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जीवन धारा: यात्रा जीवन की जड़ता को तोड़ती है

Wed, 09 Sep 2026 07:24 AM IST
निर्मल कांत एलेन द बॉटन
एलेन द बॉटन Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 09 Sep 2026 07:24 AM IST
सार

यात्रा आदतों को कुछ समय के लिए निष्िक्रय कर देती है और दुनिया को नई दृष्टि से देखने का मौका देती है। यात्रा का असली आनंद जगह की सुंदरता में नहीं, बल्कि उसे देखने की दृष्टि में है।

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jeevan dhara travel breaks the monotony of life
जीवन धारा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार
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हम यात्रा पर यह सोच कर निकलते हैं कि नई जगह देखने जा रहे हैं। हमारे लिए यात्रा का मतलब एक शहर से दूसरे शहर पहुंचना, पहाड़ देखना, समुद्र किनारे बैठना या अनजाने रास्तों पर चलना होता है। लेकिन, यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बाहर नहीं, भीतर घटित होता है। हम घर से निकलते समय अपने भीतर के जिस मनुष्य के साथ निकलते हैं, लौटते समय जरूरी नहीं कि वही मनुष्य हमारे भीतर बचा रहे। क्योंकि, यात्रा हमें नए-नए नजारे ही नहीं दिखाती, वह हमें यह भी देखने का मौका देती है कि हम अपने पुराने जीवन को किस नजर से देखते आ रहे थे। घर में रहते हुए हमारा संसार धीरे-धीरे छोटा और परिचित होता चला जाता है। हमें पता होता है कि कौन-सी सड़क लेनी है, किस व्यक्ति से क्या बात करनी है। यह परिचित जीवन सुविधाजनक तो होता है, लेकिन उसकी एक भारी कीमत भी हमें चुकानी पड़ती है और वह यह कि हम चीजों को देखना बंद कर देते हैं। जिस खिड़की से हम वर्षों से बाहर देखते हैं, फिर वह धीरे-धीरे केवल खिड़की ही रह जाती है। यात्रा इसी जड़ता को तोड़ती है।
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जब हम ऐसी जगह पहुंचते हैं, जहां लोग और रास्ते अनजान होते हैं, भाषा और खानपान से लेकर घरों की बनावट व मौसम तक अलग लगने लगता है, तब हमारा मन फिर से देखना शुरू करता है। यहीं से असली यात्रा शुरू होती है। हम दुनिया को अपनी आदतों से देखते हैं। यात्रा हमारी आदतों को कुछ समय के लिए निष्क्रिय कर देती है और हमें दुनिया को नई दृष्टि से देखने का मौका देती है। यात्रा हमें सिखाती है कि दुनिया हमारी सुविधा के लिए नहीं बनी है। घर से बाहर निकलते ही हमारी योजनाएं टूट सकती हैं। मौसम बदल सकता है, भाषा समझने में दिक्कत आ सकती है। पर, यही छोटी-छोटी अड़चनें यात्रा का हिस्सा हैं। जीवन भी ऐसा ही है। हम जीवन को नियंत्रित करना चाहते हैं, जबकि जीवन लगातार हमारी योजनाओं के बाहर घटित होता रहता है। कभी-कभी सबसे सुंदर अनुभव वही होता है, जिसकी योजना हमने बनाई ही नहीं थी। यात्रा मनुष्य को इस सच्चाई से भी रूबरू कराती है कि स्थान बदलना और जीवन बदलना एक ही बात नहीं है। यदि हम वर्तमान में रहना नहीं जानते, तो दुनिया का सबसे सुंदर नजारा भी हमारे लिए केवल एक तस्वीर बन कर रह जाएगा। इसलिए, यात्रा का असली आनंद किसी जगह की सुंदरता में नहीं, बल्कि उसे देखने की हमारी दृष्टि में है। यात्रा हमें वर्तमान की ओर वापस लाती है। किसी यात्रा से लौटने के बाद हमारा अपना घर भी कुछ समय के लिए नया-सा लगने लगता है। अच्छी यात्रा हमारे पूर्वाग्रहों को चुनौती देती है, जिज्ञासा को जगाती है और हमें यह स्वीकार करना सिखाती है कि जीवन को देखने का हमारा तरीका ही एकमात्र तरीका नहीं है। यात्रा का अर्थ दूर जाना नहीं है, बल्कि वापस लौटकर अपने परिचित जीवन को अपरिचित आंखों से देख पाना है।
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सूत्र: अपने दायरे से बाहर निकलें
यात्रा केवल नई जगहों को देखने का नाम नहीं, बल्कि स्वयं को नई दृष्टि से देखने का अवसर है। जब हम परिचित दुनिया से बाहर निकलते हैं, तो हमारी आदतें, पूर्वाग्रह और सीमाएं पीछे छूटने लगती हैं। अनजाने रास्ते हमें सिखाते हैं कि हर चीज हमारे नियंत्रण में नहीं होती। यदि हम वर्तमान में रहना नहीं सीखते, तो नई जगह भी पुरानी ही लगेगी। 
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