने के लिए होती हैं।
विज्ञापन
हम चाहते हैं कि काम बिना गलती के पूरा हो, मौसम हमारे अनुकूल रहे और योजनाओं में कोई बाधा न आए। लेकिन जीवन किसी व्यक्ति की सुविधा के अनुसार नहीं चलता। उसमें देरी होगी, गलती होगी, असहमति होगी, निराशा होगी और कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां भी आएंगी, जिन्हें हम बदल नहीं सकते। बुद्धिमानी यह नहीं कि जीवन से हर परेशानी समाप्त कर दी जाए। बुद्धिमानी यह है कि हम तय करना सीखें कि किस परेशानी को अपने मन में कितना स्थान देना है।
विज्ञापन
एक छोटी-सी बात को बड़ी समस्या बनने से रोकने का सबसे सरल तरीका है कुछ क्षण रुकना। तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय स्वयं से पूछना चाहिए कि क्या यह बात एक महीने बाद भी मेरे लिए महत्वपूर्ण होगी? यदि उत्तर नहीं है, तो शायद इसे आज अपने मन की शांति छीनने देने का भी कोई कारण नहीं है। हर बहस जीतना आवश्यक नहीं है। हर गलती को लेकर स्वयं को दोषी ठहराना भी आवश्यक नहीं है। कभी-कभी शांति पाने के लिए सही होने से अधिक महत्वपूर्ण शांत रहना होता है। जब हम हर बात को व्यक्तिगत लेना बंद करते हैं, तब जीवन हल्का महसूस होने लगता है।
विज्ञापन
हम समझने लगते हैं कि दूसरे लोगों का व्यवहार हमेशा हमारे बारे में नहीं होता। कई बार लोग स्वयं अपनी परेशानियों, असुरक्षाओं और तनावों से जूझ रहे होते हैं। जीवन बहुत छोटा है। इसे उन बातों पर खर्च करना समझदारी नहीं है, जिन्हें कुछ समय बाद हम स्वयं महत्वहीन समझेंगे। अपनी ऊर्जा उन लोगों, कार्यों और सपनों के लिए बचाइए, जो वास्तव में आपके जीवन को अर्थ देते हैं। छोटी बातों को जाने देना कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक परिपक्वता है।
जब आप हर छोटी परेशानी को अपने भीतर जगह देने से इन्कार कर देते हैं, तब धीरे-धीरे आपको एहसास होता है कि शांति किसी बाहरी परिस्थिति का उपहार नहीं है। शांति एक चुनाव है। और हर दिन हमारे सामने यह चुनाव होता है कि हम छोटी-छोटी बातों को अपने ऊपर हावी होने दें या मुस्कुराकर उन्हें जाने दें। अंततः सुखी जीवन का अर्थ यह नहीं कि जीवन में परेशानियां नहीं होंगी। इसका अर्थ यह है कि परेशानियां आपके भीतर कितनी देर तक रहेंगी, इसका निर्णय आप स्वयं करना सीख जाएं। -डोंट स्वेट द स्मॉल स्टफ के अनूदित अंश
सूत्र: सही दृष्टि अपनाएं
जीवन में हर छोटी बात को अपने मन पर हावी होने देना स्वयं को अनावश्यक पीड़ा देना है। हर बहस जीतना और हर गलती पर परेशान होना जरूरी नहीं। कुछ बातों को जाने देना ही सच्ची समझदारी है। अपनी ऊर्जा उन चीजों पर लगाइए, जो वास्तव में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सच्ची खुशी समस्याओं के खत्म होने में नहीं, बल्कि उन्हें सही दृष्टि से देखने में है।