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दलीप ट्रॉफी फाइनल: क्या करुण नायर को न खिलाकर साउथ जोन ने की भारी गलती? इस खिलाड़ी से ओपनिंग कराने पर मचा बवाल

Wed, 09 Sep 2026 08:17 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

दलीप ट्रॉफी फाइनल में साउथ जोन के शीर्षक्रम के संघर्ष ने करुण नायर को टीम से बाहर रखने के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नायर लगातार दूसरे मैच में नहीं चुने गए और बंगलूरू लौटने के बाद थिम्मापैया ट्रॉफी में शतक जड़ दिया। टीम मैनेजमेंट ने संयोजन को चयन की वजह बताया है।
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करुण नायर और रिकी भुई - फोटो : ANI
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विस्तार
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दलीप ट्रॉफी फाइनल में साउथ जोन ने जिस फैसले पर भरोसा किया था, वही अब उसके लिए सवाल बनता नजर आ रहा है। टीम ने अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर को लगातार दूसरे मुकाबले में प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा, लेकिन फाइनल में उतरते ही शीर्षक्रम की तस्वीर कुछ ऐसी बनी कि नायर की गैरमौजूदगी चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।
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सबसे चौंकाने वाला फैसला रिकी भुई से ओपनिंग कराने का रहा। भुई ने अपने 90 प्रथम श्रेणी मैचों में सिर्फ तीन बार पारी की शुरुआत की थी और फाइनल में भी वह महज एक रन बनाकर लौट गए। दूसरी ओर, टीम से बाहर होने के बाद बंगलूरू पहुंचे नायर ने थिम्मापैया ट्रॉफी में छत्तीसगढ़ के खिलाफ शतक ठोक दिया। ऐसे में चेन्नई में साउथ जोन के विकेट गिरते गए तो सवाल भी तेज होता गया कि क्या फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में टीम संयोजन के नाम पर करुण नायर को बाहर रखना वाकई सही फैसला था, या चयन में ऐसी चूक हुई जिसका खामियाजा टीम को मैदान पर भुगतना पड़ रहा है?

करुण नायर - फोटो : PTI
मैच का क्या रहा हाल?
दरअसर, ईस्ट जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 708 रन बनाए। इसमें कप्तान ईशान किशन की 270 रन, कुमार कुशाग्र की 101 रन और शिखर मोहन की 85 रन की पारी शामिल है। अभिमन्यु ईश्वरन ने 72 रन, अनुकूल रॉय ने 45 रन, वैभव सूर्यवंशी ने 44 रन और कुनैन कुरैशी ने 40 रन बनाए। जवाब में दलीप ट्रॉफी फाइनल के तीसरे दिन साउथ जोन की टीम 200 के अंदर ही पांच विकेट गंवा चुकी थी। उसे फॉलोऑन बचाने के लिए कुल 509 रन बनाने हैं, जो कि पुछल्ले बल्लेबाजों को देखते हुए बेहद मुश्किल दिखता है।

टीम की शुरुआत भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कप्तान तिलक वर्मा और टीम मैनेजमेंट ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करते हुए भुई को नारायण जगदीशन के साथ पारी की शुरुआत करने का फैसला किया था, लेकिन भुई की बतौर सलामी बल्लेबाज बहुत कम अनुभव ने उन्हें जल्दी पवेलियन का रास्ता दिखाया। 

पडिक्कल ने अर्धशतक जमाया - फोटो : Twitter
शीर्ष क्रम का क्यों हुआ बुरा हाल?
जगदीशन ने 32 रन बनाए, जबकि देवदत्त पडिक्कल ने 62 रन की पारी खेलकर पारी को संभालने की कोशिश की। हालांकि शेख रशीद भी 27 रन बनाकर लौट गए। इस तरह शुरुआती क्रम में स्थिरता की कमी साफ दिखाई दी। यहीं करुण नायर का नाम फिर चर्चा में आ गया। वह अनुभवी प्रथम श्रेणी बल्लेबाज हैं और हाल के समय में घरेलू क्रिकेट में बड़ी पारियां खेलने के लिए जाने जाते रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें लगातार दूसरे मुकाबले में बाहर रखा गया।

