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टाटा समूह की जेएलआर को झटका: ब्रिटेन सरकार का बेलआउट देने से साफ इनकार, 4,000 लोगों की नौकरी पर संकट

Mon, 07 Sep 2026 01:48 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 07 Sep 2026 01:48 PM IST
सार

टाटा मोटर्स की जेएलआर को यूके सरकार ने बड़ा झटका दिया है। कंपनी पुनर्गठन के बीच कंपनी वैश्विक स्तर पर 4,000 नौकरियों की छंटनी करेगी। पूरी खबर पढ़ें और जानें इसका असर।

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UK Rejects JLR Bailout: Tata-Owned Carmaker to Slash 4,000 Jobs Globally Amid Rising Costs
जेएलआर में छंटनी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) को बड़ा झटका लगा है। ब्रिटिश सरकार ने इसे वित्तीय मदद (बेलआउट) देने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं दूसरी ओर  कंपनी ने बढ़ते खर्चों, कमजोर बिक्री, टैरिफ और चीनी प्रतिस्पर्धा के बीच जेएलआर ने अगले दो वर्षों में लगभग 4,000 नौकरियां (कार्यबल का 10%) घटाने की बात कही है। यह निर्णय कंपनी की व्यापक लागत बचत योजना का हिस्सा है। अब ब्रिटिश सरकार की ओर से बेलआउट खारिज किए जाने के कदम ने वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार और भारतीय निवेशकों को चौंका दिया है।

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जगुआर लैंड रोवर, जो टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड की सहायक कंपनी है। कंपनी ने सोमवार को छंटनी की जानकारी दी है। कंपनी ने अगले दो वर्षों में लगभग 1.7 अरब पाउंड की बचत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस बचत का मुख्य उद्देश्य अपने ब्रेक-ईवन स्तर को कम करना है। कंपनी का लक्ष्य इसे 300,000 यूनिट तक लाना है। यह कदम परिचालन दक्षता बढ़ाने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।
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वर्तमान में जगुआर लैंड रोवर में वैश्विक स्तर पर 43,000 लोग कार्यरत हैं। यह कटौती कंपनी के पुनर्गठन प्रयासों का एक हिस्सा है। प्रबंधन का मानना है कि इससे कंपनी की दीर्घकालिक लाभप्रदता बढ़ेगी। वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में चुनौतियों के बीच यह निर्णय लिया गया है।

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ब्रिटिश सरकार ने जेएलआर को बेलआउट देने से क्यों मना किया?

ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने स्पष्ट किया कि सरकार जेएलआर के पुनर्गठन में हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैं व्यवसाय नहीं चलाता। उन्हें स्वयं तय करना होगा कि उनके लिए भविष्य का सही खाका क्या है।" रेनॉल्ड्स के अनुसार, जेएलआर जैसी बड़ी ब्रिटिश कंपनी के जीवन चक्र में कर्मचारियों की संख्या बदलना स्वाभाविक है। सरकार नौकरियों के नुकसान को कम करने पर बातचीत करेगी, लेकिन इस व्यावसायिक पुनर्गठन को रोकने के लिए कोई वित्तीय मदद नहीं देगी।

जेएलआर इस छंटनी और पुनर्गठन के जरिए क्या हासिल करना चाहती है?

जेएलआर अपनी व्यावसायिक संरचना में निम्नलिखित बड़े बदलाव कर रही है:

  • वित्तीय बचत: कंपनी का लक्ष्य दो वर्षों में लगभग 1.7 बिलियन पाउंड (लगभग 2.3 अरब डॉलर) की भारी बचत करना है।
  • ब्रेक इवन प्वाइंट: कंपनी ब्रेक-इवन पॉइंट को घटाकर 300,000 वाहनों के स्तर पर लाना चाहती है।
  • स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति: पुनर्गठन के हिस्से के रूप में एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति कार्यक्रम शुरू हुआ है।
  • कमजोर वित्तीय प्रदर्शन: हालिया तिमाही में राजस्व करीब 10% गिरा है, जबकि टैक्स से पहले का मुनाफा 69% की भारी गिरावट के साथ केवल £109 मिलियन रह गया है।

वैश्विक बाजार और चीनी ईवी से जेएलआर को क्या चुनौतियां मिल रही हैं?

जेएलआर को मुख्य रूप से इन मोर्चों पर भीषण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:

  • चीनी कंपनियों से टक्कर: बीवाईडी और चेरी जैसी चीनी कंपनियां कम कीमत वाले हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों से यूरोपीय बाजारों में तेजी से पैर पसार रही हैं।
  • महंगी प्रीमियम ईवी: जेएलआर ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक रेंज रोवर को 154,070 पाउंड में पेश किया है, जो इसके पारंपरिक पेट्रोल संस्करण से लगभग 50,000 पाउंड महंगी है। इस भारी कीमत के चलते चीनी सस्ते विकल्पों के सामने टिकना मुश्किल हो रहा है।
  • परिचालन बाधाएं: हाल के वर्षों में एक सप्लायर के यहां आई बाढ़, अमेरिकी टैरिफ और एक वैश्विक साइबर हमले ने कंपनी की पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।

भविष्य के लिए जेएलआर का क्या प्लान है?

घरेलू कटौती के बीच जेएलआर अपने सबसे बड़े बाजार, अमेरिका में बड़े विस्तार की योजना बना रही है। इसके तहत कंपनी ने मई में स्टेलंटिस के साथ अमेरिका में संयुक्त रूप से वाहनों को विकसित करने का एक समझौता किया है। इससे भविष्य में जेएलआर को अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं तक पहुंच मिल सकेगी। इस रणनीति के जरिए जेएलआर वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को फिर से बहाल करने की कोशिश कर रही है।

क्या संकट से उबर पाएगी जेएलआर?

जेएलआर का यह संकट अकेला नहीं है। हाल ही में जर्मनी की दिग्गज वाहन निर्माता वोक्सवैगन ने भी 50,000 नौकरियों की कटौती की योजना को मंजूरी दी है। बेलआउट से इनकार और 4,000 नौकरियों की छंटनी की योजना स्पष्ट करती है कि वैश्विक ऑटोमोबाइल क्षेत्र इस समय एक बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। अमेरिका में विस्तार और प्रीमियम ईवी की नई रणनीति इस लक्जरी ब्रांड को किस हद तक पुनर्जीवित कर पाती है, इस पर निवेशकों की पैनी नजरें रहेंगी।

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