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कमोडिटी: 267 दिन में चांदी 54 फीसदी से ज्यादा हुई सस्ती, जानिए क्या है बाजार में उतार-चढ़ाव का कारण

Sat, 24 Oct 2026 02:16 PM IST
द बोनस अभिषेक श्रीवास्तव , द बोनस, नई दिल्ली
अभिषेक श्रीवास्तव , द बोनस, नई दिल्ली Published by: द बोनस Updated Sat, 24 Oct 2026 02:16 PM IST
सार

  • 4,20,048 रुपये प्रति किग्रा का ऑल-टाइम हाई स्तर 29 जनवरी को छुआ था चांदी ने एमसीएक्स पर  
  • 1,92,800 रुपये प्रति किग्रा का निचता स्तर बनाया चांदी ने एमसीएक्स पर 23 अक्टूबर को 

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Commodity Market Analysis Silver becomes cheaper 54 percent in 267 day, Know the reason for this slide
सोने-चांदी का भाव - फोटो : amarujala.com

विस्तार

साल 2026 कमोडिटी बाजार के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। खासकर गरीब का सोना कही जाने वाली चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया है। भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका-ईरान संघर्ष और कच्चे तेल के तेवरों के कारण चांदी की कीमतों में भारी सुस्ती देखने को मिली है।
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घरेलू बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 29 जनवरी, 2026 के अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम से चांदी लुढ़ककर 23 अक्टूबर, 2026 को 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। 29 जनवरी से 23 अक्टूबर के बीच यानी 267 दिनों में चांदी की कीमतों में 54.10 फीसदी की की भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर 121.64 डॉलर प्रति औंस से 56.04 फीसदी घटकर 53.47 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। 
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इस गिरावट के क्या हैं मुख्य कारण?

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी प्रमुख अनुज गुप्ता का मानना है, चांदी में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई मजबूत भू-राजनीतिक और मैक्रोइकोनॉमिक कारक जिम्मेदार हैं। चांदी के मोर्चे पर सबसे बड़ी मार इसकी औद्योगिक मांग का कमजोर होना है। बड़ी-बड़ी औद्योगिक कंपनियों ने अपनी इन्वेंट्री जरूरत से ज्यादा बढ़ा ली थी। अब कंपनियां उसी पुरानी स्टॉक का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे नए ऑर्डर और डिमांड सुस्त पड़ गई है।
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सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी चांदी की मांग कुछ सुस्त पड़ी है। इसके अलावा, चांदी के दाम आसमान छूने की वजह से कई इंडस्ट्रीज ने इसकी जगह सस्ते विकल्पों (जैसे कॉपर यानी तांबे) का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिससे चांदी पर दबाव और बढ़ गया है।

कमोडिटी एक्सपर्ट भूपेश शर्मा का कहना है, अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई का जोखिम बढ़ा है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की आशंका मजबूत हुई है, जिससे कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया है, जो साफतौर पर इस समय चांदी पर देखा जा सकता है। 

सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट वरुण जोशी का मानना है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के उच्च स्तर पर बने रहने और डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से निवेशकों का झुकाव सुरक्षित निवेश के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ यील्ड देने वाले एसेट्स की तरफ बढ़ा है। इन तमाम कारणों से केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक कड़ा रखने की आशंका बन गई है, जो बुलियन मार्केट के लिए नकारात्मक साबित हुआ है।

रिकॉर्ड स्तर से टूटी चांदी 

कमोडिटी

2026 का उच्चतम स्तर

2026 का निचला स्तर

वर्तमान भाव

उच्चतम स्तर से गिरावट (%)

सालाना बदलाव (%)

गोल्ड स्पॉट ($/औंस)

5,597.91

3,942.50

3,986.54

-28.79%

-29.57%

गोल्ड MCX (₹/10 ग्राम)*

1,80,799.00

1,29,595.00

1,41,806.00

-21.57%

-28.32%

सिल्वर स्पॉट ($/औंस)

121.64

53.47

53.47

-56.04%

-56.04%

सिल्वर MCX (₹/किग्रा)

4,20,048.00

1,92,800.00

1,92,800.00

-54.10%

-54.10%

आगे क्या है उम्मीद? 

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का मानना है कि भले ही वर्तमान में कीमतें आधी रह गई हों, लेकिन चांदी के स्ट्रक्चरल फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत बने हुए हैं। चांदी की कुल मांग का लगभग 50 हिस्सा औद्योगिक अनुप्रयोगों जैसे ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर से आता है, और वैश्विक स्तर पर इसमें लगातार आपूर्ति घाटा बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 डॉलर के आसपास एक मजबूत सपोर्ट नजर आ रहा है। यदि भू-राजनीतिक दबाव कम होते हैं और औद्योगिक मांग पटरी पर लौटती है, तो आने वाले समय में बाजार सुधर सकता है। 

अब क्या करें निवेशक? 

कमोडिटी समाचार के संस्थापक अंकित कपूर का कहना है, जब तक सप्लाई और डिमांड का यह असंतुलन पूरी तरह सुधर नहीं जाता और ग्लोबल इंडस्ट्रियल डिमांड में फिर से तेजी नहीं आती, तब तक चांदी की  कीमतों में सुस्ती का दौर देखने को मिल सकता है।

निवेशक को अभी जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम नहीं उठाना चाहिए। चूंकि कीमतों में अभी और नरमी या गिरावट की गुंजाइश दिख रही है, इसलिए बाजार पर पैनी नजर बनाए रखना समझदारी होगी।

इस समय सारा पैसा एक साथ बाजार में झोंकने की गलती बिल्कुल न करें। यदि आप बाजार में उतरना ही चाहते हैं, तो लंबी अवधि का नजरिया लेकर चलें।

सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि आप एसआईपी के माध्यम से छोटी-छोटी और तयशुदा क्वांटिटी ही बाजार में जोड़ें। टुकड़ों में खरीदारी करने से बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होता है और आपकी खरीद की औसत लागत भी बेहतर हो जाती है।
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