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उर्दू अदब

579 Followers 6292 Poems

अंबरीन हसीब अंबर: ध्यान में आ कर बैठ गए हो तुम भी नाँ

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
ध्यान में आ कर बैठ गए हो तुम भी नाँ
मुझे मुसलसल देख रहे हो तुम भी नाँ

दे जाते हो मुझ को कितने रंग नए
जैसे पहली बार मिले हो तुम भी नाँ

हर मंज़र में अब हम दोनों होते हैं
मुझ में ऐसे आन बसे हो त...और पढ़ें
4 hours ago

करवा चौथ 2026: चांद पर कहे गए शेर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं
- अहमद फ़राज़ 


कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए
तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए
- बशीर बद्र  ...और पढ़ें
4 hours ago
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हारिस बिलाल: बस एक बार फ़लक से इशारा हो जाए

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
बस एक बार फ़लक से इशारा हो जाए
फिर उस के बा'द भले जो ख़सारा हो जाए

अजब फ़ज़ा है कि तहक़ीक़ उस पे है मौक़ूफ़
जो हो चुका है वो हम से दोबारा हो जाए

हथेलियों से हलक़ में उतरता जाम-विसाल
किसी...और पढ़ें
5 hours ago

मलाज़ नक़वी: अब लगने लगी मुझ को भी बे-कार ये दुनिया

काव्य डेस्क

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अब लगने लगी मुझ को भी बे-कार ये दुनिया
हर मोड़ पे जैसे कि हो दीवार ये दुनिया

डरते हैं इसी बात से हम अहल-ए-वफ़ा लोग
हम को न समझ ले कहीं ग़द्दार ये दुनिया

सींची है ज़मीं लोगों ने बच्चों के लहू से...और पढ़ें
6 hours ago
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Urdu Poetry: फिर से ख़ुदा बनाएगा कोई नया जहाँ

काव्य डेस्क

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                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
7 hours ago

ऐतबार साजिद की ग़ज़ल: मैं तकिए पर सितारे बो हा हूँ

काव्य डेस्क

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                                                    मैं तकिए पर सितारे बो हा हूँ
जनम-दिन है अकेला रो रहा हूँ

किसी ने झाँक कर देखा न दिल में
कि मैं अंदर से कैसा हो रहा हूँ

जो दिल पर दाग़ हैं पिछली रुतों के
उन्हें अब आँसुओं से धो रहा हूँ

...और पढ़ें
23 hours ago

तरुण तरन्नुम: जिस को चाहा बस उसी ने ग़म दिया

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
जिस को चाहा बस उसी ने ग़म दिया
मुझ को मेरी हर ख़ुशी ने ग़म दिया

मैं तुम्हें ही याद कर के रो पड़ा
जब सफ़र में अजनबी ने ग़म दिया

क्या बचा है अब यक़ीं किस पर करूँ
ज़िंदगी को ज़िंदगी ने ग़म दिया...और पढ़ें
1 day ago

मोहसिन नक़वी: कठिन तन्हाइयों से कौन खेला मैं अकेला

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
कठिन तन्हाइयों से कौन खेला मैं अकेला
भरा अब भी मिरे गाँव का मेला मैं अकेला

बिछड़ कर तुझ से मैं शब भर न सोया कौन रोया
ब-जुज़ मेरे ये दुख भी किस ने झेला मैं अकेला

ये बे-आवाज़ बंजर बन के बासी ये उदासी...और पढ़ें
1 day ago

ज़िया मज़कूर: बोल पड़ते हैं हम जो आगे से प्यार बढ़ता है इस रवय्ये से

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
बोल पड़ते हैं हम जो आगे से
प्यार बढ़ता है इस रवय्ये से

मैं वही हूँ यक़ीं करो मेरा
मैं जो लगता नहीं हूँ चेहरे से

हम को नीचे उतार लेंगे लोग
इश्क़ लटका रहेगा पंखे से

सारा कुछ लग र...और पढ़ें
1 day ago

Urdu Poetry: नींद आए तो अचानक तिरी आहट सुन लूँ

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
1 day ago
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