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डब्ल्यूएचओ पर चीन की नजर: महानिदेशक पद के लिए डॉ. सोंग ली को बनाया उम्मीदवार, कोविड से क्या है कनेक्शन?
Thu, 08 Oct 2026 07:34 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, बीजिंग, चीन
पीटीआई, बीजिंग, चीन
Published by: अमन मौर्या
Updated Thu, 08 Oct 2026 07:34 PM IST
सार
चीन ने डॉ. सोंग ली को डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक पद के लिए नामित किया है। चीन के इस कदम से कोविड-19 की उत्पत्ति के अनसुलझे सवालों और चीन की भूमिका पर एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा तेज हो सकती है।
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चीन ने डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक पद के लिए एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी को नामित किया।
- फोटो : ANI
विस्तार
चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक पद के लिए एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी को नामित किया है। चीन के कदम से कोविड-19 महामारी से निपटने के उसके तरीके और वायरस की उत्पत्ति के अनसुलझे सवाल पर दुनिया का ध्यान फिर से जा सकता है। चीन द्वारा नामित राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. सोंग ली ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक समय तक काम किया है। उनके आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक, कोविड-19 के प्रकोप के दौरान, उन्होंने गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों की सुरक्षा के उपायों में समन्वय करने और आवश्यक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रोफाइल के अनुसार, सोंग को 2002 में एसएआरएस के प्रकोप सहित अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने का भी अनुभव है।
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विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने गुरुवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में सोंग के नामांकन की पुष्टि की। उनसे उन रिपोर्टों के बारे में पूछा गया था जिनमें कहा गया था कि चीन डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस की जगह लेने के लिए उनका नाम आगे बढ़ा रहा है, जिनका दूसरा और अंतिम कार्यकाल 15 अगस्त, 2027 को समाप्त हो रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या चीन डब्ल्यूएचओ का नेतृत्व करने के लिए सोंग को नामित करने की योजना बना रहा है और क्या इस कदम से अमेरिका के संगठन से हटने के बाद बीजिंग को अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका मिलेगा, तो माओ ने कहा कि डब्ल्यूएचओ, स्वास्थ्य के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी के रूप में, वैश्विक स्वास्थ्य प्रशासन में अग्रणी और समन्वयकारी भूमिका निभाता है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में, बहुपक्षवाद को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य का विकास एक दीर्घकालिक और कठिन कार्य बना हुआ है। बदलते परिदृश्य और नई परिस्थितियों के बीच, डब्ल्यूएचओ की स्थिर और निरंतर प्रगति सुनिश्चित करने में महानिदेशक की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि यदि डॉ. सोंग ली चुनी जाती हैं, तो इससे डब्ल्यूएचओ को स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजना को बढ़ावा देने में अधिक सकारात्मक भूमिका निभाने में मदद मिलेगी। अगर सोंग चुने जाते हैं, तो वह मार्गरेट चैन के बाद डब्ल्यूएचओ के प्रमुख बनने वाले चीन के दूसरे व्यक्ति होंगे। मार्गरेट चैन ने 2007 से 2017 तक महानिदेश के रूप में काम किया था। यह नॉमिनेशन ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका डब्ल्यूएचओ से अलग हो गया था। ट्रंप ने कोविड-19 महामारी से निपटने के तरीके और संगठन की फंडिंग व्यवस्था की आलोचना की थी। अमेरिका डब्ल्यूएचओ का सबसे बड़ा डोनर रहा है।
कोविड-19 महामारी पर शुरू हो सकती है जांच
चीन के इस कदम से कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में चीन के कामकाज और एसएआरएस- सीओवी-2 (कोविड-19 फैलाने वाला वायरस) की उत्पत्ति के अभी तक अनसुलझे सवाल पर फिर से जांच-पड़ताल शुरू हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के 'साइंटिफिक एडवाइजरी ग्रुप फॉर द ओरिजिन्स ऑफ नॉवेल पैथोजन्स' (एसएजीओ) ने 2025 में अपनी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट में कहा था कि उपलब्ध सबूत 'जूनोटिक स्पिलओवर' (जानवरों से इंसानों में वायरस फैलने) की संभावना की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, उसने यह भी कहा कि वायरस की उत्पत्ति का पूरी तरह से पता लगाने के लिए जरूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि सभी संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए, जिसमें जूनोटिक स्पिलओवर और लैब से वायरस के लीक होने की संभावना भी शामिल है। उसमें यह भी कहा गया था कि चीन ने महामारी की शुरुआत में संक्रमित लोगों के सैकड़ों जेनेटिक सीक्वेंस, वुहान के बाजारों में बेचे जाने वाले जानवरों के बारे में विस्तृत जानकारी या शहर की प्रयोगशालाओं में काम और बायोसेफ्टी की स्थितियों के बारे में जानकारी नहीं दी थी।
ये भी पढ़ें: आधार-वोटर आईडी होने के बाद भी निर्वासिन क्यों?: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार से किया सवाल, आदेश पर लगाई रोक
चीन ने कोविड-19 पर क्या कहा?
