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'टकराव नहीं सहयोग से होगा बदलाव': अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन में बोले पीएम मोदी, इसरो पर क्या कहा?

Thu, 10 Sep 2026 03:29 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 10 Sep 2026 03:29 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए पूरी दुनिया को एकजुट होकर अंतरिक्ष का इस्तेमाल करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में टकराव के बजाय सहयोग जरूरी है। भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने और 2040 तक चांद पर इंसान भेजने की तैयारी में है। क्या दुनिया टकराव छोड़कर भारत के इस शांतिपूर्ण मंत्र को अपनाएगी? आइए, विस्तार से जानते पीएम मोदी ने और क्या कुछ कहा...

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PM Modi at International Space Summit Cooperation Not Confrontation Shape Space Future What He Say About ISRO
पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित  अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी दुनिया के सामने भारत का अंतरिक्ष दृष्टिकोण रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतरिक्ष की संभावनाएं असीम हैं और इसे सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। आज जैसे-जैसे अंतरिक्ष की कक्षाएं उपग्रहों से भर रही हैं, तकनीकें अधिक शक्तिशाली हो रही हैं और कई नए देश व एजेंसियां इसमें शामिल हो रही हैं, वैसे-वैसे दुनिया के सामने चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे समय में हमारे फैसले बिल्कुल साफ होने चाहिए। हमें टकराव के बजाय सहयोग, थोड़े समय के फायदे के बजाय टिकाऊ विकास और किसी को बाहर करने के बजाय सबको साथ लेकर चलने का रास्ता चुनना होगा। भारत का अंतरिक्ष अभियान इसी सोच और सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।
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वैश्विक मंच पर भारत ने क्या संदेश दिया?

पीएम मोदी ने समिट में कहा कि भारत का नजरिया 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' के विचार से जुड़ा हुआ है और अब इस भावना को धरती से आगे अंतरिक्ष तक ले जाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों, बातचीत और आपसी सहयोग पर आधारित एक सुरक्षित, शांत और टिकाऊ अंतरिक्ष व्यवस्था का मजबूती से समर्थन करता है। पीएम ने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक आंकड़ों और जानकारियों को पूरी ईमानदारी तथा खुलेपन के साथ सभी लोगों की भलाई के लिए साझा किया जाना चाहिए। भारत का पूरा अंतरिक्ष सफर इसी लोक-कल्याणकारी सोच को दर्शाता है और इसे पूरी दुनिया तक पहुंचाना चाहता है।
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इसरो की सफलता का राज क्या है और इसने दुनिया का भरोसा कैसे जीता?

  • पीएम मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वैश्विक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि इसरो ने अपनी बेहतरीन और कम लागत वाली सटीक उड़ानों के दम पर पूरी दुनिया में जबरदस्त सम्मान कमाया है। 
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  • इसरो की क्षमताएं सीधे तौर पर हमारे किसानों और मछुआरों के जीवन को आसान बना रही हैं। यह मौसम की भविष्यवाणी करने, आपदा प्रबंधन और सटीक दिशा-दूरी बताने (नेविगेशन) में लगातार देश और दुनिया की सेवा कर रहा है। 
  • भारत के भरोसेमंद रॉकेटों के जरिए अब तक 34 देशों के 430 से अधिक उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं। इसरो की तकनीक और साझेदारियां केवल भारत ही नहीं, बल्कि समूचे विश्व के काम आ रही हैं। 
  • इस भरोसे के पीछे भारत के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों की पीढ़ियों की दिन-रात की कड़ी मेहनत और पसीना है, जिन्होंने एक-एक मिशन को सफल बनाकर भारत को दुनिया के अग्रणी अंतरिक्ष देशों की कतार में गर्व से खड़ा किया है।

चंद्रयान-3 से लेकर 2040 के मिशन तक भारत के बड़े लक्ष्य क्या हैं?

भारत की ऐतिहासिक कामयाबियों और भविष्य के बड़े लक्ष्यों को सामने रखते हुए पीएम मोदी ने कई अहम जानकारियां साझा कीं
  • चंद्रयान-3 मिशन के जरिए भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला दुनिया का पहला देश बना।
  • सूर्य के रहस्यों को समझने के लिए आदित्य एल-1 मिशन अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक डटा हुआ है और आंकड़े जुटा रहा है।
  • बीते साल एक भारतीय नागरिक ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) का दौरा कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
  • भारत ने साल 2035 तक अपना खुद का भारतीय स्पेस स्टेशन स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है।
  • साल 2040 तक किसी भारतीय को चंद्रमा की सतह पर भेजने के संकल्प पर काम तेजी से जारी है।
  • इन सभी अभियानों का एकमात्र मुख्य उद्देश्य यह है कि विज्ञान और तकनीक का पूरा लाभ समस्त मानव जाति तक आसानी से पहुंचे।

निजी क्षेत्र और फ्रांस के साथ भारत की साझेदारी का भविष्य क्या होगा?

पीएम मोदी ने बताया कि आज इसरो की शानदार विशेषज्ञता के साथ-साथ भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय उद्यमों की ऊर्जा इसरो की तकनीकी शक्ति से मिलकर देश को नई ऊंचाई दे रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 1960 के दशक में जब भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू हुआ था, तब से फ्रांस भारत का एक बेहद भरोसेमंद साझेदार रहा है। आज दोनों देशों का यह साझा काम पृथ्वी के अध्ययन (अर्थ ऑब्जर्वेशन) से लेकर कई आधुनिक तकनीकों तक फैला हुआ है, जो विज्ञान की शक्ति को मानवता के कल्याण से जोड़ता है। पीएम ने फ्रांस और पूरी दुनिया को भारत के अगले अंतरिक्ष सफर में हमसफर बनने का खुला न्योता दिया। उन्होंने कहा कि पेरिस का यह स्पेस समिट दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दे कि हम सब मिलकर खोज करेंगे, मिलकर नए आविष्कार करेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिलकर अंतरिक्ष की रक्षा करेंगे।
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