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टेक्सास में 90 फुट की हनुमान प्रतिमा पर बवाल: यूट्यूबर की धमकी से गरमाई सियासत; विवाद क्यों?
Tue, 22 Sep 2026 02:52 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:52 AM IST
सार
टेक्सास में 90 फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा को हटाने की यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस की टिप्पणी के बाद धार्मिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचि बख्शी और हिंदू संगठन सीओएचएनए ने इस टिप्पणी का विरोध किया है। यह विवाद टेक्सास में मध्यावधि चुनाव के दौरान भारतीय-अमेरिकियों, आप्रवासन और नस्लीय टिप्पणियों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है।
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भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा
- फोटो : एक्स/तरुण कुमार
विस्तार
अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। शुगरलैंड स्थित अष्टलक्ष्मी मंदिर में लगी इस प्रतिमा को हटाने की मांग एक रूढ़िवादी यूट्यूबर ने की है। इसके बाद हिंदू संगठनों और कई लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब टेक्सास में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और आप्रवासी विरोधी बयानबाजी भी चर्चा में है।
मंदिर में 2024 में हुई थी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा
अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित इस प्रतिमा को ‘स्टैच्यू ऑफ द यूनियन’ कहा जाता है। इसकी प्राण प्रतिष्ठा अगस्त 2024 में हुई थी। दावा किया जा रहा है कि तब से ही कुछ ईसाई रूढ़िवादी समूह इसे लेकर आपत्ति जताते रहे हैं और इसे ‘अईसाई’ बताते हैं। अब रूढ़िवादी यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस की टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
यूट्यूबर ने कहा- जब जीतेंगे तो इसे गिरा देंगे
जेसी ह्यूजेस ने सोशल मीडिया पर हनुमान प्रतिमा की तस्वीर साझा की। इसके साथ उन्होंने लिखा, 'जब हम जीतेंगे, तो इसे गिरा देंगे।' उनकी इस टिप्पणी के बाद हिंदू समूहों और विचारकों ने विरोध जताया। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचि बख्शी ने ह्यूजेस की टिप्पणी को राष्ट्रविरोधी बताया और इसे हिंदू धर्म के खिलाफ खतरा करार दिया।
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पूर्व सैनिक बोले- पूजा स्थल को निशाना बनाना गलत
रुचि बख्शी ने कहा कि किसी अमेरिकी समुदाय के पूजा स्थल को सिर्फ इसलिए नुकसान पहुंचाने की बात करना कि वहां किसी दूसरे धर्म को मानने वाले लोग पूजा करते हैं, हिंदू धर्म के खिलाफ खतरा है। उन्होंने खुद को एक अमेरिकी-हिंदू बताया और अमेरिका में हिंदू विरोधी नफरत को लेकर चिंता जताई। बख्शी ने कहा कि अगर अमेरिका में जीत का मतलब हिंदू मंदिरों को गिराना है, तो ऐसा चाहने वाले उस देश की बात नहीं कर रहे जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी।
हिंदू संगठन और दूसरे पूर्व सैनिक भी समर्थन में आए
बख्शी के बयान को कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (सीओएचएनए) और टेक्सास में रहने वाले अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक कार्ल व्हीलेस का समर्थन मिला। व्हीलेस खुद को राजनीतिक टिप्पणीकार बताते हैं। सीओएचएनए ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वह सोशल मीडिया मंच पर खुले धार्मिक पूर्वाग्रह को मुख्यधारा में लाए जाने से चिंतित है और इसके खिलाफ बख्शी के साथ खड़ा है।
यह भी पढ़ें: अमेरिका में एयर ट्रैफिक सिस्टम फेल: न्यूयॉर्क के तीन बड़े एयरपोर्ट पर उड़ानें ठप; क्या है वजह?
चुनावी माहौल में भारतीय-अमेरिकियों को लेकर भी बहस
टेक्सास में मध्यावधि चुनाव अभियान के दौरान आप्रवासी विरोधी बयानबाजी भी लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। राज्य में पांच लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। भारतीय-अमेरिकी समुदाय उस समय भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आया था, जब सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ रहे रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों पर टिप्पणी की थी। ये छात्र एक फुटबॉल खेल में जीत का जश्न मना रहे थे।
बो फ्रेंच की पोस्ट पर भी हुआ था विवाद
टेक्सास रेलरोड कमिश्नर के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने छात्रों के जश्न की तस्वीर साझा की थी। उन्होंने लिखा था कि उन्होंने सुना है, 'इस साल यूटी ग्रेजुएशन ऐसा दिख रहा था और इसके साथ कहा था कि समस्या अब जाहिर तौर पर किसी की कल्पना से कहीं ज्यादा खराब है।' हाउस डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफरीज ने पिछले सप्ताह कहा था कि दक्षिणपंथी रिपब्लिकन बार-बार अपमानजनक शब्दों का सामान्य तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।
रिपब्लिकन नेताओं ने भी फ्रेंच की पोस्ट की आलोचना की
रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने फ्रेंच की पोस्ट की निंदा की। उन्होंने सवाल किया कि क्या दूसरे रिपब्लिकन नेता भी उस असहिष्णुता और नस्लवाद की निंदा करेंगे, जिसे उन्होंने फ्रेंच की पोस्ट में बताया। टेक्सास के रिपब्लिकन विधायक लेसी हल और जेरेड पैटरसन ने भी पोस्ट की आलोचना की। हालांकि, फ्रेंच ने बाद में अपनी टिप्पणी का बचाव किया और कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की प्रवेश प्रक्रिया टेक्सास के लोगों के लिए नुकसानदेह है।
टेक्सास में सीनेट चुनाव पर भी सबकी नजर