करुण नायर ने क्यों छोड़ा टीम का साथ?
नायर फाइनल से एक दिन पहले तक साउथ जोन के ट्रेनिंग सेशन का हिस्सा थे, लेकिन रविवार को उन्हें पता चला कि लगातार दूसरे मैच में भी उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली है। इसके बाद वह बंगलूरू लौट गए। साउथ जोन के कोच विक्रम वर्मा ने उनके जाने की वजह 'व्यक्तिगत कारण' बताई। उन्होंने कहा कि नायर ने मेल करके टीम से जाने की अनुमति ली थी। वर्मा ने कहा, 'नहीं, वह व्यक्तिगत कारणों से घर गए हैं। उन्होंने मेल किया और अनुमति ली थी।'

हालांकि नायर की सोशल मीडिया पोस्ट से मामला कुछ अलग नजर आया और चयन को लेकर चर्चा शुरू हो गई। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि बंगलूरू लौटने के बाद नायर ने केएससीए सेक्रेटरी XI के लिए छत्तीसगढ़ के खिलाफ थिम्मापैया ट्रॉफी में शतक जड़ दिया। यानी जिस समय साउथ जोन को चेन्नई में दलीप ट्रॉफी फाइनल के लिए उनकी जरूरत पर सवाल उठ रहे थे, उसी समय नायर दूसरे प्रथम श्रेणी मुकाबले में अपने बल्ले से जवाब दे रहे थे।

करुण नायर - फोटो : ANI
पोस्ट के जवाब में करुण नायर ने क्या लिखा?
शशांक किशोर नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, 'साउथ जोन द्वारा लगातार दूसरे दलीप ट्रॉफी मैच से बिना किसी स्पष्ट कारण के बाहर किए जाने के ठीक एक दिन बाद,करुण नायर ने केएससीए के प्री-सीजन रेड-बॉल टूर्नामेंट में छत्तीसगढ़ के खिलाफ केएससीए सेक्रेटरी इलेवन के लिए एक शानदार शतक जड़ दिया है। 708 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ जोन को करुण नायर की मौजूदगी से काफी मदद मिल सकती थी।' इसके जवाब में करुण नायर ने लिखा, 'इसे अस्पष्ट या समझ से परे कहना तो बहुत छोटी बात होगी।' उनके कहने का मतलब यह था कि यानी मेरे साथ जो हुआ, उसे बयां करने के लिए अस्पष्ट शब्द बहुत कमजोर है।




साउथ जोन ने नायर को क्यों नहीं चुना?
साउथ जोन के कोच विक्रम वर्मा ने टीम के फैसले के पीछे संयोजन को सबसे बड़ा कारण बताया। उनका कहना था कि दलीप ट्रॉफी में हर टीम के पास दो बाएं हाथ के स्पिनर हैं, इसलिए मध्यक्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाज को उतारने की रणनीति बनाई गई। वर्मा ने समझाया, 'हम एक अच्छे संयोजन के साथ गए, क्योंकि हर टीम के पास दो बाएं हाथ के स्पिनर हैं। इसलिए हमने सोचा कि मध्यक्रम में एक बाएं हाथ का बल्लेबाज उन्हें दबाव में डालने का मौका देगा। हमने वही चुना जो टीम के लिए सबसे अच्छा लगा।'

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर क्षेत्र के खिलाफ पहले मैच में युवा कोडिमेला हिमतेजा को मौका दिया गया था। इसके बाद देवदत्त पडिक्कल की वापसी हुई और टीम संयोजन के कारण नायर के लिए जगह बनाना मुश्किल हो गया। वर्मा ने कहा, 'पहले मैच में हमने एक युवा खिलाड़ी हिमतेजा को मौका दिया था। अब पडिक्कल वापस आ गए हैं, इसलिए फिर से टीम संयोजन ऐसा था कि नायर को बाहर रखना पड़ा। यह मुश्किल फैसला था, लेकिन हमारे पास यही संयोजन था।'

