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बिहार: सरकारी स्कूलों के अतिथि शिक्षकों को अनुभव का लाभ नहीं मिलेगा, पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला

Wed, 28 Oct 2026 07:01 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 28 Oct 2026 07:01 AM IST
सार

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को स्थायी शिक्षक भर्ती में अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक देने की मांग खारिज कर दी। न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि सभी अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त करना अनिवार्य है और भर्ती नियमों में छूट नहीं दी जा सकती।

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patna high court denies experience weightage to bihar government school guest teachers
पटना हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पटना उच्च न्यायालय ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को स्थायी शिक्षक भर्ती में अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक देने की मांग पूरी तरह खारिज कर दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त करना सभी अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य है। अनुभव का लाभ लेने से पहले अभ्यर्थियों को अपनी विषयगत योग्यता साबित करनी होगी।
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भर्ती प्रक्रिया में वेटेज देने से इन्कार
न्यायाधीश हरीश कुमार की एकलपीठ ने अभिषेक कुमार सिंह तथा 29 अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के उपरांत यह निर्णय सुनाया। याचियों ने विज्ञापन संख्या 22/2024 के तहत आयोजित शिक्षक भर्ती में प्रत्येक कार्य वर्ष के लिए पांच अंक और अधिकतम 25 अंक तक अनुभव वेटेज देने का अनुरोध किया था। याचियों की दलील थी कि वे बिहार के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में विभिन्न विषयों के अतिथि शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 29 मई 2024 के एक अदालती आदेश तथा माध्यमिक शिक्षा निदेशक के 31 मई 2024 के पत्र का उल्लेख करते हुए समान आधार पर अंक जोड़ने का दावा प्रस्तुत किया था। अभ्यर्थियों का कहना था कि अनुभव के अंक जुड़ने से वे तय कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करके चयन सूची में स्थान पा सकते थे।
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न्यूनतम अर्हता अंक हासिल करना अनिवार्य
मामले की सुनवाई के दौरान बिहार लोक सेवा आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि भर्ती विज्ञापन की कंडिका 4 में न्यूनतम अर्हता अंकों की शर्त पूरी तरह साफ है। आयोग ने अपने तर्क के समर्थन में कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के 6 जुलाई 2007 के संकल्प संख्या 2374 तथा 1 अक्तूबर 2008 के पत्र संख्या 6706 का संदर्भ दिया। आयोग का कहना था कि किसी भी अभ्यर्थी के लिए भर्ती परीक्षा में आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम उत्तीर्ण अंक हासिल करना वैधानिक रूप से अनिवार्य है। इस शर्त में किसी भी प्रकार की छूट देना भर्ती नियमों के सर्वथा प्रतिकूल होगा।

नए अभ्यर्थियों के अवसर की सुरक्षा
उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि शिक्षण कार्य के लिए संबंधित विषय का व्यावहारिक ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही परीक्षा में न्यूनतम अर्हता अंक प्राप्त करना भी समान रूप से अनिवार्य है। अदालत ने अपने फैसले में यह भी रेखांकित किया कि किसी भी सार्वजनिक नियुक्ति प्रक्रिया में नए अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा का समान अवसर मिलना चाहिए। न्यायालय ने विज्ञापन में निर्धारित शर्तों को सही मानते हुए पूर्व के न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर याचिका खारिज कर दी।
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