रिपब्लिकन लंबे समय से टेक्सास की राजनीति में मजबूत स्थिति में रहे हैं। अब डेमोक्रेट नवंबर में होने वाले सीनेट चुनाव में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। मूल खबर के मुताबिक, अलग-अलग चुनावी पूर्वानुमानों और भविष्यवाणी बाजारों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के खिलाफ बढ़त दिखाए जाने का उल्लेख किया गया है। वहीं, टेक्सास के गवर्नर पद के लिए मौजूदा रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट के सीट बरकरार रखने का अनुमान बताया गया है।
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मंदिर में 2024 में हुई थी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा
अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित इस प्रतिमा को ‘स्टैच्यू ऑफ द यूनियन’ कहा जाता है। इसकी प्राण प्रतिष्ठा अगस्त 2024 में हुई थी। दावा किया जा रहा है कि तब से ही कुछ ईसाई रूढ़िवादी समूह इसे लेकर आपत्ति जताते रहे हैं और इसे ‘अईसाई’ बताते हैं। अब रूढ़िवादी यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस की टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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यूट्यूबर ने कहा- जब जीतेंगे तो इसे गिरा देंगे
जेसी ह्यूजेस ने सोशल मीडिया पर हनुमान प्रतिमा की तस्वीर साझा की। इसके साथ उन्होंने लिखा, 'जब हम जीतेंगे, तो इसे गिरा देंगे।' उनकी इस टिप्पणी के बाद हिंदू समूहों और विचारकों ने विरोध जताया। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचि बख्शी ने ह्यूजेस की टिप्पणी को राष्ट्रविरोधी बताया और इसे हिंदू धर्म के खिलाफ खतरा करार दिया।
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पूर्व सैनिक बोले- पूजा स्थल को निशाना बनाना गलत
रुचि बख्शी ने कहा कि किसी अमेरिकी समुदाय के पूजा स्थल को सिर्फ इसलिए नुकसान पहुंचाने की बात करना कि वहां किसी दूसरे धर्म को मानने वाले लोग पूजा करते हैं, हिंदू धर्म के खिलाफ खतरा है। उन्होंने खुद को एक अमेरिकी-हिंदू बताया और अमेरिका में हिंदू विरोधी नफरत को लेकर चिंता जताई। बख्शी ने कहा कि अगर अमेरिका में जीत का मतलब हिंदू मंदिरों को गिराना है, तो ऐसा चाहने वाले उस देश की बात नहीं कर रहे जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी।
हिंदू संगठन और दूसरे पूर्व सैनिक भी समर्थन में आए
बख्शी के बयान को कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (सीओएचएनए) और टेक्सास में रहने वाले अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक कार्ल व्हीलेस का समर्थन मिला। व्हीलेस खुद को राजनीतिक टिप्पणीकार बताते हैं। सीओएचएनए ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वह सोशल मीडिया मंच पर खुले धार्मिक पूर्वाग्रह को मुख्यधारा में लाए जाने से चिंतित है और इसके खिलाफ बख्शी के साथ खड़ा है।
यह भी पढ़ें: अमेरिका में एयर ट्रैफिक सिस्टम फेल: न्यूयॉर्क के तीन बड़े एयरपोर्ट पर उड़ानें ठप; क्या है वजह?
चुनावी माहौल में भारतीय-अमेरिकियों को लेकर भी बहस
टेक्सास में मध्यावधि चुनाव अभियान के दौरान आप्रवासी विरोधी बयानबाजी भी लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। राज्य में पांच लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। भारतीय-अमेरिकी समुदाय उस समय भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आया था, जब सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ रहे रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों पर टिप्पणी की थी। ये छात्र एक फुटबॉल खेल में जीत का जश्न मना रहे थे।
बो फ्रेंच की पोस्ट पर भी हुआ था विवाद
टेक्सास रेलरोड कमिश्नर के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने छात्रों के जश्न की तस्वीर साझा की थी। उन्होंने लिखा था कि उन्होंने सुना है, 'इस साल यूटी ग्रेजुएशन ऐसा दिख रहा था और इसके साथ कहा था कि समस्या अब जाहिर तौर पर किसी की कल्पना से कहीं ज्यादा खराब है।' हाउस डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफरीज ने पिछले सप्ताह कहा था कि दक्षिणपंथी रिपब्लिकन बार-बार अपमानजनक शब्दों का सामान्य तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।
रिपब्लिकन नेताओं ने भी फ्रेंच की पोस्ट की आलोचना की
रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने फ्रेंच की पोस्ट की निंदा की। उन्होंने सवाल किया कि क्या दूसरे रिपब्लिकन नेता भी उस असहिष्णुता और नस्लवाद की निंदा करेंगे, जिसे उन्होंने फ्रेंच की पोस्ट में बताया। टेक्सास के रिपब्लिकन विधायक लेसी हल और जेरेड पैटरसन ने भी पोस्ट की आलोचना की। हालांकि, फ्रेंच ने बाद में अपनी टिप्पणी का बचाव किया और कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की प्रवेश प्रक्रिया टेक्सास के लोगों के लिए नुकसानदेह है।
टेक्सास में सीनेट चुनाव पर भी सबकी नजर
रिपब्लिकन लंबे समय से टेक्सास की राजनीति में मजबूत स्थिति में रहे हैं। अब डेमोक्रेट नवंबर में होने वाले सीनेट चुनाव में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। मूल खबर के मुताबिक, अलग-अलग चुनावी पूर्वानुमानों और भविष्यवाणी बाजारों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स तालारिको को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के खिलाफ बढ़त दिखाए जाने का उल्लेख किया गया है। वहीं, टेक्सास के गवर्नर पद के लिए मौजूदा रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट के सीट बरकरार रखने का अनुमान बताया गया है।