करुण नायर - फोटो : ANI
सवाल सिर्फ नायर का नहीं, ओपनिंग का भी है?
यहां पूरा मामला सिर्फ करुण नायर को खिलाने या नहीं खिलाने तक सीमित नहीं है। असली सवाल साउथ जोन की बल्लेबाजी संरचना पर है। फाइनल के लिए टीम के पास सिर्फ एक विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज नारायण जगदीशन हैं। ऐसे में दूसरे ओपनर के तौर पर रिकी भुई को भेजा गया। भुई अनुभवी बल्लेबाज जरूर हैं, लेकिन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका मुख्य रोल मध्यक्रम का रहा है। कप्तान तिलक वर्मा ने फाइनल से पहले इस फैसले का बचाव किया था।

तिलक ने कहा था, 'भुई पहले भी खेल चुके हैं और पहले ओपनिंग कर चुके हैं, लेकिन काफी समय हो गया है। रिकी मध्यक्रम में खेल रहे थे। लेकिन अब वह खुद को ढाल सकते हैं और वह एक सीनियर खिलाड़ी हैं। इसलिए हमने उन्हें जग्गी के साथ ओपन करने के लिए चुना।' फाइनल में भुई का सिर्फ एक रन बनाकर आउट होना इस फैसले पर सवाल खड़े करने के लिए पर्याप्त रहा।

तिलक वर्मा - फोटो : PTI
चयन का फैसला किसका था?
इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि दलीप ट्रॉफी की टीमों का चयन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने नहीं किया है। जोन की टीमों के लिए खिलाड़ियों का चयन संबंधित जोन में शामिल राज्य क्रिकेट संघों के चयनकर्ताओं ने किया है। यानी करुण नायर का बाहर होना भारतीय राष्ट्रीय टीम के चयन से जुड़ा फैसला नहीं था, बल्कि साउथ जोन के घरेलू चयन का मामला था। इसी वजह से इस फैसले को सीधे टीम इंडिया की चयन प्रक्रिया से जोड़ना सही नहीं होगा। लेकिन दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट के फाइनल में एक अनुभवी बल्लेबाज को बाहर रखने और फिर शीर्षक्रम के संघर्ष करने से चयन के फैसले पर बहस जरूर तेज हो गई है।
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ईस्ट जोन की टीम - फोटो : BCCI
क्या साउथ जोन ने गलती की?
सिर्फ फाइनल की शुरुआती पारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि नायर को बाहर रखना निश्चित रूप से गलती थी। टीम मैनेजमेंट के पास अपने संयोजन को लेकर तर्क था और पडिक्कल की वापसी के बाद बाएं हाथ के बल्लेबाज को प्राथमिकता देने की रणनीति भी समझी जा सकती है, लेकिन दूसरी तरफ आंकड़े और मौजूदा मैच की स्थिति सवाल जरूर पैदा करती है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इसमें हार जीत का फैसला पहली पारी के बढ़त के आधार पर भी होता है। ऐसे में अगर ईस्ट जोन की टीम बढ़त हासिल करती है तो उसके मैच जीतने की संभावन बढ़ जाएगी।

साउथ जोन के पास सिर्फ एक विशेषज्ञ ओपनर था और दूसरे छोर पर ऐसे बल्लेबाज को भेजा गया, जिसने अपने 90 प्रथम श्रेणी मैचों में केवल तीन बार पारी की शुरुआत की है। इसके साथ ही नायर का टीम से बाहर होने के बाद तुरंत शतक लगाना इस कहानी को और दिलचस्प बना देता है। यही वजह है कि अब बहस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि करुण नायर को क्यों नहीं खिलाया गया, बल्कि इस बात पर भी है कि क्या फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में टीम संयोजन बनाते समय साउथ जोन ने अपनी सबसे मजबूत बल्लेबाजी व्यवस्था को नजरअंदाज कर दिया?
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