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'पुरानी नीति से होगी धान खरीदी': मंत्री रामविचार ने कहा- 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक बोनस देने पर अभी निर्णय नहीं

Wed, 28 Oct 2026 07:11 PM IST
Lalit Kumar Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Wed, 28 Oct 2026 07:11 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ में किसानों के 21 क्विंटल कम धान उत्पादन होने पर भी अंतर की राशि (बोनस) प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक देने के मामले में राज्य सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पुरानी नीति के तहत ही होगी। इसमें किसी भी तरह का कोई नीतिगत बदलाव नहीं हुआ है।

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Paddy procurement to follow old policy said Minister Ramvichar netam
प्रेस कॉन्फ्रेंस लेते कृषि मंत्री रामविचार नेताम - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

छत्तीसगढ़ में किसानों के 21 क्विंटल कम धान उत्पादन होने पर भी अंतर की राशि (बोनस) प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक देने के मामले में राज्य सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पुरानी नीति के तहत ही होगी। इसमें किसी भी तरह का कोई नीतिगत बदलाव नहीं हुआ है। फिलहाल, खरीदी जिस तरह से हो रही थी, उसी के हिसाब से होगी। ये बातें कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बीजेपी जिला कार्यालय रायपुर में कहीं। 
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उन्होंने कहा कि कम उत्पादन होने या प्रति एकड़ 21 क्विंटल कम बेचने पर किसानों को 21 क्विंटल का बोनस देने का कोई निर्णय सरकार ने नहीं लिया है। इस मामले में सरकार मंथन कर रही है। यह अभी प्रकिया में है। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर 15 नवंबर से धान खरीदी होगी। सरकार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3 हजार 100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदेगी। किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदी की जायेगी। ऐसे में किसानों को धान बेचने में कोई परेशानी न हो इसके लिये पूरे प्रदेश में व्यापक तैयारियां की गई हैं। इस बार धान खरीदी तकनीकी बेस पर होगी। यानि नए उपार्जन केंद्रों, ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल क्रॉप सर्वे, क्यूआर कोड बेस्ड ट्रेसिबिलिटी-इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिये धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रहेगी।
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3100 उपार्जन केंद्रों पर होगी खरीदी
इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कुल 3100 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी। सभी खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं तय करने के निर्देश दिए गए हैं। धान खरीदी के लिए आवश्यकतानुसार नए एवं पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। 
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‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ से होगी मॉनिटरिंग
प्रदेश में धान के अवैध परिवहन, पुनर्चक्रण और खरीदी में धांधली को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया गया है। इसके लिए ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ बढ़ाये जायेंगे। इसके माध्यम से धान खरीदी से संबंधित गतिविधियों की प्रभावी तरीके से मॉनिटरिंग की जाएगी। 



273 चेक पोस्ट और 131 सीमावर्ती उपार्जन केंद्र 
पड़ोसी राज्यों यानि यूपी, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र,तेंलगाना, आंध्र प्रदेश आदि से खरीदी केंद्रों में अवैध रूप से धान बिक्री पर लगाम लगाने के लिए जिला स्तर पर विशेष जांच दल बनाये गये हैं। इसके लिए प्रदेश में 273 चेक पोस्ट और 131 सीमावर्ती उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में मिले शिकायतों की समाधान के लिये भी समय-सीमा तय की गई है। इसमें अति संवेदनशील केंद्रों से संबंधित शिकायतों का निराकरण 24 घंटे के अंदर होगा। वहीं संवेदनशील केंद्रों की शिकायतों का हल 48 घंटे और सामान्य केंद्रों की शिकायतों का निदान 72 घंटे के भीतर होगा। 



क्यूआर कोड और लोकेशन ट्रैकिंग से निगरानी
धान खरीदी केंद्र झींट के प्रभारी मोनू साहू ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में चावल की हर बोरी पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनिंग एवं ट्रेसिबिलिटी की जायेगी। इससे हर बारदाने के परिवहन की निगरानी हो सकेगी। इससे चावल के पुनर्चक्रण पर कंट्रोल किया जा सकेगा। इसके साथ ही धान का उठाव लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइसयुक्त वाहनों से कराये जायेंगे। इससे धान के परिवहन की सही निगरानी हो सकेगी। 


'तुंहर टोकन' एप से घर बैठे मिलेगा टोकन
सबसे बड़ी और खास बात यह है कि किसानों को धान बेचने के लिये धान संग्रहण केंद्रों  में जाकर लाइन लगाने की जरूरत नहीं है। इसके लिये खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से 'तुंहर टोकन' मोबाइल एप से टोकन लेकर धान बेच सकते हैं। किसान अपनी सुविधानुसार घर बैठे धान विक्रय के लिए टोकन ले सकते हैं। यह एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इसके माध्यम से किसान 24×7 ऑनलाइन टोकन ले सकते हैं। इसके लिये किसान एप पर सबसे पहले ओटीपी बेस्ड पंजीयन कर सकते हैं। प्रत्येक समिति के लिए निर्धारित प्रतिदिन की खरीदी सीमा में से 70 प्रतिशत टोकन ‘तुंहर टोकन’ एप के माध्यम से और बाकि 30 प्रतिशत टोकन समिति स्तर से जारी किए जाएंगे। इससे किसानों को टोकन लेने के लिये समितियों में लंबी लाइन नहीं लगानी पड़ेगी।



रकबे के हिसाब से मिलेंगे टोकन
उन्होंने बताया कि एप के माध्यम से उपलब्ध 70 प्रतिशत टोकन में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी लघु एवं सीमांत किसानों, 20 प्रतिशत बड़े किसानों के लिए तय की गई है। इसमें दो एकड़ तक के किसानों को एक टोकन, दो एकड़ से ज्यादा और 10 एकड़ तक के किसानों को दो टोकन और 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसानों को तीन टोकन दिये जाएंगे। 
 
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