टेड्रोस ने बार-बार कोविड-19 की उत्पत्ति के बारे में और जानकारी की मांग की। 2025 में, उन्होंने कहा था कि सभी संभावनाएं अभी भी खुली हैं और चीन तथा संबंधित जानकारी रखने वाले अन्य देशों से इसे साझा करने का आग्रह किया। हालांकि, चीन ने लैब से वायरस लीक होने के आरोपों को खारिज कर दिया था। 2025 में जारी एक व्हाइट पेपर में उसके नेशनल हेल्थ कमीशन ने कहा कि चीन ने डब्ल्यूएचओ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ जानकारी साझा की है, वायरस का जीनोम सीक्वेंस उपलब्ध कराया है और संयुक्त शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को चीन आमंत्रित किया है। व्हाइट पेपर में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ-चीन संयुक्त अध्ययन और अन्य जांचों से यह निष्कर्ष निकला है कि लैब में किसी घटना की संभावना बहुत कम है।
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विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने गुरुवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में सोंग के नामांकन की पुष्टि की। उनसे उन रिपोर्टों के बारे में पूछा गया था जिनमें कहा गया था कि चीन डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस की जगह लेने के लिए उनका नाम आगे बढ़ा रहा है, जिनका दूसरा और अंतिम कार्यकाल 15 अगस्त, 2027 को समाप्त हो रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या चीन डब्ल्यूएचओ का नेतृत्व करने के लिए सोंग को नामित करने की योजना बना रहा है और क्या इस कदम से अमेरिका के संगठन से हटने के बाद बीजिंग को अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका मिलेगा, तो माओ ने कहा कि डब्ल्यूएचओ, स्वास्थ्य के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी के रूप में, वैश्विक स्वास्थ्य प्रशासन में अग्रणी और समन्वयकारी भूमिका निभाता है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में, बहुपक्षवाद को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य का विकास एक दीर्घकालिक और कठिन कार्य बना हुआ है। बदलते परिदृश्य और नई परिस्थितियों के बीच, डब्ल्यूएचओ की स्थिर और निरंतर प्रगति सुनिश्चित करने में महानिदेशक की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि यदि डॉ. सोंग ली चुनी जाती हैं, तो इससे डब्ल्यूएचओ को स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजना को बढ़ावा देने में अधिक सकारात्मक भूमिका निभाने में मदद मिलेगी। अगर सोंग चुने जाते हैं, तो वह मार्गरेट चैन के बाद डब्ल्यूएचओ के प्रमुख बनने वाले चीन के दूसरे व्यक्ति होंगे। मार्गरेट चैन ने 2007 से 2017 तक महानिदेश के रूप में काम किया था। यह नॉमिनेशन ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका डब्ल्यूएचओ से अलग हो गया था। ट्रंप ने कोविड-19 महामारी से निपटने के तरीके और संगठन की फंडिंग व्यवस्था की आलोचना की थी। अमेरिका डब्ल्यूएचओ का सबसे बड़ा डोनर रहा है।
कोविड-19 महामारी पर शुरू हो सकती है जांच
चीन के इस कदम से कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में चीन के कामकाज और एसएआरएस- सीओवी-2 (कोविड-19 फैलाने वाला वायरस) की उत्पत्ति के अभी तक अनसुलझे सवाल पर फिर से जांच-पड़ताल शुरू हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के 'साइंटिफिक एडवाइजरी ग्रुप फॉर द ओरिजिन्स ऑफ नॉवेल पैथोजन्स' (एसएजीओ) ने 2025 में अपनी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट में कहा था कि उपलब्ध सबूत 'जूनोटिक स्पिलओवर' (जानवरों से इंसानों में वायरस फैलने) की संभावना की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, उसने यह भी कहा कि वायरस की उत्पत्ति का पूरी तरह से पता लगाने के लिए जरूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि सभी संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए, जिसमें जूनोटिक स्पिलओवर और लैब से वायरस के लीक होने की संभावना भी शामिल है। उसमें यह भी कहा गया था कि चीन ने महामारी की शुरुआत में संक्रमित लोगों के सैकड़ों जेनेटिक सीक्वेंस, वुहान के बाजारों में बेचे जाने वाले जानवरों के बारे में विस्तृत जानकारी या शहर की प्रयोगशालाओं में काम और बायोसेफ्टी की स्थितियों के बारे में जानकारी नहीं दी थी।
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चीन ने कोविड-19 पर क्या कहा?
टेड्रोस ने बार-बार कोविड-19 की उत्पत्ति के बारे में और जानकारी की मांग की। 2025 में, उन्होंने कहा था कि सभी संभावनाएं अभी भी खुली हैं और चीन तथा संबंधित जानकारी रखने वाले अन्य देशों से इसे साझा करने का आग्रह किया। हालांकि, चीन ने लैब से वायरस लीक होने के आरोपों को खारिज कर दिया था। 2025 में जारी एक व्हाइट पेपर में उसके नेशनल हेल्थ कमीशन ने कहा कि चीन ने डब्ल्यूएचओ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ जानकारी साझा की है, वायरस का जीनोम सीक्वेंस उपलब्ध कराया है और संयुक्त शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को चीन आमंत्रित किया है। व्हाइट पेपर में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ-चीन संयुक्त अध्ययन और अन्य जांचों से यह निष्कर्ष निकला है कि लैब में किसी घटना की संभावना बहुत कम है।